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900 Year Old Vishnu Idol Found: पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्धमान में तालाब की खुदाई के दौरान कुछ ऐसा मिला है जिसने सबको हैरान कर दिया है. खुदाई के दौरान 800-900 साल पुरानी भगवान विष्णु की मूर्ति मिलने से सनसनी फैल गई है. पाल-सेन काल की इस दुर्लभ मूर्ति को देखकर ग्रामीणों ने पूजा शुरू कर दी. पुलिस ने मूर्ति को सुरक्षित कब्जे में लेकर पुरातत्व विशेषज्ञों को जांच के लिए सौंप दिया है.
बर्धमान में तालाब खुदाई के दौरान 800-900 साल पुरानी भगवान विष्णु की प्रतिमा मिली. (AI फोटो)
न्यूज 18 बांग्ला
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के वर्धमान में हैरान करने वाला मामला सामने आया है. दरअसल यहां तालाब में साधारण खुदाई चल रही थी. यह खुदाई अचानक आस्था और इतिहास के अद्भुत संगम में बदल गई. खुदाई के दौरान मशीनें चल रही थीं, मिट्टी हटाई जा रही थी. गांव वाले रोज की तरह काम देख रहे थे. तभी अचानक अर्थ मूवर मशीन किसी कठोर चीज से टकराई. इस बार आवाज अलग थी, काम रुक गया. लोगों की नजरें जमीन पर टिक गईं. धीरे-धीरे मिट्टी हटाई गई तो जो सामने आया उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया. मिट्टी के भीतर से भगवान विष्णु की प्राचीन मूर्ति प्रकट हुई. देखते ही लोगों के हाथ अपने आप जुड़ गए. कई लोगों ने इसे चमत्कार माना.
पूर्वी बर्धमान जिले के मेमारी थाना क्षेत्र के बड़र गांव में हुई इस घटना ने पूरे इलाके में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना दिया. खबर आग की तरह फैल गई. आसपास के गांवों से लोग प्रतिमा के दर्शन के लिए पहुंचने लगे. ग्रामीणों ने सावधानी से मूर्ति को साफ किया और अस्थायी रूप से मंदिर में स्थापित कर दिया. विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रतिमा करीब 800 से 900 साल पुरानी है और पाल-सेन कालीन कला का दुर्लभ नमूना मानी जा रही है. एक साधारण जीर्णोद्धार कार्य अचानक ऐतिहासिक खोज में बदल गया.
पाल-सेन काल की दुर्लभ विष्णु प्रतिमा मिलने से मचा उत्साह
- तालाब के जीर्णोद्धार का काम मशीनों से चल रहा था, तभी खुदाई के दौरान जमीन के भीतर से लगभग डेढ़ फुट ऊंची काले-भूरे पत्थर की प्रतिमा मिली. मूर्ति की बनावट देखते ही ग्रामीणों को अंदाजा हो गया कि यह बेहद प्राचीन है. सूचना मिलते ही मेमारी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और प्रतिमा को सुरक्षित अपने कब्जे में लेकर थाने ले आई. साथ ही पुरातत्व विशेषज्ञों और बर्धमान विश्वविद्यालय को इसकी जानकारी दी गई.
- इतिहासकारों के मुताबिक यह भगवान विष्णु की ‘स्थानक’ शैली की प्रतिमा है. इसमें भगवान सीधे खड़े दिखाई देते हैं. मूर्ति की मुद्रा ‘समभंग’ है यह उस दौर की दिव्यता और संतुलन को दर्शाती है. प्रतिमा में बारीक आभूषण, यज्ञोपवीत, मुकुट और अलंकरण बेहद बारिकी से तराशे गए हैं. चतुर्भुज स्वरूप में ऊपर के दाहिने हाथ में कौमुदकी गदा और बाएं हाथ में सुदर्शन चक्र स्पष्ट दिखाई देता है. हालांकि खुदाई के दौरान एक हिस्सा हल्का क्षतिग्रस्त हो गया.
- ग्रामीणों ने शुरुआत में प्रतिमा को मंदिर में रखने और पूजा शुरू करने की मांग की थी. लेकिन प्रशासन ने इसे ऐतिहासिक धरोहर मानते हुए सुरक्षित संरक्षण के लिए अपने कब्जे में लिया. संभावना है कि आगे इसे संग्रहालय में रखा जाएगा ताकि शोध और संरक्षण दोनों हो सकें.
यह मूर्ति कितनी पुरानी मानी जा रही है?
पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रतिमा लगभग 800 से 900 साल पुरानी है. इसकी शैली, पत्थर की बनावट और नक्काशी पाल या सेन वंश काल यानी 10वीं से 12वीं सदी की कला से मेल खाती है. यह प्राचीन बंगाल की समृद्ध मूर्तिकला परंपरा को दर्शाती है.
पाल-सेन काल की मूर्तियों की क्या खासियत होती है?
इस काल की मूर्तियों में अत्यंत बारीक आभूषण, संतुलित शरीर संरचना और आध्यात्मिक भाव प्रमुख होते हैं. मुकुट, हार, जनेऊ और हथियारों की नक्काशी बेहद सूक्ष्म होती है. यह मूर्ति भी उसी कलात्मक परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है.
अब इस प्रतिमा का क्या होगा?
पुलिस और प्रशासन ने प्रतिमा को संरक्षण के लिए अपने कब्जे में लिया है. विशेषज्ञों की जांच के बाद इसे बर्धमान विश्वविद्यालय के संग्रहालय या किसी सुरक्षित पुरातात्विक केंद्र में रखा जा सकता है ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित रह सके.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें


