10 बार नेशनल खेला, b.com की पढ़ाई की, अब बेच रहे 7 रुपए के समोसे! हैरान कर देगी इस खिलाड़ी की कहानी

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Kho Kho National Player Story: बुरहानपुर के महाजनापेठ क्षेत्र के रहने वाले खो-खो के नेशनल खिलाड़ी अविनाश नरसाड़े की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है. अविनाश 10 बार नेशनल प्रतियोगिता खेल चुके हैं और अब पिछले 10 सालों से नाश्ते की दुकान चला रहे हैं. उन्होंने बीकॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद बिजनेस का रास्ता चुना और सालाना 3 से 4 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं. उनकी दुकान पर 7 रुपए में समोसा-कचोरी मिलती है और वे दो लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. जानिए कैसे एक नेशनल खिलाड़ी खेल से बिजनेस तक का सफर तय कर दूसरों के लिए मिसाल बन गया.

Burhanpur News: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो खेल और संघर्ष दोनों की मिसाल है. महाजनापेठ इलाके में रहने वाले अविनाश नरसाड़े खो-खो के नेशनल खिलाड़ी रह चुके हैं. वे 10 बार नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके हैं और जिले के पहले ऐसे खिलाड़ी माने जाते हैं जिन्होंने इतनी बार नेशनल खेला. लेकिन आज वही खिलाड़ी पिछले 10 सालों से नाश्ते का होटल चला रहे हैं और दो लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.

बचपन से खेल का जुनून
अविनाश बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही खेलों का शौक था. खो-खो में उन्होंने कड़ी मेहनत की और 10 बार नेशनल स्तर पर खेला. आज भी जब कहीं टूर्नामेंट होता है, तो उन्हें कोच के तौर पर बुलाया जाता है. उन्होंने कई बच्चों को ट्रेनिंग भी दी है.

पिता के ठेले से सीखा काम
अविनाश के पिता शंकर पहले एक छोटे से ठेले पर समोसा-कचोरी बेचते थे. घर की जिम्मेदारी देखते हुए अविनाश ने पढ़ाई के साथ-साथ यह काम भी सीखा. बीकॉम फाइनल करने के बाद उन्होंने नौकरी के बजाय बिजनेस का रास्ता चुना. आज वे संजय नगर इलाके में अपनी नाश्ते की दुकान चला रहे हैं.

सालाना 3-4 लाख की कमाई
अविनाश बताते हैं कि उनकी दुकान पर सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है. वे सिर्फ 7 रुपए में समोसा-कचोरी बेचते हैं, जिससे लोगों की अच्छी खासी भीड़ जुटती है. सालाना 3 से 4 लाख रुपए तक की कमाई हो जाती है. फिलहाल वे दो लोगों को रोजगार दे रहे हैं और आगे इसे बढ़ाने का लक्ष्य है.

एक बड़ा होटल खोलने का सपना
अभी उनकी उम्र सिर्फ 26 साल है, लेकिन सोच बड़ी है. उनका सपना है कि आगे चलकर एक बड़ी होटल खोलें और ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार दें. अविनाश की कहानी यह बताती है कि मेहनत और लगन हो तो खिलाड़ी मैदान के बाहर भी जीत सकता है.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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