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21 फरवरी 2026 को जन्मे बच्चों पर रेवती और अश्विनी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा. शाम 7:06 बजे तक चंद्रमा मीन राशि के रेवती नक्षत्र में रहेगा, फिर अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा. रेवती में जन्मे बच्चे संवेदनशील व दयालु होते हैं, जबकि अश्विनी नक्षत्र वाले तेज, साहसी और नेतृत्व क्षमता से युक्त माने जाते हैं. मीन राशि के स्वामी गुरु हैं, जिससे रचनात्मकता और आध्यात्मिक रुचि बढ़ती है. नामकरण हेतु दे, दो, चा, ची अक्षर शुभ रहेंगे.
अयोध्या: व्यक्ति के जीवन पर ज्योतिष शास्त्र का विशेष प्रभाव होता है. इसी के आधार पर व्यक्ति की कुंडली और भविष्य का आकलन किया जाता है. प्रतिदिन सभी नवग्रह और सभी 12 राशियों में परिवर्तन होता रहता है, जिसका प्रभाव शुभ और अशुभ रहता है. ऐसी स्थिति में दैनिक ग्रह गोचर के अनुसार 21 फरवरी को ग्रह नक्षत्र की क्या स्थिति रहेगी. इस दिन जन्म लेने वाले बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ेगा. इन तमाम सवालों का जवाब आज हम आपको इस रिपोर्ट में विस्तार से बताएंगे, तो चलिए जानते हैं.
21 फरवरी 2026 को जन्मे बच्चों पर रेवती और अश्विनी नक्षत्र का प्रभाव
अयोध्या के आचार्य सीताराम दास ने बताया कि 21 फरवरी 2026 को जन्म लेने वाले बच्चों की ग्रह-नक्षत्र स्थिति के अनुसार रेवती और अश्विनी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा. शाम 7:06 बजे तक चंद्रमा मीन राशि में रेवती नक्षत्र में रहेगा. इसके बाद अश्विनी नक्षत्र का आरंभ होगा. शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि दोपहर 1:02 बजे तक रहेगी, उसके बाद पंचमी तिथि लग जाएगी. शुभ योग दोपहर 3:52 बजे तक रहेगा और विष्टि करण दोपहर 12:59 बजे तक प्रभावी रहेगा.
रेवती और अश्विनी नक्षत्र में जन्मे बच्चों के गुण और स्वभाव
वैदिक ज्योतिष में नक्षत्रों का विशेष महत्व माना जाता है. रेवती नक्षत्र को कोमल, संवेदनशील और आध्यात्मिक प्रवृत्ति वाला माना जाता है. इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चे कल्पनाशील, दयालु और दूसरों की मदद करने वाले होते हैं. वहीं अश्विनी नक्षत्र के स्वामी अश्विनी कुमार माने जाते हैं, जो गति, ऊर्जा और उपचार के प्रतीक हैं. इस नक्षत्र में जन्मे बच्चे तेज बुद्धि, साहसी और नेतृत्व क्षमता वाले होते हैं.
मीन राशि के बच्चों का स्वभाव और नामकरण के शुभ अक्षर
मीन राशि के स्वामी गुरु (बृहस्पति) होते हैं, जो ज्ञान, धर्म और सद्गुणों के कारक माने जाते हैं. मीन राशि में जन्मे बच्चे भावनात्मक, सहानुभूतिपूर्ण और रचनात्मक स्वभाव के होते हैं. वे अक्सर कला, साहित्य, संगीत या आध्यात्मिक क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं. उनका अंतर्ज्ञान मजबूत होता है और वे रिश्तों को दिल से निभाने वाले होते हैं. नामकरण के लिए रेवती नक्षत्र के अक्षर दे, दो, चा, ची शुभ माने गए हैं.जन्म समय के अनुसार सही नक्षत्र की पुष्टि करना आवश्यक होता है, क्योंकि शाम 7:06 बजे के बाद जन्म होने पर नाम का अक्षर बदल जाएगा.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें


