अगर हौसला मजबूत हो तो कमजोरी भी ताकत बन जाती है. आमिर खान की फिल्म ‘सितारे ज़मीन पर’ में सुनील का किरदार निभाने वाले आशीष पेंडसे की कहानी कुछ ऐसी ही है. आशीष ने अपनी जिंदगी से हजारों विशेष बच्चों को जीने की नई राह दिखाई है. वह डाउन सिंड्रोम से ग्रसित है. लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. जिस बीमारी की वजह से कई बच्चे खुद को कमरे में बंद कर लेते है. उसी को आशीष ने अपनी पहचान बना लिया. आज वह न सिर्फ एक कलाकार है. बल्कि देशभर के विशेष बच्चों के लिए मोटिवेशन की मिसाल बन चुके है.
किशोर नगर क्षेत्र में रहने वाले आशीष ने शुरुआत में शहर की एक किराना दुकान पर काम किया. वहीं से उनके आत्मविश्वास की शुरुआत हुई. दुकान संचालक चंद्रपाल सिंह चौहान बताते है कि आशीष हमेशा मुस्कुराते रहते थे. उनकी भाभी संगीता चौहान रोज एक ही बात कहती थीं, आशीष कोई काम छोटा नहीं होता. मेहनत कर ईमानदारी रख आगे जरूर बढ़ेगा. यही बातें आशीष के मन में घर कर गईं और धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया.
आशीष की जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें आमिर खान की फिल्म में काम करने का मौका मिला. फिल्म में उनके अभिनय को लोगों ने खूब सराहा. इसके बाद आशीष की पहचान सिर्फ शहर तक सीमित नहीं रही, बल्कि देशभर में फैल गई. आज हालत यह है कि दिल्ली, गोवा, उत्तराखंड सहित कई राज्यों की विशेष बच्चों से जुड़ी संस्थाएं उनसे संपर्क कर रही है. यहां तक कि यूनेस्को से जुड़ी संस्थाएं भी आशीष को बच्चों के लिए मोटिवेशनल सेशन में बुला रही है.
LOCAL 18 से बातचीत में आशीष बताते है कि वह सप्ताह में दो बार ऑनलाइन सेशन करते है. इन सेशनों में वह विशेष बच्चों से खुलकर बात करते है और कहते है हम सबमें कोई न कोई कमी होती है, लेकिन जरूरी यह है कि अपनी खूबी पहचानो. कमरे में जिंदगी बंद मत करो, बाहर निकलो, लोगों से घुलो-मिलो, आत्मविश्वास बढ़ेगा और प्यार भी मिलेगा.
आशीष बताते है कि फिल्म के दौरान आमिर खान उनके अच्छे दोस्त बन गए थे. उन्होंने सेट पर आमिर खान को एक गाना भी सुनाया नींद चुराई मेरी किसने ओ सनम…. साथ ही एक कविता भी सुनाई, जिसे आमिर खान ने बहुत पसंद किया. आशीष कहते है कि जेनिलिया मैडम और प्रसन्न सर भी उनके अच्छे दोस्त बन गए थे.
आशीष का सपना यहीं खत्म नहीं होता. वह कहते है मैं हिंदी फिल्म करूंगा, मराठी फिल्म करूंगा, सीरियल करूंगा, नाटक करूंगा. बहुत मेहनत करूंगा… यहां से खड़े होकर वहां तक जाऊंगा. उनकी आंखों में आज भी सपने हैं और चेहरे पर वही मुस्कान.
आशीष के पिता आनंद पेंडसे जो एसबीआई बैंक से मैनेजर पद से रिटायर्ड है. कहते है आज बहुत गर्व महसूस हो रहा है. आशीष की 2 साल की मेहनत रंग लाई है. उसकी सफलता के पीछे उसकी लगन सबसे बड़ा कारण है. उन्होंने बताया कि परिवार ने कभी आशीष को समाज से अलग नहीं किया. पत्नी स्वाति, बेटा अनिकेत और बहू वैभवी सभी ने हमेशा उसका साथ दिया. उन्होंने कहा, पहले लोग मुझे बैंक मैनेजर के रूप में जानते थे. अब पूरे देश में लोग मुझे आशीष के पिताजी के नाम से पहचानते है. यह मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है.


