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JNU VC Santishree Dhulipudi Pandit: जेएनयू की पहली महिला वीसी शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित अपनी शानदार शिक्षा के साथ-साथ विवादों के लिए भी जानी जाती हैं. सोशल मीडिया विवाद से लेकर ‘विक्टिम कार्ड’ वाले ताजा बयान तक, जानें उनके कार्यकाल की पूरी टाइमलाइन और क्यों कैंपस में उनके इस्तीफे को लेकर आधी रात को खूनी संघर्ष हुआ.
Santishree Dhulipudi Pandit Biography: जेएनयू वीसी एक बार फिर विवादों में हैं
नई दिल्ली (JNU VC Santishree Dhulipudi Pandit). जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी की पहली महिला कुलगुरु शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित का सफर जितना प्रभावशाली रहा है, उतना ही विवादों से भरा भी. 15 जुलाई 1962 को रूस में जन्मीं शांतिश्री बेहद विद्वान परिवार से हैं. उन्होंने अपनी शिक्षा और करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए. फरवरी 2022 में जेएनयू की कमान संभालने के बाद से वे लगातार चर्चा के केंद्र में बनी हुई हैं. उनकी पहचान एक सख्त प्रशासक और बेबाक वक्ता के रूप में बन चुकी है.
जेएनयू वीसी शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित कौन हैं?
शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के पिता रिटायर्ड सिविल कर्मचारी धुलिपुड़ी अंजनेयुलु पत्रकार और लेखक भी थे, मां मुलामूदी आदिलक्ष्मी रूस के Leningrad Oriental Faculty Department में प्रोफेसर थीं. मद्रास यूनिवर्सिटी से गोल्ड मेडल के साथ BA-MA करने के बाद शांतिश्री ने JNU से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एमफिल और PhD पूरी की. वे 6 भाषाओं (तेलुगु, तमिल, मराठी, हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी) की जानकार हैं. पुणे विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर रह चुकी शांतिश्री के पास 30 साल से ज्यादा का शिक्षण अनुभव है.
विवादों से पुराना नाता
जेएनयू की पहली महिला वीसी शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित का विवादों से पुराना और गहरा नाता रहा है. इन दिनों भी वह एक इंटरव्यू में दिए गए स्टेटमेंट को लेकर चर्चा में हैं. मामला इतना बढ़ गया कि उनके इस्तीफे की मांग की जा रही है. जानिए जेएनयू वीसी शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित कब-कब विवादों में रहीं.
- फरवरी 2022: नियुक्ति और ट्विटर विवाद- जेएनयू में वीसी पद संभालते ही शांतिश्री के पुराने ट्वीट्स वायरल हो गए. इन ट्वीट्स में कथित तौर पर जेएनयू के छात्रों को ‘राष्ट्रविरोधी’ और कुछ समुदायों के खिलाफ सख्त टिप्पणियां थीं. भारी दबाव के बीच उन्होंने अपना सोशल मीडिया एक्स अकाउंट डिलीट कर दिया था.
- अगस्त 2022: मनुस्मृति और जाति पर बयान- एक कार्यक्रम में शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने कहा था कि धार्मिक रूप से कोई भी महिला ब्राह्मण नहीं है और हिंदू देवताओं की जाति को लेकर भी टिप्पणी की थी. इस बयान पर देशभर में बहस छिड़ गई थी और कई संगठनों ने उनका विरोध किया था.
- साल 2023-24: नए नियमों पर रार- जेएनयू कैंपस की दीवारों पर नारे लिखने या पोस्टर लगाने पर भारी जुर्माने और सख्त अनुशासन के नियमों को लेकर स्टूडेंट्स ने उन्हें ‘तानाशाह’ करार दिया. जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी की एडमिशन प्रक्रिया में बदलावों को लेकर भी वे लगातार छात्रों के निशाने पर रहीं.
- फरवरी 2026: ‘विक्टिम कार्ड’ और ताजा हिंसा- हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने दलितों और अश्वेतों की तुलना करते हुए ‘विक्टिम कार्ड’ न खेलने की सलाह दी. इस बयान को ‘जातिवादी’ मानकर स्टूडेंट्स ने उनके इस्तीफे की मांग शुरू कर दी, जो रविवार रात हिंसक झड़प में बदल गई.
आधी रात का बवाल और इस्तीफे की मांग
रविवार (22 फरवरी 2026) रात करीब 1:30 बजे जब लेफ्ट विंग के छात्र वीसी शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के खिलाफ जुलूस निकाल रहे थे, तभी साबरमती ढाबे के पास एबीवीपी और उनके बीच भिड़ंत हो गई. लाठी-डंडों और पथराव में कई छात्र घायल हुए जिन्हें एम्स (AIIMS) ले जाना पड़ा. छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक वीसी पद नहीं छोड़तीं, वे शांत नहीं बैठेंगे. शांतिश्री पंडित का कार्यकाल जेएनयू के इतिहास में सबसे हलचल भरे दौर में से एक माना जाएगा.
जहां एक तरफ वे यूनिवर्सिटी की रैंकिंग और अनुशासन सुधारने की बात करती हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके बयान और वैचारिक रुख उन्हें विवादों से दूर नहीं रहने देते.
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With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys…और पढ़ें


