5,500 करोड़ का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे गंगा के कटान की जद में, क्या विकास की रफ्तार पर लगेगा ब्रेक? जानिए

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बलिया में बन रहा 5,500 रुपए करोड़ की लागत वाला 132 किमी लंबा गाजीपुर-बलिया-मांझीघाट ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे इन दिनों गंगा के तेज कटान की बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है. हैबतपुर के पास नदी का बढ़ता बहाव निर्माण कार्य पर खतरा बनता दिख रहा है. यदि समय रहते मजबूत ठोकर (स्पर) नहीं बनाए गए, तो बाढ़ के दिनों में यह ड्रीम प्रोजेक्ट संकट में पड़ सकता है.

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बलिया. जिले की सबसे बड़ी उपलब्धि माने जा रहे 5,500 करोड़ की लागत से बन रहे 132 किमी लंबे गाजीपुर-बलिया-मांझीघाट ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर इन दिनों कुदरत की कड़ी परीक्षा चल रही है. बलिया शहर के हैबतपुर के पास गंगा का तेज बहाव निर्माण स्थल को खुली चुनौती दे रहा है. सवाल साफ है क्या विकास की रफ्तार गंगा की धार से तेज साबित होगी? स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि यदि गंगा किनारे मजबूत ठोकर (स्पर) नहीं बनाए गए, तो बाढ़ के दिनों में यह एक्सप्रेसवे गंभीर खतरे में पड़ सकता है.

5 किमी का संवेदनशील हिस्सा बना सबसे बड़ी चुनौती
चार लेन का यह ड्रीम प्रोजेक्ट बलिया की किस्मत बदलने वाला माना जा रहा है. खासकर करीब 5 किमी का संवेदनशील हिस्सा प्रशासन और इंजीनियरों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. यह अब सिर्फ सड़क निर्माण नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और प्रकृति के बीच सीधी टक्कर का रूप ले चुका है.

स्थानीय लोगों की राय: विकास बनाम कटान
स्थानीय निवासी अजय राय मुन्ना ने कहा कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बलिया जिले के विकास की रीढ़ है. अब तक जिले को किसी बड़े शहर से जोड़ने के लिए फोर लेन सड़क भी उपलब्ध नहीं थी. ऐसे में यह परियोजना उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है. हालांकि, उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि गंगा का कटान विकास की इस रफ्तार पर भारी पड़ता दिख रहा है. सरकार की ओर से  कटान रोकने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से ठोकर (स्पर) निर्माण की योजना बनाई गई थी. पत्थर लाए गए, पिलर डाले गए और करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षा सामग्री भी डाली गई, लेकिन गंगा के तेज बहाव ने कई प्रयासों को नुकसान पहुंचाया.

नदी का बढ़ता दायरा और खतरे की घंटी
नाव चालक अनूप साहनी ने बताया कि जब गंगा उफान पर होती है, तो कटान इतनी तेज होती है कि पलक झपकते ही जमीन बह जाती है. पहले गंगा शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर बहती थी और सरयू नदी भी डेढ़ किलोमीटर दूर थी. अब गंगा माल्देपुर से महज 500 मीटर की दूरी पर बह रही है. करीब छह किलोमीटर क्षेत्र में फैला कटान तेजी से शहर की ओर बढ़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि दरामपुर ठोकर के कारण अब तक बड़ी क्षति टली है, वरना हालात और गंभीर हो सकते थे.

जनता की मांग: ठोस कदम जरूरी
जनता की मांग साफ है कि यदि गंगा के कटान पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई, तो विकास का यह सपना खतरे में पड़ सकता है. अब सबकी नजर जिम्मेदार विभागों और सरकार के अगले कदम पर टिकी है कि इस बड़ी परियोजना को सुरक्षित रखने के लिए क्या ठोस कार्रवाई की जाती है.

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Madhuri Chaudhary

पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें



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