कोटा. राजस्थान की कोचिंग सिटी कोटा में हर साल लाखों छात्र अपने सपनों को साकार करने आते हैं. इन्हीं छात्रों के बीच साल 2011 में एक साधारण स्टूडेंट के रूप में पहुंचे प्रियेश यादव ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उनका छोटा सा फूड स्टॉल करोड़ों का ब्रांड बन जाएगा. मेहनत, सही सोच और लगातार प्रयासों का नतीजा है कि आज “थापा जी मोमोज” कोटा ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी पहचान बना रहा है.
कोटा में चार स्टॉल और तीन आउटलेट हैं संचालित
आज कोटा शहर में थापा जी मोमोज के चार स्टॉल और तीन आउटलेट संचालित हो रहे हैं. गुमानपुरा, तलवंडी, राजीव गांधी नगर, जवाहर नगर और कोरल पार्क जैसे प्रमुख इलाकों में इनके कियोस्क और आउटलेट मौजूद हैं. यहां रोजाना सैकड़ों लोग मोमोज का स्वाद लेने पहुंचते हैं. स्वाद, गुणवत्ता और किफायती दाम ने इस ब्रांड को तेजी से लोकप्रिय बना दिया. प्रियेश यादव बताते हैं कि इस स्टार्टअप की असली सोच उनके छोटे भाई अमरेश यादव की थी.
2 से 2.50 करोड़ है सालाना इनकम
अमरेश ने 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़कर पूरी तरह बिजनेस पर फोकस किया, जबकि प्रियेश ने ग्रेजुएशन के साथ-साथ बिजनेस मॉडल को संभाला. दोनों भाइयों ने बाजार की गहरी रिसर्च की, ग्राहकों की पसंद को समझा और मार्केटिंग में यूनिक अप्रोच अपनाई. यही वजह रही कि उनका यह छोटा सा प्रयोग कुछ ही सालों में करीब 15 करोड़ रुपये का कुल रेवेन्यू करने वाला ब्रांड बन गया. फिलहाल यह बिजनेस सालाना करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपये की आय दे रहा है.
2025 में सबसे अधिक ऑर्डर का कीर्तिमान स्थापित किया
देशभर से 450 से अधिक फ्रेंचाइजी रिक्वेस्ट मिल चुकी है
अमरेश का कहना है कि विदेशी पर्यटकों को भी उनके मोमोज काफी पसंद आते हैं, इसलिए आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फ्रेंचाइजी खोलने की तैयारी है. कुल मिलाकर, मात्र 40 हजार रुपये से शुरू हुआ यह सफर आज करोड़ों के कारोबार तक पहुंच चुका है. थापा जी मोमोज न सिर्फ युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहा है, बल्कि यह बताता है कि सही सोच, मेहनत और लगन से छोटे शहर से भी बड़ा ब्रांड खड़ा किया जा सकता है.


