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हर कोई अमीर बनना चाहता है, लेकिन असली आर्थिक आजादी एक लंबी प्रक्रिया है. पैसा धीरे-धीरे सुरक्षा, स्थिरता और फिर विरासत का रूप लेता है. हर चरण में सोच, जोखिम और प्राथमिकताएं बदलती रहती हैं. जानिए कैसे 5 लाख रुपये से शुरू होकर सफर 50 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.
सैलरी से नहीं, रणनीति से बनती है दौलत; जानिए 5 पड़ावों में अमीरी का पूरा खेल. (Image:AI)
नई दिल्ली. आर्थिक जीवन का पहला चरण सर्वाइवल मोड का होता है, जब हर महीना एक आर्थिक चुनौती के बराबर होता है. इस स्तर पर नेटवर्थ 5 लाख रुपये से कम होती है. यहां जिंदगी सैलरी से सैलरी तक चलती है. अचानक मेडिकल बिल या किराया बढ़ने जैसी घटना पूरा बजट बिगाड़ सकती है. इस चरण में निवेश से ज्यादा जरूरी है 3 से 6 महीने का इमरजेंसी फंड बनाना. करीब 50,000 से 1 लाख रुपये की बचत व्यक्ति को मानसिक शांति देती है. असली शुरुआत तब होती है जब अगला महीना डराने के बजाय भरोसा देता है.
दूसरा चरण: वित्तीय स्थिरता की शुरुआत
जब नेटवर्थ 5 लाख रुपये से 50 लाख रुपये के बीच पहुंचती है, तो जीवन में थोड़ी स्थिरता आती है. रोजमर्रा के खर्च तनाव नहीं देते. इस स्तर पर SIP, बीमा और नियमित बचत जैसी आदतें बनाना बेहद जरूरी है. हालांकि यह चरण नाजुक भी होता है. ज्यादा EMI या दिखावे वाला खर्च दोबारा पीछे धकेल सकता है. इसलिए अनुशासन और खर्च पर नियंत्रण इस स्टेज की सबसे बड़ी कुंजी है.
तीसरा चरण: आरामदायक जिंदगी की ओर कदम
50 लाख से 5 करोड़ की नेटवर्थ व्यक्ति को ‘फाइनेंशियली कम्फर्टेबल’ बना देती है. घर, गाड़ी और छुट्टियां अब सपना नहीं, हकीकत बन जाते हैं. सोच अब सिर्फ खर्च चलाने से हटकर भविष्य की योजना पर जाती है- बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट फंड और संतुलित निवेश पोर्टफोलियो. यहां अवसर भी ज्यादा होते हैं और भटकाव भी. गलत फैसले इस प्रगति को धीमा कर सकते हैं, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है.
चौथा चरण: असली आर्थिक आजादी
जब संपत्ति 5 करोड़ रुपये से 50 करोड़ रुपये के बीच होती है, तब मासिक बजट की चिंता लगभग खत्म हो जाती है. विदेशी यात्राएं, लग्जरी लाइफस्टाइल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सामान्य बात बन जाती हैं. लेकिन यहां असली फोकस कमाई से ज्यादा संपत्ति को सुरक्षित रखने पर होता है. टैक्स प्लानिंग, पैसिव इनकम और रिस्क मैनेजमेंट अहम हो जाते हैं. यह वह चरण है जहां पैसा आपके लिए काम करता है, न कि आप पैसे के लिए.
पांचवां चरण: पीढ़ियों तक चलने वाली विरासत
50 करोड़ रुपये से अधिक की नेटवर्थ ‘जनरेशनल वेल्थ’ का संकेत देती है. अब लक्ष्य सिर्फ खुद की जरूरतें पूरी करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार बनाना होता है. फैमिली ऑफिस, एस्टेट प्लानिंग और परोपकार जैसी योजनाएं यहां महत्व रखती हैं. इस स्तर पर पैसा प्रभाव और सामाजिक योगदान का माध्यम बन जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी चरण को छोड़ने के बजाय हर पड़ाव को समझकर आगे बढ़ना ही असली सफलता है. अनुशासित निवेश, लंबी अवधि की सोच और समझदारी भरी योजना ही 5 लाख रुपये से 50 करोड़ रुपये तक की यात्रा को संभव बनाती है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें

