50%, 25%, 18%, 10%, या 3%? आज की तारीख में भारतीय प्रोडक्ट पर कितना टैरिफ, ट्रंप के खिलाफ फैसले का क्या होगा असर? – What tariff applies to Indian goods today breaking down the American supreme court post ruling reality Donald trump

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America Supreme Court Traiff Ruling: अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों को लेकर टैरिफ व्यवस्था में लगातार बदलाव से भारतीय निर्यातकों के सामने अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है. हाल ही में अमेरिकी टैरिफ दरों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिससे भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद भारतीय प्रोडक्‍ट्स पर प्रभावी टैरिफ घटकर ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) स्तर यानी लगभग 3 प्रतिशत तक आ गया है. अगस्‍त में टैरिफ 50 फीसद तक पहुंच गया था. हालांकि, राहत अस्थायी हो सकती है, क्योंकि राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने 10 प्रतिशत का नया ग्‍लोबल टैरिफ लागू करने की घोषणा की है, जो जल्द प्रभावी हो सकता है.

भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद की शुरुआत अप्रैल में हुई थी, जब अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. बाद में इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया. इसके बाद अगस्त में अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर कुल 50 प्रतिशत तक टैरिफ लागू कर दिया था. इस 50 प्रतिशत टैरिफ में 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ और 25 प्रतिशत अतिरिक्‍त शुल्क शामिल था, जो भारत द्वारा रूसी तेल आयात से जुड़ा था. हालांकि, 6 फरवरी 2026 को जारी एक एग्‍जीक्‍यूटिव ऑर्डर के तहत रूस से तेल आयात से संबंधित अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क हटा दिया गया, जिससे प्रभावी टैरिफ घटकर 25 प्रतिशत रह गया. अमेरिकी सरकार के अनुसार, भारत ने रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात रोकने, अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदने और अगले 10 वर्षों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के ढांचे पर सहमति जताई थी. इसी आधार पर अतिरिक्त शुल्क समाप्त किया गया था.

प्रस्तावित राहत पूरी तरह लागू नहीं

इस महीने की शुरुआत में दोनों देशों के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत टैरिफ को 18 प्रतिशत तक घटाने की उम्मीद जताई गई थी. यह कटौती नए कार्यकारी आदेश और व्यापार समझौते के पहले चरण के लागू होने पर निर्भर थी, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह लागू नहीं हो सकी. इसी बीच अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन प्रावधानों के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को निरस्त कर दिया. इस फैसले से भारतीय निर्यात पर शुल्क सीधे MFN स्तर पर लौट आया. टैरिफ वृद्धि से पहले भारत के निर्यात पर औसत शुल्क लगभग 3 प्रतिशत था.

ट्रंप टैरिफ क्या है?
ट्रंप टैरिफ वे आयात शुल्क (Import Duties) हैं जिन्हें अमेरिका ने विदेशों से आने वाले सामान पर लगाया. इनका मकसद विदेशी उत्पादों को महंगा बनाकर अमेरिकी कंपनियों और उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में फायदा देना है. यह नीति ‘America First’ आर्थिक रणनीति का हिस्सा है.

डोनाल्‍ड ट्रंप ने टैरिफ क्यों लगाए?
टैरिफ का मुख्य उद्देश्य अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करना, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना, विदेशी देशों खासकर चीन के साथ व्यापार संतुलन सुधारना और अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा करना बताया गया. ट्रंप सरकार का दावा था कि कई देश अनुचित व्यापारिक लाभ ले रहे थे.

किन उत्पादों पर टैरिफ लगाए गए?
ट्रंप प्रशासन ने कई प्रमुख वस्तुओं पर शुल्क लगाया, जिनमें स्टील और एल्यूमिनियम, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी, सोलर पैनल और वॉशिंग मशीन और चीन से आयातित अरबों डॉलर के सामान शामिल हैं. इससे वैश्विक सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हुआ.

दुनिया की प्रतिक्रिया क्या रही?
ट्रंप के टैरिफ के जवाब में कई देशों ने भी अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी शुल्क (Retaliatory Tariffs) लगाए. चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शुल्क लगाया. यूरोपीय देशों ने भी कुछ अमेरिकी वस्तुओं को निशाना बनाया. इससे वैश्विक व्यापार तनाव बढ़ा और “ट्रेड वॉर” की स्थिति बनी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अस्थिरता देखी गई.

ट्रंप टैरिफ का असर क्या पड़ा?
कुछ अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण मिला तो कई आयातित वस्तुएं महंगी हो गईं. वैश्विक व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ने के सथ ही उपभोक्ताओं और कंपनियों की लागत में वृद्धि हुई.

नया ग्‍लोबल टैरिफ और संभावित असर

हालांकि, यह राहत ज्यादा समय तक टिकने की संभावना नहीं है. राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लागू करने की घोषणा की है. यह टैरिफ अधिकतम 150 दिनों तक प्रभावी रह सकता है, जब तक कि अमेरिकी कांग्रेस इसे आगे बढ़ाने का निर्णय न ले. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि धारा 301 के तहत जांच जारी है, जिसके आधार पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जा सकते हैं. फिलहाल चीन, कनाडा और मैक्सिको जैसे देश पहले से ही धारा 301 के तहत टैरिफ का सामना कर रहे हैं, हालांकि उन्हें व्यापार के कई क्षेत्रों में छूट भी मिली हुई है.

भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौतियां

वर्तमान स्थिति में अधिकांश भारतीय निर्यात पर लगभग 3 प्रतिशत का MFN शुल्क लागू है, जिस पर जल्द 10 प्रतिशत का अस्थायी वैश्विक टैरिफ भी जुड़ सकता है. हालांकि, मोबाइल फोन और फार्मा जैसे क्षेत्रों को टैरिफ छूट मिलने की संभावना है, क्योंकि इन पर पहले से जीरो टैरिफ लागू है और नई व्यवस्था में भी इसे बरकरार रखा जा सकता है. इसके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अलग प्रावधानों के तहत स्टील और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों पर धारा 232 के तहत विशेष टैरिफ जारी रहेंगे.

असहज स्थिति

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की बदलती टैरिफ नीति से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में अनिश्चितता बढ़ सकती है. बार-बार नीति परिवर्तन से भारतीय निर्यातकों को रणनीति बनाने में कठिनाई हो रही है. फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और स्थिर टैरिफ ढांचा तैयार करने की दिशा में आगे की वार्ताओं पर सबकी नजर बनी हुई है.

(इनपुट: मनीकंट्रोल)



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