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Brinjal Organic Farming Tips: देवघर के युवा किसान वकील यादव ने साबित कर दिया है कि खेती घाटे का सौदा नहीं है. बिना किसी महंगे रासायनिक खाद के, सिर्फ खेत के खरपतवार से खाद तैयार कर और मल्चिंग तकनीक अपनाकर उन्होंने ₹30,000 की लागत में ₹80,000 से अधिक का मुनाफा कमाया है. आइए जानते हैं उनकी इस ‘स्मार्ट खेती’ के पीछे का पूरा विज्ञान.
देवघर: भारत की आत्मा गांवों में बसती है. गांवों की धड़कन खेती है. आज भी देश की आधी से ज्यादा आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है. लेकिन वक्त बदल रहा है. कल तक जो किसान केवल बैलों और पारंपरिक बीजों के भरोसे थे, आज वे वैज्ञानिक तकनीक और आधुनिक सोच से खेती की तस्वीर बदल रहे हैं. देवघर के एक युवा किसान, वकील यादव ने इस बदलाव को हकीकत में बदल कर एक नई मिसाल पेश की है. वकील ने मात्र 30 हजार खर्च कर 80 हजार कमाएं. जानिए उनकी खेती का वो सीक्रेट फॉर्मूला.
देवघर के रहने वाले वकील यादव ने साबित कर दिया है कि अगर खेती को सही प्रबंधन और नई सोच के साथ किया जाए, तो यह घाटे का सौदा नहीं बल्कि मुनाफे का शानदार जरिया बन सकती है. उन्होंने अपनी करीब सवा एकड़ जमीन पर पारंपरिक फसलों को छोड़कर भाटा बैंगन की उन्नत खेती शुरू की. वकील की सफलता की खास बात यह है कि उन्होंने आधुनिक तकनीक को अपनाया, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों को आधार बनाकर.
बिना रासायनिक खाद के तैयार किया काला सोना
वकील यादव बताते हैं कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा राज प्राकृतिक और जैविक खेती है. उन्होंने बाजार से महंगी और हानिकारक रासायनिक खाद खरीदने के बजाय अपने ही खेत के बेकार खरपतवार और घास-फूस का इस्तेमाल किया. उन्होंने इस कचरे से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की. इससे न केवल उनकी खेती की लागत में भारी कमी आई. बल्कि मिट्टी की सेहत और उसकी ऊर्वरा शक्ति भी सुरक्षित रही.
मल्चिंग और नमी प्रबंधन का जादू
खेती में पानी की बचत और पौधों की सुरक्षा के लिए वकील ने मल्चिंग विधि का प्रयोग किया. इस विधि में पौधों के चारों ओर सूखी घास या जैविक कचरा बिछा दिया जाता है. इसका लाभ यह हुआ कि जमीन में लंबे समय तक नमी बनी रही, जिससे सिंचाई का खर्च घटा. अनचाहे खरपतवार बहुत कम उगे, जिससे मजदूरी बची. पौधों का विकास तेजी से हुआ और फलों की गुणवत्ता भी बेहतर रही.
30 हजार निवेश कर कमाए ₹80 हजार
वकील यादव की मेहनत का परिणाम आंकड़ों में साफ नजर आता है. उन्होंने बताया कि इस पूरी फसल में उनकी कुल लागत करीब 30 हजार रुपये आई थी. इसके बदले में वे अब तक 80 से 90 हजार रुपये का मुनाफा कमा चुके हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि उनकी कमाई अभी थमी नहीं है. बैंगन की फसल अभी भी उत्पादन दे रही है, जिससे मुनाफे का यह आंकड़ा एक लाख के पार जाने की उम्मीद है.
वकील यादव की यह सक्सेस स्टोरी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक मार्गदर्शिका बन गई है. उनकी कहानी यह स्पष्ट संदेश देती है कि खेती में अपार संभावनाएं छिपी हैं. यदि किसान आधुनिक सोच रखें, सरकारी सलाह का लाभ उठाएं और प्राकृतिक संसाधनों का बुद्धिमानी से उपयोग करें, तो वे अपनी आय को दोगुना ही नहीं, बल्कि तीन गुना तक बढ़ा सकते हैं.
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