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कॉफी पीना तो दुनियाभर में लोग पसंद करते हैं. एक दिन में करीब 2.2 अरब कप कॉफी लोग पी जाते हैं, लेकिन अब इसकी कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है. कारण जलवायु परिवर्तन, जिसकी वजह से कॉफी के उत्पादन पर गंभीर असर पड़ रहा है. एक रिसर्च में बताया गया है कि कॉफी उत्पादक शीर्ष 5 देशों में गर्मी के दिन बढ़ते जा रहे और उत्पादन घटता जा रहा है.
कॉफी का उत्पादन दुनियाभर में लगातार घटता जा रहा है.
नई दिल्ली. गरमागरम कॉफी पीना भला किसे नहीं पसंद है, लेकिन आपके इस पसंदीदा पेय पदार्थ को प्रकृति की नजर लग चुकी है. तभी तो दुनियाभर में कॉफी की कीमतों में लगातार उछाल आता जा रहा है और इसकी सिर्फ एक वजह है जलवायु परिवर्तन. एक रिसर्च में पता चला है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान और अनियमित मौसम का दुनिया के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. ऊंचे तापमान और सूखे की स्थिति से कॉफी की उपज घट रही है, जिससे इस लोकप्रिय पेय पदार्थ की कीमतें बढ़ रही हैं.
कॉफी दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली गैर-अल्कोहल पेय में से एक है. हर दिन लगभग 2.2 अरब कप कॉफी पी जाती है. अकेले अमेरिका में ही कम-से-कम दो-तिहाई वयस्क रोज कॉफी पीते हैं. वैज्ञानिकों एवं जलवायु शोधकर्ताओं के ‘गैर-लाभकारी समूह’ क्लाइमेट सेंट्रल के एक विश्लेषण के मुताबिक, दुनिया की कॉफी आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है और जलवायु परिवर्तन इसमें अहम भूमिका निभा रहा है.
कितने तापमान का बुरा असर
क्लाइमेट सेंट्रल ने वर्ष 2021 से वर्ष 2025 तक के तापमान का विश्लेषण कर कार्बन प्रदूषण से रहित एक काल्पनिक दुनिया से उनकी तुलना की. विश्लेषण में हर साल उन अतिरिक्त दिनों की गिनती की गई, जब जलवायु परिवर्तन से बड़े कॉफी उत्पादक देशों में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कम फसल और बढ़ी कीमतों का सबसे ज्यादा असर छोटे कॉफी उत्पादकों पर पड़ता है. कॉफी की फसल 30 डिग्री तापमान को सहन नहीं कर पाती और उसकी उत्पादकता कम हो जाती है.
कहां पैदा होती है सबसे ज्यादा कॉफी
दुनिया के शीर्ष पांच कॉफी उत्पादक देशों- ब्राजील, वियतनाम, कोलंबिया, इथियोपिया और इंडोनेशिया पर जलवायु परिवर्तन का दबाव बढ़ता जा रहा है. इन देशों की वैश्विक कॉफी आपूर्ति में करीब 75 फीसदी हिस्सेदारी है, लेकिन अब औसतन वर्ष में 144 दिनों से अधिक समय तक ऐसी गर्मी झेल रहे हैं जो कॉफी की फसल के लिए नुकसानदेह है. यही कॉफी की बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा कारण भी है.
अगर तापमान न बढ़े तो क्या फायदा
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव न होता तो ऐसे अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या हर वर्ष लगभग 57 दिन से भी कम होती. बढ़ता तापमान कॉफी पौधों की वृद्धि, फूल आने की प्रक्रिया और फल विकास को प्रभावित करता है. इसके अलावा, बारिश के रुझान में बदलाव भी कॉफी की फसल के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा कर रहा है. सूखे की स्थिति में उत्पादन घट सकता है और किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है. तापमान आदर्श स्थिति में रहने पर उत्पादन भी बढ़ता है और सप्लाई बेहतर होने से इसकी कीमतों में भी नरमी आ सकती है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें


