Shri Tulja Bhavani Temple Maharashtra 12th century | यहां 21 दिन स्वयं चलती हैं माता, यहीं मां ने शिवाजी महाराज को मुगलों से लड़ने के लिए दी थी चमत्कारी तलवार

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छत्रपति शिवाजी महाराज को यहीं मिला था मुगलों के खिलाफ जीत का आशीर्वाद

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Tulja Bhavani Temple: आपके मां भवानी के कई मंदिरों के दर्शन किए होंगे लेकिन महाराष्ट्र में मां तुलजा भवानी मंदिर की बात ही अलग है. तुलजा भवानी महाराष्ट्र के प्रमुख साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक है और भारत के प्रमुख 51 शक्तिपीठ में से भी एक मानी जाती है. मान्यता है कि छत्रपती शिवाजी महाराज को खुद देवी मां ने तलवार प्रदान की थी. आइए जानते हैं माता के इस मंदिर के बारे में खास बातें…

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Shri Tulja Bhavani Temple: देशभर में मौजूद शक्तिपीठ और सिद्धपीठ मंदिरों का इतिहास हमारे मूल ग्रंथ और कहानियों से जुड़ा है. महाराष्ट्र में मां भगवती का ऐसा मंदिर है, जहां के चमत्कार तो भक्तों को मंदिर तक खींच ही लाते हैं, लेकिन इस मंदिर ने भारत का इतिहास लिखने में भी अपनी अहम भूमिका निभाई है. हम बात कर रहे हैं मां तुलजा भवानी मंदिर की. बताया जाता है कि मां तुलजा भवानी छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदेवी के रूप में स्थापित हैं, साथ ही महाराष्ट्र व अन्य राज्यों के कई निवासियों की कुलदेवी के रूप में भी प्रचलित हैं. बताया जाता है कि मंदिर की स्थापना 12वीं सदी में कदंब वंश के मराठा महामंडलेश्वर मरादेव ने कराया था.

बेहद चमत्कारी है माता का यह मंदिर
महाराष्ट्र के धाराशिव (पूर्व में उस्मानाबाद था) जिले के तुलजापुर में मां भवानी का शक्तिशाली शक्तिपीठ मंदिर तुलजा भवानी मौजूद है. इस मंदिर में मां की पूजा एक अमूर्त प्रतिमा के रूप में नहीं की जाती है, बल्कि उन्हें सजीव मानकर पूजा जाता है. इसके पीछे की वजह है कि मां का स्वयं चलना. माना जाता है कि साल में 21 दिन मां खुद मंदिर के गर्भगृह से निकलकर अपने कक्ष में सोने के लिए जाती हैं. मंदिर में मौजूद मां की प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है, जिनका पूजन सजीव मानकर किया जाता है. ये देश की पहली प्रतिमा है, जो शालिग्राम पत्थर से बनी है.

शिवाजी के माता से मिली थी चमत्कारी तलवार
मां तुलजा भवानी की गिनती देश के सबसे शक्तिशाली मंदिरों में की जाती है क्योंकि यहीं छत्रपति शिवाजी महाराज को मुगल सेना से लड़ने के लिए चमत्कारी तलवार मिली थी. दरअसल, मां तुलजा भवानी छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदेवी हैं और हमेशा युद्ध पर जाने से पहले शिवाजी महाराज तुलजा देवी का आशीर्वाद जरूर लेते थे.

स्वयंभू मानी जाती है माता की मूर्ति
कहा जाता है कि जब वह अकेले स्वराज के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब उन्होंने मां से जीत की प्रार्थना की थी. मां तुलजा ने प्रकट होकर उन्हें भवानी तलवार भेंट की थी. यह मंदिर उसी जीवंत आस्था का प्रमाण है, जिसने इतिहास भी बदला है. अभी यह तलवार लंदन के संग्रहालय में रखी हुई है. शालीग्राम पत्थर से निर्मित यह मूर्ति वस्तुतः स्वयंभू मूर्ति मानी जाती है. इस मूर्ति के आठ हाथ हैं, जिनमें से एक हाथ से उन्होंने दैत्य के बाल पकड़े हैं और दूसरे हाथों से वे दैत्य पर त्रिशूल से वार कर रही हैं.

शत्रुओं को परास्त करने का देती हैं वरदान
मां तुलजा भवानी मंदिर महाराष्ट्र के लोगों के लिए आस्था का प्रतीक है और हर साल नवरात्रि के समय मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. मां तुलजा भवानी शत्रुओं को परास्त करने का वरदान देती हैं. मंदिर के इतिहास की बात करें तो मंदिर को हेमाड़पंती स्थापत्य शैली से बनाया गया है और उसकी स्थापना 12वीं सदी में कदंब वंश के मराठा महामंडलेश्वर मरादेव ने कराया था.

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Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें





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