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संगम नगरी यानी की प्रयागराज को एक नेशनल हाईवे मिलने जा रहा है, जो चित्रकूट से वाराणसी तक बनेगा. इस हाईवे का नाम चित्रकूट-वाराणसी ग्रीनफील्ड हाईस्पीड होगा और अब इसको जमीन पर उतारने के लिए कवायद शुरू हो गई है. एनएचएआई ने 249 किलोमीटर लंबे सिक्सलेन एक्सेस कंट्रोल हाईस्पीड ग्रीनफील्ड कारिडोर की डिजाइन को मंजूरी दे दी है.
चित्रकूट से वाराणसी तक बनने जा रहा ग्रीनफील्ड हाईवे. (फोटो- AI)
प्रयागराजः संगम नगरी यानी की प्रयागराज को एक नेशनल हाईवे मिलने जा रहा है, जो चित्रकूट से वाराणसी तक बनेगा. इस हाईवे का नाम चित्रकूट-वाराणसी ग्रीनफील्ड हाईस्पीड होगा और अब इसको जमीन पर उतारने के लिए कवायद शुरू हो गई है. एनएचएआई ने 249 किलोमीटर लंबे सिक्सलेन एक्सेस कंट्रोल हाईस्पीड ग्रीनफील्ड कारिडोर की डिजाइन को मंजूरी दे दी है. इस प्रोजेक्ट के सर्वे और डीपीआर के लिए 10.37 करोड़ रुपये भोपाल की कंपनी को दे दिया गया है. कंपनी को 6 महीने में सर्वे रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.
इस हाईवे से किन जिलों को होगा फायदा
बता दें कि महाकुंभ के दौरान बुंदेलखंड और कानपुर से आने वाली गाड़ियां खूब जाम में फंस रही थीं. लेकिन इस हाईवे के बनने से 2031 में होने वाले कुंभ में बुंदेलखंड, मध्य प्रदेश और मिर्जापुर की ओर से आने वाले ट्रैफिक का बेहतर मैनेजमेंट हो पाएगा. इसके अलावा नैनी पुल पर लगने लगने वाले जाम को भी खत्म किया जा सकेगा. यह ग्रीनफील्ड हाईवे प्रयागराज के यमुनापार इलाके के बारा, करछना और मेजा तहसील क्षेत्र से होकर गुजरेगा. यह नया हाईवे चित्रकूट, प्रयागराज, मिर्जापुर होते हुए वाराणसी जाएगा.
गंगा एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी होगी मजबूत
बता दें कि गंगा एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी. बुंदेलखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में आर्थिक विकास को स्पीड मिलेगी. यह नया राजमार्ड चित्रकूट-प्रयागराज मार्ग के अतिरिक्त होगा और चित्रकूट को प्रयागराज एवं मिर्जापुर से इस नए राजमार्ड से जोड़ा जाना अभी प्रस्तावित है. एलाइनमेंट फाइनल होने के बाद अगले जमीन अधिग्रहण का काम शुरू होगा.
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प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें


