जावेद अख्तर के वो 6 शब्द, सुनकर छलनी हुआ था सलीम खान का दिल, सिर्फ अमिताभ बच्चन बचा सकते थे रिश्ता

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बॉलीवुड में जोड़ियों खूब देखी गई फिर वो लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल हो या कल्याण जी-आनंद जी, शंकर-जयकिशन या आनंद-मिलिंद. इन जोड़ियों ने जब तक साथ काम किया सुपरहिट रहे, लेकिन जैसे ही अलग हुए सब कुछ बिखर गया. एक ऐसी ही एक जोड़ी सलीम खान और जावेद अख्तर की रही. लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जब उन दोनों की साझेदारी खत्म हो गई. सालों तक लोगों के मन में सवाल रहा कि आखिर ऐसा क्यों?

नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के इतिहास में सबसे सफल लेखक जोड़ी सलीम-जावेद का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है. सलिम-जावेद की मुलाकात ‘सरहदी लुटेरा’ की शूटिंग के दौरान हुई थी. 1971 में दोनों ने साथ काम शुरू किया. 12 साल में उन्होंने हिंदी सिनेमा की संरचना बदल दी. डायलॉग्स, कहानी और किरदारों में नयापन लाए. ‘शोले’, ‘जंजीर’, ‘दीवार’ और ‘डॉन’ जैसी अमर फिल्में लिखने वाली इस जोड़ी ने एक पूरी पीढ़ी को अपनी कहानियों से झकझोर दिया. लेकिन 70 के दशक में बनी ये जोड़ी साल 1982 में जब यह जोड़ी टूटी तो पूरा फिल्म इंडस्ट्री सन्न रह गया. चार दशक बाद भी लोगों के जेहन में यह सवाल है कि आखिर क्यों यह ऐतिहासिक पार्टनरशिप खत्म हुई? फाइल फोटो. 

सलीम खान ने इस मुद्दे पर एक इंटरव्यू में अपनी बात की थी. स्क्रीन को दिए एक पुराने इंटरव्यू में सलीम खान ने अपनी और जावेद अख्तर की जोड़ी के बारे में बात की थी. उन्होंने बताया की एक दिन अचानक जावेद अख्तर ने उनसे अलग होने की बात सामने रखी.  फाइल फोटो. 

सलीम ने कहा कि जब जावेद ने उनसे अलग होने को कहा तो उन्हें भी कुछ समझ नहीं आया. उन्होंने बताया, ‘हम सुबह से रात तक काम करते थे. दिन भर मेहनत करते थे तो अचानक एक दिन रात को जावेद ने कहा, ‘मैं तुमसे अलग होना चाहता हूं.’ फाइल फोटो.

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सलीम ने आगे कहा, ‘मुझे लगा कि मैं कुछ गलत सुन लिया है. मैंने दोबारा पूछा तो उन्होंने कहा कि आपने सही सुना है. मैं आपसे अलग होना चाहता हूं.’ सलीम ने फिर उन्हें जवाब दिया और कहा, ‘अगर आपने यह फैसला ले लिया है तो जरूर सोच विचार कर ही लिया होगा.’ जावेद ने जवाब दिया, ‘वह लंबे समय से इसके बारे में सोच रहे थे.’ तब सलीम साहब ने कहा कि आपने जो सोचा अच्छे के लिए ही किया होगा’. फाइल फोटो. 

दिग्गज राइटर ने आगे बताया कि इतना सुनकर मैं वहां से तुरंत उठकर घर जाने लगा. जावेद मुझे छोड़ने बाहर तक आ रहे थे, लेकिन मैं उनका रास्ता रोका और कहा मैं अपना ख्याल रख सकता हूं. सलीम ने इस किस्से को विस्तार से बताते हुए कहा कि हम दोनों बड़ी आसानी से अलग हो गए. हमारे बीच कभी कोई झगड़ा नहीं हुआ लेकिन हमारी यह जोड़ी टूट गई और किसी को पता नहीं चला कि आखिर ऐसा हुआ क्यों. जब उनसे पूछा कि क्या आपने कभी जावेद से पूछा नहीं कि ऐसा क्यों हुआ सलीम ने बड़ी आसानी से जवाब दिया कि जब अलग हो ही गए तो पूछने का क्या मतलब था बाद में हमने अपने-अपने कई प्रोजेक्ट पर काम किया और सफल रहे. फाइल फोटो. 

एक दूसरे इंटरव्यू में सलीम खान ने याद किया कि जावेद अख्तर ने जब उन्हें बताया कि वे अलग फिल्में बनाना चाहते हैं, तो उन्होंने बिना किसी नाटकीय झगड़े के कहा, ‘ठीक है, कोई दिक्कत नहीं. किसी को जबरदस्ती नहीं रोका जा सकता.’ उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे आज भी नहीं मालूम क्यों अलग हुए. हो गया तो हो गया.’ सलीम साहब ने जोर दिया कि अलग होने के बाद भी कोई गलतफहमी या दुश्मनी नहीं हुई. दोनों ने कभी एक-दूसरे की बुराई नहीं की. दोस्ती वैसी ही रही. मैं रोज उनके घर के सामने से गुजरता था, हाथ हिलाता था, वे भी हिलाते थे. फाइल फोटो. 

इसी इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि अमिताभ ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जो इस ब्रेकअप को रोक सकते थे. अगर वे जावेद से बात करते तो कहते, ‘मत छोड़ो, अच्छी खासी जोड़ी है, काम अच्छा चल रहा है, क्यों छोड़ते हो?’ सलीम खान ने कहा था कि अगर वे अमिताभ की जगह होते तो यही सलाह देते. उनका मानना है कि अमिताभ दोनों से करीब थे और उनका प्रभाव काफी था. फाइल फोटो. 

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