टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार जांच में सामने आया कि हथियार मुख्य शूटर दीपक शर्मा से हरियाणा के झज्जर इलाके से बरामद किया गया. आरोपी इसे फायरिंग के बाद छिपाकर रखे हुए था. अब इस हथियार को मुंबई के कलिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया है, जहां बैलिस्टिक टेस्ट से यह पुष्टि होगी कि रोहित शेट्टी के घर पर चली गोलियां इसी बंदूक से दागी गई थीं. पुलिस सूत्रों के अनुसार इस हमले के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग का कनेक्शन और 3 लाख रुपए की सुपारी का एंगल भी सामने आया है.
- पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि इस्तेमाल किया गया हथियार कंट्री-मेड लेकिन अत्याधुनिक डिजाइन वाला था. इसे इस तरह तैयार किया गया था कि आकार पिस्टल जैसा रहे, लेकिन मारक क्षमता राइफल जैसी हो. यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां इसे बेहद खतरनाक श्रेणी का हथियार मान रही हैं. सामान्य अपराधों में आमतौर पर .32 या .315 बोर हथियार मिलते हैं, लेकिन 7.62 mm कैलिबर का इस्तेमाल हाई-रिस्क ऑपरेशन या गैंगवार में ही देखा जाता है.
- जांच एजेंसियों का कहना है कि यह हथियार गैंग नेटवर्क के जरिए सप्लाई किया गया था. लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े एक मैकेनिक असराम फसले उर्फ बाबू पर हथियार उपलब्ध कराने का आरोप है. पुलिस अब सप्लाई चेन, इंटरमीडियरी और फंडिंग नेटवर्क की भी जांच कर रही है, क्योंकि ऐसे हथियार सामान्य अवैध बाजार में भी आसानी से उपलब्ध नहीं होते.
AK-47 जैसी ताकत, लेकिन पिस्टल की साइज
7.62 mm बोर आमतौर पर सैन्य राइफलों में इस्तेमाल होता है. यही इस हथियार की सबसे बड़ी खासियत और खतरा है. पिस्टल के छोटे आकार में इतनी ताकत होना बेहद दुर्लभ माना जाता है. इसका मतलब है कि हमलावर आसानी से हथियार छिपा सकता है, लेकिन फायरिंग का असर राइफल जैसा घातक हो सकता है.
हथियार की पूरी प्रोफाइल:
- कैलिबर: 7.62 mm राइफल ग्रेड अम्यूनिशन, बेहद हाई पावर.
- प्रकार: सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल- हर ट्रिगर पर एक गोली, लेकिन तेज फायरिंग क्षमता.
- बरामदगी: मुख्य आरोपी की निशानदेही पर झज्जर (हरियाणा) से.
- कानूनी स्थिति: आर्म्स एक्ट 1959 के तहत प्रतिबंधित श्रेणी (Prohibited Category).
- जांच: बैलिस्टिक टेस्ट के लिए FSL भेजा गया.
- कनेक्शन: लॉरेंस बिश्नोई गैंग की अवैध सप्लाई चेन.
यह हथियार इतना खतरनाक क्यों माना जा रहा है?
क्योंकि 7.62 mm कैलिबर आमतौर पर AK-47 जैसी राइफलों में इस्तेमाल होता है. पिस्टल में इसका उपयोग बेहद दुर्लभ है. इससे निकली गोली की मारक क्षमता ज्यादा होती है और गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है.
क्या आम आदमी इसे खरीद सकता है?
नहीं. Arms Act 1959 के तहत ऐसे हथियार प्रतिबंधित श्रेणी में आते हैं. आम नागरिक को इसका लाइसेंस लगभग असंभव है. केवल सेना या विशेष सुरक्षा एजेंसियों को अनुमति मिलती है.
यह हथियार कहां से मिलता है?
ऐसे हथियार अवैध सप्लाई चेन के जरिए मिलते हैं. गैंग नेटवर्क, स्मगलिंग रूट और कंट्री-मेड मॉडिफिकेशन के जरिए इन्हें तैयार या लाया जाता है.
ब्लैक मार्केट में इसकी कीमत कितनी होती है?
अनुमान के अनुसार 7.62 mm सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल की कीमत ₹50,000 से ₹2-3 लाख तक हो सकती है. हाई-पावर हथियार होने के कारण इसकी मांग अपराधी नेटवर्क में ज्यादा रहती है.
पुलिस जांच अब किस दिशा में बढ़ रही है?
अब फोकस हथियार सप्लाई नेटवर्क, फंडिंग और गैंग कनेक्शन पर है. बैलिस्टिक रिपोर्ट आने के बाद केस में और खुलासे हो सकते हैं.
कानूनी पेच और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
7.62 mm जैसे हथियारों का अपराध में इस्तेमाल सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है. यह संकेत देता है कि संगठित गैंग्स के पास अब सैन्य स्तर की फायरपावर पहुंच रही है. इसी वजह से पुलिस अब केवल शूटर ही नहीं बल्कि पूरे हथियार नेटवर्क को तोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है.


