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Success Story: IT में इंजीनियरिंग के बाद भाविनी झा ने मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी की. हैदराबाद में नौकरी छोड़ी और जबलपुर आकर कोचिंग खोली. कोचिंग कोरोना में बंद हो गई. फिर मछली पालन शुरू किया तो जमीन ने धोखा दे दिया. हार नहीं मानी और अब तीन बच्चों को संभालने के साथ बिजनेस भी संभाल रही हैं.
Jabalpur News. कहते हैं हौसला हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं. जबलपुर की भाविनी झा ने इसे सच कर दिखाया है. इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी (IT) में इंजीनियरिंग करने के बाद मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाली भाविनी ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर मछली पालन जैसे क्षेत्र में कदम रखा और आज हर साल 20 से 30 टन मछली बेचकर लाखों का कारोबार कर रही हैं.
दरअसल, भाविनी ने साल 2007 में जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से आईटी में डिग्री हासिल की. इसके बाद हैदराबाद में एक मल्टीनेशनल कंपनी में दो साल तक काम करती रहीं. इसी दौरान उनकी शादी कौस्तुभ से हुई. लेकिन, कॉर्पोरेट लाइफ उन्हें रास नहीं आई. दंपति ने बड़ा फैसला लिया और नौकरी छोड़कर जबलपुर लौट आए. यहां दोनों ने मिलकर एक कोचिंग सेंटर शुरू किया.
कोरोना काल में बंद हो गया सेंटर
कोरोना काल में कोचिंग सेंटर बंद करना पड़ा. इसी दौरान भाविनी ने तय किया कि अब वे फूड चेन से जुड़ा अपना खुद का व्यवसाय करेंगी. उन्होंने मशरूम, गोट फार्मिंग, पोल्ट्री और फिशरीज पर विचार किया. ट्रेनिंग भी ली, लेकिन सबसे कठिन माने जाने वाले विकल्प मछली पालन को चुना. परिवार में पहले कभी किसी ने यह काम नहीं किया था. उन्होंने जबलपुर से करीब 15 km दूर हिनोतिया गांव में 4.5 एकड़ जमीन खरीदी और वहां तालाब खुदवाया.
मछली पालन के दौरान जमीन ने दिया धोखा!
लेकिन, मुरम और रेतीली जमीन के कारण पानी टिक नहीं पाया. सारी जमा पूंजी दांव पर लगी थी. उन्होंने हार नहीं मानी. भुवनेश्वर स्थित केंद्रीय मीठा जल जलीय संस्थान और मुंबई के केंद्रीय मत्स्य संस्थान से प्रशिक्षण लिया. मत्स्य विभाग से भी मार्गदर्शन और अनुदान मिला. इसके बाद उन्होंने अत्याधुनिक तकनीक अपनाई. तालाब में एचडीपीई लाइनर शीट बिछाई.
6 तालाबों में तकरीबन 30 टन मछलियां
भाविनी ने पेंगासस मछली का पालन शुरू किया और छत्तीसगढ़ से बीज मंगवाया. रेडीमेड फ्लोटिंग फीड का इस्तेमाल किया, ताकि पानी में अमोनिया न बने और मछलियों की ग्रोथ बेहतर हो. लिहाजा भाविनी के पास कुल 6 तालाब हैं और वे सालाना 20 से 30 टन मछली बेच रही हैं. मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से व्यापारी थोक में खरीदने आते हैं. उन्हें करीब ₹120 प्रति किलो तक कीमत मिल जाती है.
मल्टीनेशनल कंपनी छोड़ना था सबसे बड़ा रिस्क
वे आगे और तालाब बनाने की तैयारी में हैं. तीन बच्चों की मां भविनी खेती और परिवार दोनों संभाल रही हैं. उनके इस फैसले से करीब एक दर्जन परिवारों को रोजगार मिला है. भाविनी कहती हैं, “मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ना मेरे जीवन का सबसे बड़ा रिस्क था, लेकिन आज लगता है कि वही मेरा सबसे सही फैसला था.”
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें


