Last Updated:
विजय माल्या ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि ब्रिटेन की अदालतों के आदेश के कारण वे इंग्लैंड-वेल्स से बाहर नहीं जा सकते. अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी. माल्या ने कहा, ‘अंग्रेजी अदालतों के आदेश के कारण मैं इंग्लैंड-वेल्स से बाहर नहीं जा सकता और न ही कोई पासपोर्ट या ट्रैवल डॉक्यूमेंट ले सकता हूं. इसलिए मैं सटीक तारीख नहीं बता सकता कि कब भारत वापस आऊंगा.’
मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट में 11 मार्च को होगी.
मुंबई. विजय माल्या ने बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि वे अभी भारत नहीं लौट सकते, क्योंकि ब्रिटेन की अदालतों ने उन्हें इंग्लैंड और वेल्स छोड़ने या कोई अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज़ रखने या बनवाने से रोक रखा है. माल्या ने कहा, ‘अंग्रेजी अदालतों के आदेश के कारण मैं इंग्लैंड-वेल्स से बाहर नहीं जा सकता और न ही कोई पासपोर्ट या ट्रैवल डॉक्यूमेंट ले सकता हूं. इसलिए मैं सटीक तारीख नहीं बता सकता कि कब भारत वापस आऊंगा.’यह बयान हाई कोर्ट में दाखिल किया गया.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार माल्या फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स (एफईओ) एक्ट, 2018 के कुछ प्रावधानों को चुनौती दे रहे हैं, जिसके तहत उन्हें फरार आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है. कोर्ट ने पहले कहा था कि उनकी याचिका तभी सुनी जाएगी, जब वे खुद भारत में मौजूद हों. दिसंबर 2025 में चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड़ की बेंच ने साफ किया था कि माल्या को भारत आना होगा. माल्या ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट के दो पुराने फैसलों का हवाला दिया, जहां फरार घोषित लोगों की याचिकाएं उनकी अनुपस्थिति में सुनी गईं और कुछ मामलों में एफआईआर और एफईओ कार्यवाही रद्द भी की गईं.
उन्होंने दावा किया कि एफईओ एक्ट का मुख्य उद्देश्य बैंकों का कर्ज वसूलना था, जो इस मामले में पहले ही पूरा हो चुका है। माल्या का कहना है कि बैंकों को उनसे ज्यादा रकम मिल चुकी है, जबकि बैंक अभी भी और पैसा मांग रहे हैं. यूनियन सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह और एडवोकेट आदर्श व्यास ने कहा कि माल्या की याचिका नहीं सुनी जानी चाहिए.
अगर उनका पासपोर्ट रद्द होने के कारण वे नहीं आ सकते, तो सरकार उनके लिए ट्रैवल डॉक्यूमेंट का इंतजाम कर सकती है. कोर्ट ने माल्या के वकील अमित देसाई से कहा कि वे उनका बयान औपचारिक हलफनामे के रूप में दाखिल करें और सरकार से इसका जवाब मांगें. अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी, तब कोर्ट फैसला सुनाएगा.
उन पर क्या हैं आरोप
माल्या पर भारत में कर्ज चोरी, धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के कई मामले चल रहे हैं. किंगफिशर एयरलाइंस के लोन घोटाले में सीबीआई ने 2015 में एफआईआर दर्ज की थी. मार्च 2016 में कानूनी दबाव के बीच वे भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे. ब्रिटेन की अदालतों ने उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी है, लेकिन वे वहां एक ‘गोपनीय कानूनी मामला’ (जिसे राजनीतिक शरण की अर्जी माना जाता है) के जरिए रुके हुए हैं.
About the Author
करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें


