नई दिल्ली: टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा और उनके पूर्व पार्टनर जय अनंत देहाद्रई के बीच पेट डॉग रॉटवीलर ‘हेनरी’ की कस्टडी को लेकर जारी विवाद चल रहा है. यह मामला इस वक्त दिल्ली हाईकोर्ट की दहलीज पर है. इस केस ने भारतीय कानून के एक बड़े ‘ग्रे एरिया’ को सामने ला दिया है. दिल्ली हाईकोर्ट अब इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या एक पालतू जानवर को केवल चल संपत्ति माना जाए या उसे बच्चे की तरह सर्वश्रेष्ठ हित (Best Interest) के आधार पर कस्टडी दी जाए.
BNS और वर्तमान कानून: क्या कहता है प्रावधान?
भारतीय कानून, जिसमें अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) प्रभावी है, पालतू जानवरों को स्वतंत्र संवेदनशील इकाई के बजाय संपत्ति के रूप में देखता है.
· चल संपत्ति का दर्जा: कानून के अनुसार पालतू जानवर अभी भी मद या वस्तु की श्रेणी में आते हैं.
· स्वामित्व का आधार: विवाद की स्थिति में स्वामित्व उस व्यक्ति का माना जाता है जिसके पास खरीद की रसीद (Proof of Purchase) होती है.
· साकेत कोर्ट का रुख: निचली अदालत ने मोइत्रा की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि भारतीय कानून में पेट पेरेंट या वार्ड (Ward) जैसा कोई वैधानिक शब्द पालतू जानवरों के लिए उपलब्ध नहीं है.
क्या बच्चे की कस्टडी वाले नियम लागू हो सकते हैं?
महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट के 2014 के ‘ए नागराजा’ फैसले का हवाला देकर जानवरों की गरिमा की बात की है. कानूनी विशेषज्ञ अब बेस्ट इंटरेस्ट ऑफ द पेट (Best Interest of the Pet) के सिद्धांत की वकालत कर रहे हैं.
1. सर्वश्रेष्ठ हित सिद्धांत: यह सिद्धांत आमतौर पर बच्चों की कस्टडी में इस्तेमाल होता है, जहां यह देखा जाता है कि बच्चा किसके पास ज्यादा खुश और सुरक्षित रहेगा.
2. जॉइंट कस्टडी: बदलते समय के साथ कोर्ट अब विजिटेशन राइट्स (मिलने का अधिकार) और साझा कस्टडी जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जो तलाकशुदा जोड़ों के बच्चों के लिए होते हैं.
महुआ मोइत्रा का तर्क है कि हेनरी (पेड डॉग) का रजिस्ट्रेशन उनके नाम पर है और वे उसकी प्राथमिक देखभाल करती रही हैं. हालांकि देहाद्रई ने कुत्ते को खरीदा था. यह मामला तय करेगा कि आने वाले समय में पालतू जानवर कानून की नजर में केवल ‘चल संपत्ति’ रहेंगे या उन्हें परिवार के सदस्य जैसी मान्यता मिलेगी.
सवाल-जवाब
1. प्रश्न: क्या भारतीय कानून वर्तमान में पालतू कुत्ते को ‘बच्चा’ मानता है?
उत्तर: भारतीय कानून के तहत फिलहाल पालतू जानवरों को मानवीय बच्चों के समान ‘संवैधानिक वार्ड’ या ‘कानूनी संतान’ का दर्जा प्राप्त नहीं है. वर्तमान कानूनी ढांचे में पालतू जानवरों को ‘चल संपत्ति’ (Movable Property) की श्रेणी में रखा जाता है. यही कारण है कि ‘पेट पेरेंट’ शब्द का कोई वैधानिक आधार नहीं है. अदालतों में अक्सर इन्हें वैसी ही संपत्ति माना जाता है जैसे कोई फर्नीचर या गाड़ी, हालांकि धीरे-धीरे पशु कल्याण बोर्ड के नियमों के तहत इनके प्रति मानवीय संवेदनाओं पर विचार शुरू हुआ है.
2. प्रश्न: कानूनी विवाद होने पर पेट कस्टडी का फैसला मुख्य रूप से किस आधार पर किया जाता है?
उत्तर: जब किसी पालतू जानवर की कस्टडी पर विवाद होता है तो अदालतें प्राथमिक रूप से ‘स्वामित्व के प्रमाण’ (Proof of Ownership) को देखती हैं. इसमें यह देखा जाता है कि जानवर को खरीदते समय भुगतान किसने किया था और रसीद किसके नाम पर है. इसके अलावा, नगर निगम में जानवर का रजिस्ट्रेशन किसके नाम पर है और पशु चिकित्सा (Vet) रिकॉर्ड में मालिक के तौर पर किसका नाम दर्ज है, ये दस्तावेज फैसले में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
3. प्रश्न: महुआ मोइत्रा ने हेनरी की कस्टडी के लिए हाईकोर्ट में क्या विशेष दलीलें दी हैं?
उत्तर: महुआ मोइत्रा के वकील ने तर्क दिया है कि रॉटवीलर प्रजाति के कुत्तों की औसत उम्र काफी कम होती है और हेनरी पहले ही साढ़े पांच साल का हो चुका है, इसलिए उसे कस्टडी के लिए लंबा इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए. उन्होंने दलील दी कि वे हेनरी की प्राथमिक देखभाल करने वाली रही हैं और उनके पास इसके रजिस्ट्रेशन दस्तावेज भी हैं. उनकी मांग है कि जानवर को केवल एक ‘निर्जीव वस्तु’ न मानकर भावनात्मक लगाव और देखभाल के आधार पर कस्टडी का फैसला किया जाए.
4. प्रश्न: पालतू जानवरों के मामलों में ‘सर्वश्रेष्ठ हित’ (Best Interest) सिद्धांत का क्या महत्व है?
उत्तर: ‘सर्वश्रेष्ठ हित’ का सिद्धांत मूल रूप से बाल कस्टडी (Child Custody) से जुड़ा है, जहाँ अदालत यह देखती है कि बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास किसके पास बेहतर होगा. अब पालतू जानवरों के मामलों में भी इस सिद्धांत की मांग की जा रही है. इसका मतलब है कि केवल खरीद की रसीद न देखकर यह देखा जाए कि जानवर किस व्यक्ति के साथ ज्यादा खुश, सुरक्षित और स्वस्थ रहेगा. यह जानवरों को ‘संपत्ति’ के बजाय ‘संवेदनशील प्राणी’ मानने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
5. प्रश्न: दिल्ली हाई कोर्ट में इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली स्थिति क्या है और कब सुनवाई होगी?
उत्तर: दिल्ली हाई कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की याचिका पर संज्ञान लेते हुए उनके पूर्व साथी जय अनंत देहाद्रई को औपचारिक नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है. निचली अदालत द्वारा कस्टडी की अर्जी खारिज होने के बाद अब हाई कोर्ट इस पर गहन कानूनी विचार करेगा. कोर्ट ने मामले की गंभीरता और हेनरी की उम्र को देखते हुए अगली सुनवाई की तारीख 29 अप्रैल तय की है, जिसमें दोनों पक्षों के स्वामित्व और देखभाल के दावों पर बहस होगी.


