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Success Story : जिस उम्र में बच्चे खेलकूद और पढ़ाई में व्यस्त रहते थे, उस समय लेंस टेक्नोलॉजी फाउंडर झोउ घर का काम संभालती थी और अपने पिता की देखभाल करती थीं. गरीबी से तंग आकर उन्होंने गांव छोड़ा और शहर आ गई. कुछ साल नौकरी करने के बाद उन्होंने अपनी वर्कशॉप शुरू की.
झोउ का जन्म 1970 में चीन के हुनान प्रांत के एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था.
नई दिल्ली. दुनिया में कई लोग अपनी किस्मत का रोना रोते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी किस्मत खुद अपने हाथों से लिखते हैं. लेंस टेक्नोलॉजी (Lens Technology) की फाउंडर झोउ क्यूयू फे भी इन लोगों में से ही एक है. चीन के एक सुदूर गांव में जन्मी झोउ को बचपन से ही पग-पग पर चुनौतियों और अभावों का सामना करना पड़ा. लेकिन, उन्होंने झुकने के बजाय जुझारूपन दिखाया और वो मुकाम हासिल कर लिया जिसकी कल्पना भी करना बहुत से लोगों के लिए मुश्किल होता है. आज उनकी कपंनी ऐपल (Apple), सैमसंग (Samsung) और हुवावे (Huawei) जैसी दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों को स्क्रीन सप्लाई करती है. झोउ की नेटवर्थ आज करीब 60 हजार करोड़ रुपये है.
झोउ का जन्म 1970 में चीन के हुनान प्रांत के एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था. नियति ने उनकी परीक्षा बचपन से ही लेनी शुरू कर दी थी. जब वह मात्र 5 साल की थीं, तब उनकी मां चल बसी. उनके पिता लकड़ी के कारीगर थे. एक हादसे में उन की आंखों की रोशनी चली गई और उनके उंगलियां भी कट गईं. घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि झोउ को छोटी उम्र में ही स्कूल छोड़ना पड़ा.
छोटी उम्र में संभाला घर
जिस उम्र में बच्चे खेलकूद और पढ़ाई में व्यस्त रहते थे, वहां झोउ घर का काम संभालती थीं और अपने अंधे पिता की देखभाल करती थीं. लेकिन सीखने की ललक ऐसी थी कि दिनभर काम करने के बाद वह रात को मोमबत्ती की रोशनी में किताबें पढ़ा करती थीं. घर के हालात जब और खराब हो गए तो 16 साल की उम्र में झोउ ने अपने गांव को छोड़कर शहर जाने का फैसला किया.
12-12 घंटे किया काम
बेहतर भविष्य की तलाश में शेन्ज़ेन (Shenzhen) चली गईं. वहां उन्हें एक घड़ी का कांच (Watch Lens) बनाने वाली फैक्ट्री में मजदूरी मिली. वह दिन में 12-12 घंटे काम करती थीं, लेकिन वह सिर्फ पैसा कमाने नहीं, बल्कि काम सीखने आई थीं. झोउ ने वहां की बारीकियों को समझा और करीब 500 डॉलर बचाकर साल 1993 में अपने भाई-बहनों के साथ मिलकर खुद का एक छोटा सा वर्कशॉप शुरू किया. यही वह नींव थी, जिसने आगे चलकर अरबों डॉलर के साम्राज्य का रूप लिया.


