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Tea for Headache Relief: चाय में मौजूद कैफीन हल्के सिरदर्द और माइग्रेन में कुछ देर के लिए राहत दे सकता है, लेकिन यह परमानेंट इलाज नहीं है. ज्यादा मात्रा में चाय पीने से एसिडिटी और कैफीन पर निर्भरता बढ़ सकती है. ऐसे में लोगों को रोज 2-3 कप से ज्यादा चाय नहीं पीनी चाहिए. प्रेग्नेंट महिलाओं को चाय-कॉफी का सेवन एक्सपर्ट की सलाह लेकर ही करना चाहिए.
चाय पीने से सिरदर्द से कुछ देर के लिए राहत मिल सकती है.
How Tea Affects Headache: सिरदर्द एक कॉमन समस्या है, जो अधिकतर लोगों को परेशान करती है. सिरदर्द होने पर कुछ लोग दवा लेते हैं, तो कई लोग चाय पीना पसंद करते हैं. कई लोग तो यह मानते हैं कि एक कप गर्मागर्म चाय पीने से सिरदर्द ठीक हो सकता है. कई लोग ऐसा करते भी हैं और फायदा मिलने की बात भी कहते हैं. अब सवाल है कि क्या सच में चाय पीने से सिरदर्द दूर हो जाता है? इस सवाल का जवाब खोज रहे हैं, तो डाइटिशियन से हकीकत समझ लेते हैं.
यूपी के गाजियाबाद के रंजना न्यूट्रीग्लो क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन रंजना सिंह ने News18 को बताया कि चाय में कैफीन नामक तत्व पाया जाता है, जो एक नेचुरल स्टिमुलेंट है. कैफीन हमारे ब्रेन की ब्लड वेसल्स को सिकोड़ने में मदद करता है. कई प्रकार के सिरदर्द और खासकर माइग्रेन में ब्लड वेसल्स फैल जाती हैं, जिससे दर्द बढ़ता है. ऐसे में थोड़ी मात्रा में कैफीन लेने से दर्द में टेंपररी राहत मिल सकती है. यही कारण है कि कुछ पेनकिलर दवाओं में भी कैफीन मिलाया जाता है, ताकि दवा का असर तेज हो सके. हालांकि इसे सिरदर्द का परमानेंट इलाज नहीं माना जा सकता है.
डाइटिशियन ने बताया कि हर तरह के सिरदर्द में चाय फायदेमंद नहीं होती है. अगर सिरदर्द तनाव, डिहाइड्रेशन या गैस की वजह से हो रहा है, तो सिर्फ चाय पीने से स्थायी समाधान नहीं मिलता है. कई बार खाली पेट ज्यादा चाय पीने से एसिडिटी बढ़ सकती है, जो सिरदर्द को और बढ़ा सकती है. इसके अलावा जो लोग रोजाना अधिक मात्रा में चाय या कॉफी पीते हैं, उन्हें कैफीन पर निर्भरता हो सकती है. अगर वे अचानक कैफीन कम कर दें, तो कैफीन विदड्रॉल हेडेक भी हो सकता है.
एक्सपर्ट का मानना है कि सीमित मात्रा में चाय पीना नुकसानदायक नहीं है और हल्के सिरदर्द में राहत दे सकता है. खासकर अदरक वाली या हर्बल चाय सूजन और मतली कम करने में मदद कर सकती है. अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो माइग्रेन के लक्षणों को कुछ हद तक कम कर सकते हैं. हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यह उपचार नहीं, बल्कि केवल अस्थायी राहत है. अगर सिरदर्द बार-बार हो रहा है, बहुत तेज है या उल्टी, चक्कर और धुंधली नजर जैसे लक्षणों के साथ है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों में डॉक्टर से मिलकर कंसल्ट करना जरूरी है.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें


