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Chhatarpur News: प्रीति बताती है कि जब वह कॉलेज में थीं तब से साहित्य में उनकी दिलचस्पी बढ़ने लगी थी. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में बीकॉम के दौरान उन्होंने साहित्य को करियर के रूप में सोच लिया था. कविताओं का लेखन और सुनना उन्होंने कॉलेज के दौरान ही शुरू कर दिया था. वह पहले गद्य शैली में लिखती थी. फिर पद्य शैली में लिखने लगी और तुकबंदी कविताएं भी लिखती थी.
आज हम आपको एक ऐसी बेटी की कहानी सुनाने जा रहे है जिसने साहित्य को अपना करियर बनाया और अब देशभर के प्रमुख कवि सम्मेलनों में प्रसिद्ध और श्रेष्ठ कवियों के साथ मंच साझा करती है. उनकी ग़ज़लों को सुनकर टूटे दिल भी जुड़ जाते है. उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ की रहने वाली प्रीति पांडे एक मशहूर कवयित्री है. प्रीति बताती है कि छतरपुर जिले के लवकुश नगर में इस बार भी अखिल भारतीय कवि सम्मेलन हो रहा है. जिसमें उन्हें आमंत्रित किया गया था.उन्होंने बताया कि वह पहले भी यहां आ चुकी है और जानती है कि यहां के श्रोता कौन सा साहित्य सुनना पसंद करते हैं.
प्रीति ने साहित्यिक कवयित्री के रूप में अपनी पहचान बनाई है. वह बताती है कि वह ग़ज़लें और शायरी तो करती है, लेकिन वह मूलतः साहित्यिक कवयित्री है और गीत, मुक्तक, सवैया, छंद जैसे विधाओं पर ज्यादा काम करती है. वह मंच पर ग़ज़लें करने से बचती है. प्रीति बताती है कि वह कोई डे नहीं मनाती है. लेकिन जो युवा इसे मनाते है. उनके लिए चार पंक्तियां सुनाती है.
“तो रूठोगी जब कभी तो मनाएंगे ये लड़के नखरे तुम्हारे सारे उठाएंगे ये लड़के राजा हो तुम हृदय के, ये सम्मान से कहना सम्मान से कहना, सम्मान से कहना रानी बनाकर सिर पर बिठाएंगे ये लड़के”
प्रीति बताती है कि जब वह कॉलेज में थीं तब से साहित्य में उनकी दिलचस्पी बढ़ने लगी थी. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में बीकॉम के दौरान उन्होंने साहित्य को करियर के रूप में सोच लिया था. कविताओं का लेखन और सुनना उन्होंने कॉलेज के दौरान ही शुरू कर दिया था. वह पहले गद्य शैली में लिखती थी. फिर पद्य शैली में लिखने लगी और तुकबंदी कविताएं भी लिखती थी.
प्रीति बताती है कि साल 2020 से वह भारत के प्रसिद्ध मंचों पर शीर्ष कवियों के साथ मंच साझा कर रही है. उनके परिवार का समर्थन उनके साथ रहा है और उनके बिना आगे बढ़ना संभव नहीं होता. पिछले 5 वर्षों से वह देश के प्रमुख मंचों पर अपनी प्रस्तुति दे चुकी है. इस बार लवकुश नगर के कवि सम्मेलन में उन्होंने श्रृंगार और हास्य कविताओं की प्रस्तुति दी है.


