रांची की नेहा बांस की ऑर्गेनिक बांस ज्वैलरी से भारत में कमाई और पहचान.

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Ranchi Success Story : झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली नेहा बांस की ज्वैलरी बनाती हैं. उन्होंने बताया कि कभी उन्हें 5000 रुपये भी उधार नहीं मिलते थे. आज वह महीने की 50000 रुपये महीना कमा रही हैं. जानें नेहा की सफलता का राज.

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रांची : झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली नेहा बांस का बना हुआ ज्वैलरी बनाती हैं. जिसमें कई सारी वैरायटी होती है. खासतौर पर इयररिंग्स के कलेक्शन कम से कम 2000 से अधिक इनके पास हैं. बांस के नेकलेस से लेकर कई सारे प्रोडक्ट ज्वेलरी का यह बनाने का काम करती हैं. उन्होंने सरकार से लोन भी लिया था और ट्रेनिंग भी मिली थी. नेहा बताती हैं कि एक समय था, जब व्यापार शुरू करने के लिए 5000 रुपये भी किसी ने उधार नहीं दिया था. इसके बाद उन्होंने सरकार की मदद से लोन लिया और वहीं से उनका सिलसिला आगे बढ़ने लगा.

ग्रेजुएशन तक की हैं पढ़ाई

नेहा ने लोकल 18 को बताया कि उन्होंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की हैं, लेकिन इसके बाद कहीं नौकरी नहीं मिली. जहां उनके घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी. ऐसे में नौकरी करना या फिर पैसे कमाना काफी जरूरी था. मुझे हमेशा से पेंटिंग और कलाकारी करने का बड़ा शौक था तो सोचा खुद का कुछ किया जाए तो ₹5000 मांगने कोशिश की, पर किसी ने उनकी मदद नहीं की.

सरकार से लिया था 50000 का लोन

नेहा बताती हैं कि सरकार से 50000 का लोन मिला और बांस से कई सारी चीज बनाने की ट्रेनिंग खासतौर पर ज्वेलरी बनाने की मिली. उन्होंने बताया कि हमारे पास कई सारे नेकलेस और हार, ब्रेसलेट देखने को मिलेंगे और सिर्फ गहने तक ही नहीं, इसके ऊपर जो ऑर्गेनिक पेंटिंग आप देखते हैं. वह भी हमें बनाते हैं. खूबसूरत डिजाइन यह सारा कुछ उन्होंने अपने हाथों से बनाया है.

नेहा ने बताया कि यह पूरा का पूरा ऑर्गेनिक पेंट है, यह रंग जाने वाला नहीं है. खासतौर पर जो पर्यावरण से प्यार करते हैं. उनके बीच ये सब काफी हिट है. वह एक बार में कई सारे कलेक्शन ले लेते हैं. आज उनकी 50000 रुपये तक की कमाई हो जाती है. क्योंकि हम सिर्फ झारखंड ही नहीं हम केरल से लेकर मध्य प्रदेश, उड़ीसा और अन्य शहरों में भी सरकार की तरफ से स्टॉल लगाने का काम करते हैं. ऐसे में हमारे ग्राहक आज पूरे भारत में हैं.

बांस वाली दीदी कहते हैं लोग

नेहा आगे बताती हैं कि आज जब वह बाहर जाती हैं तो लोग कहते हैं कि बांस वाली दीदी आ गई हैं. मतलब अब लोग उनके कलेक्शन का इंतजार करते हैं. कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी शादी के कई सारे रस्मों में उनकी ज्वेलरी की डिमांड करते हैं. ऐसे में आज कोई दिक्कत नहीं है. वह अपने पैरों पर खड़ी रहती है. आज वह अपने घर की जिम्मेदारी उठा रही हैं. अब उन्हें खुद पर काफी गर्व महसूस होता है.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें



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