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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के बढ़ला कैथवाड़ी गांव में इन दिनों एक अनोखी प्रेम कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है. यहां प्राचीन मां झंडेवाली देवी मंदिर परिसर में कुत्ता चेतन और जंगली बिल्ली सुमो की दोस्ती हर किसी को हैरान कर रही है. दो अलग स्वभाव और प्रकृति के जानवरों के बीच ऐसा गहरा लगाव देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं. दोनों का आपसी प्रेम और एक-दूसरे के लिए इंतजार करने का अंदाज इंसानों को भी भाईचारे और अपनापन का संदेश दे रहा है.
जीवन में प्रेम किसी को भी हो सकता है, क्योंकि प्रेम की कोई भाषा नहीं होती. सिर्फ एहसास और संकेत होते हैं, जिनसे लोग अपने दिल की बात कह देते हैं. कुछ ऐसा ही अनोखा और भावुक नजारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, मेरठ से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित बढ़ला कैथवाड़ी गांव में देखने को मिलता है, जहां प्रेम की एक अलग ही मिसाल लोगों के दिलों को छू जाती है.
जहां चेतन और सुमो का आपसी प्रेम इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है. जी हां, सुनने में भले ही हैरानी हो, लेकिन ये दोनों एक कुत्ता और बिल्ली हैं. इनका आपसी लगाव और व्यवहार हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है. यदि एक पल के लिए भी दोनों एक-दूसरे से दूर हो जाएं, तो बेचैन होकर एक-दूसरे को खोजने लगते हैं. गांव के लोग भी इनकी दोस्ती और प्रेम को देखकर हैरान रह जाते हैं.
मंदिर की महंत कर्दममुनि महाराज बताती हैं कि दोनों अक्सर मंदिर परिसर में साथ-साथ खेलते और घूमते नजर आते हैं. उनके अनुसार, सुमो एक जंगली बिल्ली है, जो रोज अपने भोजन की तलाश में जंगल की ओर चली जाती है. लेकिन यदि वह अपने तय समय से थोड़ी भी देर से लौटे, तो चेतन बेचैन होकर इधर-उधर घूमने लगता है. वह मंदिर परिसर के बाहर तक जाकर उसका इंतजार करता है, मानो उसे उसकी वापसी की आहट का इंतजार हो.
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ऐसे में सुमो को ढूंढते हुए चेतन मंदिर परिसर के इधर-उधर चक्कर लगाता हुआ नजर आता है. महंत ने बताया कि जब तक सुमो वापस मंदिर में नहीं लौटती, तब तक चेतन काफी बेचैन रहता है. जैसे ही सुमो मंदिर परिसर में आती है, चेतन तुरंत उसके पास पहुंच जाता है. दोनों अपनी-अपनी भाषा में जैसे एक-दूसरे से बात करते दिखते हैं, मानो वह उससे देर से आने का कारण पूछ रहा हो. उनका यह अनोखा लगाव देखने वालों को भावुक कर देता है.
महंत ने बताया कि जिस परिसर में सुमो और चेतन खेलते हुए नजर आते हैं, वह एक प्राचीन मां झंडेवाली देवी मंदिर है. यह मंदिर मां दुर्गा को समर्पित है और मान्यता है कि इसकी स्थापना अर्जुन के वंशजों द्वारा की गई थी. इसी कारण इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है. मंदिर की एक खास मान्यता यह भी है कि यहां आने वाले लोगों के मन का वैर-भाव स्वतः समाप्त हो जाता है. कहा जाता है कि चाहे आपसी दुश्मनी कितनी भी गहरी क्यों न हो, मां के दरबार में पहुंचते ही मन में शांति और प्रेम का भाव जागृत हो जाता है.
लेकिन मंदिर परिसर में मां भगवती के आशीर्वाद से माहौल बिल्कुल अलग दिखाई देता है. यहां आने वाले लोग आपसी मतभेद भुलाकर भाईचारे और प्रेम की भाषा में बातचीत करते नजर आते हैं. महंत का कहना है कि यह सिर्फ सुमो और चेतन तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर परिसर में अन्य जानवर भी आपस में शांति और प्रेम के साथ रहते दिखाई देते हैं. सुमो और चेतन तो बस इसका एक जीवंत उदाहरण हैं, जो हर किसी को यह संदेश देते हैं कि प्रेम ही सबसे बड़ी शक्ति है.
उन्होंने बताया कि यहां घूमने आने वाले लोग जब चेतन और सुमो को साथ देखते हैं तो हैरान रह जाते हैं. कई लोग उनकी फोटो और वीडियो बनाते हुए भी दिखाई देते हैं. खास बात यह है कि दोनों कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते और बेहद शांत स्वभाव के हैं. मंदिर परिसर में अन्य जानवर भी खुलेआम घूमते नजर आते हैं और सभी आपसी प्रेम व सामंजस्य के साथ रहते हैं. महंत का कहना है कि इंसान को भी इनसे सीख लेनी चाहिए कि आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम और भाईचारे के साथ आगे कैसे बढ़ा जा सकता है.
बताते चलें कि अगर आप भी इस अनोखी कहानी को करीब से देखना चाहते हैं, तो गढ़ रोड के रास्ते बढ़ला कैथवाड़ी गांव पहुंच सकते हैं. वहीं स्थित है प्राचीन मां झंडेवाली देवी मंदिर, जहां चेतन और सुमो अक्सर साथ नजर आते हैं. जब आप इन दोनों को एक साथ खेलते और एक-दूसरे का इंतजार करते देखेंगे, तो खुद सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि दुश्मनी छोड़कर प्रेम और अपनापन के साथ भी जीवन जिया जा सकता है.


