अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका दिया. कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत डोनाल्ड ट्रंप के लगाए ग्लोबल टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया. 6-3 के बहुमत से आए फैसले में कोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के इतने बड़े और व्यापक टैरिफ नहीं लगा सकते, क्योंकि संविधान के तहत टैरिफ लगाने की शक्ति कांग्रेस के पास है.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने ट्रंप की उस टैरिफ नीति को सीधी चुनौती दी है, जिसके तहत उन्होंने आपातकालीन अधिकारों का हवाला देकर लगभग सभी देशों पर भारी शुल्क लगा दिए थे. इससे अमेरिकी राजनीति और ग्लोबल ट्रेड के मोर्चे पर डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है, जबकि भारत के लिए यह फैसला एक अहम मौके के तौर पर देखा जा रहा है.
ट्रंप ने क्या कहा?
भारत को कैसे मिला मौका?
किन-किन सेक्टर्स को मिलेगा लाभ?
अगर ऐसा होता है तो भारतीय निर्यातकों के लिए यह बड़ी राहत होगी. इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल्स, केमिकल्स और कुछ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स को अल्पकाल में इसका सीधा फायदा मिल सकता है. अमेरिकी बाजार में इन उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और लागत का दबाव कम होगा. हालांकि पूरी तस्वीर अभी भी पूरी तरह सकारात्मक नहीं है. करीब 8 से 8.3 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात अब भी अमेरिकी टैरिफ के दायरे में बने रह सकते हैं.
खासतौर पर स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो पार्ट्स पर राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लगाए गए टैरिफ अभी भी जारी हैं. इसका मतलब है कि ऑटो सेक्टर और मेटल एक्सपोर्टर्स पर दबाव फिलहाल कम नहीं होगा. इसके अलावा, पहले जो ऊंचे टैरिफ भारतीय कंपनियों ने चुकाए हैं, उनका रिफंड मिलेगा या नहीं, इस पर अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है. अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता बनी रहने के कारण भारतीय निर्यातक लंबी अवधि की योजना बनाने में भी सावधानी बरत रहे हैं.
डोनाल्ड ट्रंप, सुप्रीम कोर्ट और भारत पर टैरिफ के असर को समझिए…
सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के किस फैसले को अवैध ठहराया?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के लगाए टैरिफ को अवैध करार दिया. कोर्ट ने कहा कि बिना कांग्रेस की मंजूरी इतने बड़े टैरिफ नहीं लगाए जा सकते.
कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा?
अदालत के मुताबिक अमेरिकी संविधान में टैरिफ लगाने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है. राष्ट्रपति अपने आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक और व्यापक स्तर पर शुल्क नहीं लगा सकते.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत को क्या फायदा हो सकता है?
इस फैसले से भारत के कई उत्पादों पर लगाया गया 18% तक का अतिरिक्त टैरिफ हट सकता है और वे फिर से सामान्य MFN ड्यूटी (करीब 3–4%) पर आ सकते हैं.
किन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद है?
इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल्स, केमिकल्स और कुछ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स को थोड़े वक्त के लिए सीधा फायदा मिल सकता है.
क्या सभी भारतीय एक्सपोर्ट्स को राहत मिलेगी?
नहीं. करीब 8 से 8.3 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात अब भी अमेरिकी टैरिफ के दायरे में रह सकते हैं.
कौन-से सेक्टर अभी भी दबाव में रहेंगे?
स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो पार्ट्स पर लगाए गए टैरिफ अभी भी जारी हैं, जिससे मेटल और ऑटो सेक्टर पर दबाव बना रहेगा.
पहले दिए गए ज्यादा टैरिफ का रिफंड मिलेगा?
इस पर अभी कोई स्पष्टता नहीं है. यह सवाल अभी खुला हुआ है.
भारत को मिला सौदेबाज़ी का नया हथियार
फिर भी इस पूरे घटनाक्रम से भारत के हाथ में रणनीतिक तौर पर कुछ अतिरिक्त स्पेस जरूर आया है. भविष्य की व्यापार वार्ताओं में भारत अब कृषि, डेटा पॉलिसी और तेल आयात जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ज्यादा सख्त रुख अपना सकता है. अगर 10 प्रतिशत का ग्लोबल टैरिफ सभी देशों पर समान रूप से लागू होता है, तो भारत की सापेक्ष प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रह सकती है. हालांकि, अगर आगे चलकर फिर से सेक्टर-विशिष्ट टैरिफ लगाए गए, तो जोखिम दोबारा बढ़ सकता है.
कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने जहां डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ रणनीति को बड़ा झटका दिया है, वहीं भारत के लिए यह एक ऐसा अवसर बनकर उभरा है, जिससे अमेरिकी बाजार में 18 प्रतिशत से घटकर करीब 4 प्रतिशत तक टैरिफ आने की उम्मीद की जा रही है. यही वजह है कि इस फैसले को भारत के लिए संभावित आर्थिक राहत और रणनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है.


