Khushi Kumari creates new history in Mohiuddinpur with BSF selection

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Vaishali Khushi kumari Success Story: शादी में दिक्कत होगी, मत पढ़ाओ जैसे कड़वे तानों को ढाल बनाकर वैशाली के मोहीउद्दीनपुर गांव की बेटी खुशी कुमारी ने इतिहास रच दिया है. खुशी ने BSF में चयनित होकर न केवल अपने खानदान का 3 पीढ़ियों का सूखा खत्म किया, बल्कि पूरे पंचायत की पहली सरकारी नौकरी पाने वाली लड़की बनीं.

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प्रभात कुमार/वैशाली: वैशाली जिले के मोहीउद्दीनपुर गांव में आज एक नया इतिहास रचा गया है. गांव की बेटी खुशी कुमारी ने बीएसएफ यानी सीमा सुरक्षा बल में चयनित होकर न सिर्फ अपने मां-बाप का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे पंचायत की पहली सरकारी नौकरी पाने वाली लड़की होने का गौरव भी हासिल किया है. यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि खुशी के पूरे कुटुंब (खानदान) में तीन पीढ़ियों के बाद किसी को केंद्र सरकार की नौकरी मिली है.

संघर्षों की आग में तपकर बनीं फौलाद
खुशी का यह सफर फूलों की सेज नहीं था. चार बहनों और एक भाई के भरे-पूरे परिवार में आर्थिक तंगहाली हमेशा आड़े आती रही. पिता लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और मां की तबीयत भी अक्सर खराब रहती है. घर की पूरी जिम्मेदारी, मां-बाप के इलाज का खर्च और सीमित संसाधनों के बावजूद खुशी ने अपनी हिम्मत नहीं टूटने दी.

पढ़-लिखकर क्या करोगी? ताने देने वालों की बोलती बंद
ग्रामीण परिवेश में जहां आज भी बेटियों की पढ़ाई को बोझ माना जाता है. खुशी को भी समाज की कड़वी बातें सुननी पड़ीं. गांव के लोग अक्सर उनके परिवार को ताना मारते थे कि लड़की को ज्यादा मत पढ़ाओ, शादी में दिक्कत होगी या फिर पढ़-लिखकर क्या करोगी, क्या सच में नौकरी ले लोगी? इन तानों को खुशी ने अपनी कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत बनाया. सुबह-शाम खेतों की पगडंडियों पर दौड़ लगाना और रात को लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करना उनकी दिनचर्या बन गई.

मुझे खुद पर भरोसा था
जैसे ही BSF में चयन की खबर मोहीउद्दीनपुर पहुंची. पूरे इलाके में जश्न का माहौल बन गया. खुशी कुमारी ने कहा कि मेरा सपना बचपन से ही देश सेवा का था. हालात मुश्किल थे. पर मुझे खुद पर भरोसा था. मैं अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देती हूं. जिन्होंने मुश्किल वक्त में भी मेरा साथ दिया.

आज बेटी ने सबका मुंह बंद कर दिया

वहीं खुशी की मां ममता देवी ने कहा कि हम बहुत खुश हैं. लोग कहते थे कि लड़की क्या करेगी? आज मेरी बेटी ने सबका मुंह बंद कर दिया है. वह अब सिर्फ मेरी बेटी नहीं, पूरे गांव का गौरव है. खुशी की यह उपलब्धि सामाजिक रूढ़ियों पर एक जोरदार प्रहार है. उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसलों में उड़ान हो, तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है. आज खुशी वैशाली की हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा का एक नया प्रतीक बन गई हैं.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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