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मेहनत, लगन और सही दिशा मिल जाए तो इंसान सीमित संसाधनों में भी बड़ी कामयाबी हासिल कर सकता है. छपरा जिले के ईशुपुर प्रखंड के रामपुर रटॉली गांव की रहने वाली कलावती देवी इसकी जीती-जागती मिसाल हैं. सरकारी जीविका योजना का लाभ उठाकर उन्होंने सिर्फ 10 हजार रुपये के लोन से अपना काम शुरू किया और आज न केवल खुद आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि 100 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उन्हें हुनरमंद और आत्मनिर्भर बना रही हैं. रिपोर्ट- विशाल कुमार
इंसान मेहनत और लगन से क्या कुछ नहीं कर सकता. इसके कई उहादरण हमको आपको अपने आसपास ही दिखते हैं. बहुत से लोग सबकुछ होते हुए भी कुछ नहीं कर पाते हैं और कुछ लोग ना कुछ होते हुए भी धीरे-धीरे अपना काम और रोजगार बढ़ाते जाते हैं और सफलता की सीढ़ी चढ़ते जाते हैं. लोगों को खुद का काम और रोजगार स्थापित करने में सरकार की कई योजनाएं भी बहुत फायदेमंद साबित होती हैं.
अगर उन योजनाओं पर सही नीयत और मेहनत के साथ काम किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है. इसका उदाहरण हैं छपरा के ग्रामीण क्षेत्र की महिला कलावती. आप जब कलावती के काम और उनकी मेहनत और लगन के बारे में जानेंगे तो इससे आपको भी हिम्मत मिलेगी खुद का रोजगार करने का आइडिया भी मिल सकता है.
कलावती ने सरकारी योजना का लाभ उठाकर ना सिर्फ खुद के लिए रोजगार तैयार किया बल्कि वह 100 से अधिक महिलाओं को खुद के साथ जोड़कर उन्हें भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं. कलावती जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर से भी दूर ग्रामीण क्षेत्र में रहती हैं. जिला मुख्यालय से इतनी दूरी के बाद भी वह ग्रामीण क्षेत्र में अपना खुद का कारोबार कर रही हैं और उससे अपना घर चला रही हैं. कलावती देवी अपने साथ 100 से अधिक महिलाओं को जोड़कर काम करती हैं. ये महिलाएं पहले बेरोजगार थी.
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जब से कलावती देवी के संपर्क में आई हैं तब से प्रशिक्षण लेकर अपना रोजगार कर रही हैं. रोजगार शुरू करने के लिए ये महिलाएं सरकार की जीविका योजना से लोन लेती हैं और फिर अपनी रुचि और पसंद के हिसाब से अलग-अलग काम करती हैं. कोई बकरी पालन करता है, तो कोई मुर्गा पालन, कोई महिला चूड़ी बना रही है तो कोई सिलाई का काम करती हैं. अलग-अलग बिजनेस कर ये महिलाएं अच्छी कमाई कर रही हैं अन्य महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं.
कलावती देवी ईशुपुर प्रखंड के रामपुर रटॉली गांव निवासी हैं. उन्होंने सबसे पहले 10 हजार रुपये लोन लेकर सिलाई मशीन खरीदी. कपड़ा सिलाई से कमाई होने लगी तो चूड़ी बनाने का प्रशिक्षण लिया. इसके बाद उन्होंने स्वेटर सिलाई करना और गुलदस्ता तैयार करना सीख लिया. अब वह कई आइटम तैयार करती हैं. यही सब काम वह लगभग 100 से अधिक महिलाओं को भी सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में उनकी मदद कर रही हैं.
लोकल 18 से कलावती देवी ने बताया कि हम चूड़ी बनाते हैं, स्वेटर और क्ले आर्ट भी बनाना जानते हैं. उन्होंने बताया कि ये सब सीखने के बाद उन्होंने कई महिलाओं को भी इस हुनर को सिखाया है. उन्होंने बताया कि उनके 150 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं, जो हुनर सीखकर अलग-अलग व्यवसाय कर रही हैं. उन्होंने बताया कि सबसे पहले 10 हजार लोन लिया. उस पैसे से उन्होंने सिलाई मशीन खरीद कर कपड़ा सिलाई का काम किया. उससे कमाई होने पर अपना कारोबार और बढ़ाने के लिए स्वेटर बनाना, चूड़ी तैयार करना और क्ले आर्ट सीख लिया.
कलावती ने बताया कि उनका प्रोडक्ट छपरा से लेकर पटना, सिवान और गोपालगंज सहित लोकल में आसानी से सेल हो जाता है. पटना सरस मेला और सोनपुर मेला में इस बार उनकी चार लाख रुपये की बिक्री हुई थी. इस बिजनेस से 100 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं. ये महिलाएं घर पर चीजें तैयार करके उसे स्थानीय मार्केट में बेचकर अच्छी कमाई करती हैं. कलावती ने बताया कि वह इस बिजनेस को और बड़ा रूप देने के लिए प्रयास कर रही हैं. इसके लिए उन्होंने सरकार की जीविका योजना को महिलाओं के लिए बहुत बेहतरीन स्कीम बताया. इस योजना से ग्रामीण क्षेत्र कई महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार चलाने में मदद कर रही हैं.


