बलिया: केवल 8 साल की उम्र, लेकिन सपने इतने बड़े कि आसमान भी छोटा पड़ जाए. आपने दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली बलिया की नन्ही बिटिया द इनविक्ट्स इंटरनेशनल स्कूल भगवानपुर मिड्ढा बलिया की बहुत ही होनहार छात्रा है. इसी स्कूल से उसने अपनी पढ़ाई की शुरुआत की और आज अपने जज़्बे, अनुशासन और मेहनत से सबका दिल जीत रही है.
आपको बताते चलें कि छोटी सी उम्र, मासूम सी मुस्कान और इरादे बिल्कुल फौलादी हैं भाई साहब! यह नन्ही बच्ची पढ़ाई के साथ-साथ डांस करती है. यही नहीं, तैरकी के मामले में तो मानो मछली सी फुर्तीली है. इसके अलावा भी कई गतिविधियों में एक साथ भाग लेती है. इस बच्ची से कुछ भी पूछिए, बेझिझक उत्तर देती हैं.
देश की सेवा का है सपना
बलिया जनपद के मुलायम नगर निवासी छात्रा चित्रांगिनी सिंह ने कहा कि उनके पास तैराकी का सर्टिफिकेट है. डांस और पढ़ाई में दो मेडल और तेरह प्रमाण पत्र उसकी मेहनत की गवाही देते हैं. कोच से सीखी हुई तैराकी और मंच पर आत्मविश्वास से किया गया डांस मानो इसकी प्रतिभा को और निखार रहे हो. इस नन्हीं बिटिया का सपना भी एकदम साफ है कि उसको आर्मी में वो ऑफिसर बनकर देश की सेवा करनी चाहती हैं. उसे यहां तक भी पता है कि यह राह आसान नहीं, लेकिन उसकी जिद भी कमाल की है.
डेली रूटीन बनाकर करती है पढ़ाई
नन्हीं बच्ची ने लोकल 18 से आगे कहा कि मेहनत करूंगी, दिन-रात पढूंगी, लेकिन आर्मी ऑफिसर बनके रहूंगी. इतनी छोटी उम्र में ऐसा दृढ़ संकल्प वाकई प्रेरणादायक है. इतनी कम उम्र में ही इसने रोज का रूटीन भी अनुशासन से भर दिया है. सुबह तैयार होकर स्कूल जाती है, पढ़ाई के बाद घर लौटती है, खाना खाती है, थोड़ा खेलती है, फिर ट्यूशन और शाम को दोबारा पढ़ाई कर डिनर करती है और सो जाती है. यह खेल, पढ़ाई और सपनों के बीच संतुलन बनाना बखूबी जानती है.
पिता का इलेक्ट्रिक सामान बिक्री का कार्य
हालांकि, बच्ची के माता-पिता भी बहुत मेहनती करते हैं. पिता इलेक्ट्रिक सामान का व्यवसाय करते हैं और मां बुटीक चलाती हैं. परिवार का सहयोग और स्कूल का मार्गदर्शन उसे लगातार आगे बढ़ा रहा है. स्कूल की डायरेक्टर डॉ. सोनिया सिंह ने बताया कि यह बच्ची स्कूल की शान है.
देश प्रेम का संस्कार
सुबह स्कूल में होने वाले प्रार्थना सभा में सिखाए जाने वाले देशप्रेम के संस्कार इसमें साफ झलकते हैं. सरकारी कार्यक्रम ‘हमारे आंगन, हमारे बच्चे’ में शानदार डांस प्रस्तुति पर भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा ने भी इस बच्ची को 1000 रुपए का पुरस्कार दिया.
यह नन्ही बिटिया साबित कर रही है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती है. अगर जिद सकारात्मक हो, तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है. इस बच्ची का भविष्य उज्ज्वल दिखाई दे रहा है. मतलब, एक बार इससे जो मिल जाए, बात करते नहीं थकेगा.


