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Maharajganj news: वृद्धिचंद मौर्य ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताया कि उनके पास शो प्लांट, फलदार पौधे और लगभग सभी वैरायटी के पौधे मिलते हैं. वर्तमान समय में उनके नर्सरी में 300 से भी ज्यादा वैरायटी के पौधे मौजूद है जबकि उन्होंने बताया कि उनके नर्सरी में 500 से 600 तक के अलग-अलग वैरायटी के पौधे तैयार किए जाते हैं जिस पर काम किया जाता है.
महराजगंज: यूपी का महराजगंज जिला सिर्फ अपने ऐतिहासिक और भौगोलिक स्थिति के लिए ही नहीं बल्कि अपने कृषि क्षेत्र के लिए भी जाना जाता है. पड़ोसी देश नेपाल से सटा हुआ यह जिला कृषि के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होता है. यहां की भूमि लगभग सभी प्रकार के खेती के लिए बहुत ही उपयुक्त है और यहां की मिट्टी बहुत ही उपजाऊ मानी जाती हैं.
वैसे तो महराजगंज जिले के ज्यादातर किसान पारंपरिक खेती धान गेहूं और गन्ने की फसल उगाते हैं. इसके अलावा कुछ प्रगतिशील किसान सब्जी और नर्सरी के व्यवसाय को भी अपना रोजगार बनाते हैं. ऐसे ही है महराजगंज जिले के निचलौल क्षेत्र के वृद्धिचंद्र मौर्य जो एक लंबे समय से नर्सरी का व्यवसाय कर रहे हैं. वह अपनी नर्सरी में जंगली पेड़ पौधों के साथ-साथ एक बड़ी संख्या में अलग-अलग प्रकार के फूलों के पौधों को भी उगाते हैं.
500 से भी ज्यादा वैरायटी के पौधों पर करते हैं काम
वृद्धिचंद मौर्य ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताया कि उनके पास शो प्लांट, फलदार पौधे और लगभग सभी वैरायटी के पौधे मिलते हैं. वर्तमान समय में उनके नर्सरी में 300 से भी ज्यादा वैरायटी के पौधे मौजूद है जबकि उन्होंने बताया कि उनके नर्सरी में 500 से 600 तक के अलग-अलग वैरायटी के पौधे तैयार किए जाते हैं, जिस पर काम किया जाता है. बातचीत में उन्होंने बताया कि उनके यहां चार से पांच लोग हमेशा काम करते हैं जो नर्सरी के संचालन में सहयोग करते हैं. इनमें से तीन मजदूर परमानेंट उनके नर्सरी में काम करते हैं और दो मजदूर जरूरत के अनुसार उनके यहां डेली वेजेस के अनुसार काम करते हैं. पहले उनका नर्सरी निचलौल से थोड़ी दूरी पर स्थित बनकटी में फुटकर के रूप संचालित होता था लेकिन जगह कम होने की वजह से वहां उन्होंने उसे गोदाम बना दिया और यहां पर नर्सरी का संचालन कर रहे हैं.
180 रुपए से शुरू कर बनाया 50 लाख का व्यवसाय
उन्होंने बताया कि शुरुआती समय में उन्होंने सिर्फ 180 रुपए के साथ इस नर्सरी की शुरुआत की थी. पूछने पर उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान समय में उनके नर्सरी की कीमत कम से कम 50 लाख होगी. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साल 2004 में उन्होंने सिर्फ 180 रुपए में शुरू किए गए इस व्यवसाय को आज लाखों का व्यवसाय बना दिया है. उन्होंने कहा कि यहां पर बहुत लोग सिर्फ सामान्य फसलों का उत्पादन करते हैं और उससे जुड़ा व्यवसाय करते हैं लेकिन लोग इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं. मैंने इस पर ध्यान दिया और अपनी इच्छा और मेहनत से यहां पर नर्सरी का व्यवसाय शुरू किया और इसमें सफलता भी पाई है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


