बीजेपी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि उन्हें साल 2010 में अमेरिका में हुए एक कार्यक्रम में दोषी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की तरफ से फंड किए गए पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. पार्टी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जवाब मांगा है. वहीं बीजेपी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कपिल सिब्बल ने इसे पूरी तरह ‘बकवास’ बताया. कांग्रेस ने भी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सिब्बल का एपस्टीन से कोई संबंध नहीं था और न ही वह उनके मेहमान थे.
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि 2010 में जब यह कार्यक्रम हुआ, तब कपिल सिब्बल मानव संसाधन विकास मंत्री थे. उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग के समर्थन के लिए सम्मानित किया गया था और इस पुरस्कार का जेफ्री एपस्टीन से कोई लेना-देना नहीं था.
बीजेपी का दावा और दस्तावेज का हवाला
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 2010 में न्यूयॉर्क में हुए इंटरनेशनल अवॉर्ड्स गाला में कपिल सिब्बल का नाम पुरस्कार पाने वालों की सूची में था. उन्होंने यह भी दावा किया कि उसी दायरे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा भी जुड़े हुए थे.
भंडारी ने आरोप लगाया कि उस समय की कांग्रेस सरकार में बाद में कुछ नीतिगत बदलाव देखने को मिले और सवाल उठाया कि क्या यह महज संयोग था या इसके पीछे किसी बाहरी प्रभाव की भूमिका थी. उन्होंने राहुल गांधी से इस पर जवाब देने की मांग की.
बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि आखिर कपिल सिब्बल ने एपस्टीन से जुड़े संस्थान से पुरस्कार क्यों स्वीकार किया.
बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि आखिर कपिल सिब्बल ने एपस्टीन से जुड़े संस्थान से पुरस्कार क्यों स्वीकार किया. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में पूछा, ‘एपस्टीन के साथ कांग्रेस की यह कैसी ‘मोहब्बत की दुकान’ चल रही थी? कपिल सिब्बल ने एपस्टीन से फंडेड IIE से अवॉर्ड क्यों लिया?’
पूनावाला ने आगे कहा, ‘राहुल गांधी को संसद में बोलना बहुत पसंद है, है ना? क्या वह अब इस बारे में कुछ कहेंगे?’
कांग्रेस का बीजेपी पर पलटवार
इन आरोपों पर कांग्रेस ने तीखा जवाब दिया. पवन खेड़ा ने कहा कि बीजेपी नेता यह झूठा प्रचार कर रहे हैं कि कपिल सिब्बल का नाम एपस्टीन फाइल्स’ में है, जबकि ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि बीजेपी जिन दस्तावेजों के स्क्रीनशॉट दिखा रही है, वे न्यूयॉर्क में होने वाले बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों की एक सूची थी, जिन पर एपस्टीन नजर रखता था.
खेड़ा के मुताबिक, यह 59 पन्नों की सूची थी, जिसमें अलग-अलग कार्यक्रमों का जिक्र था. कपिल सिब्बल का नाम एक शैक्षणिक संस्था के कार्यक्रम के तहत सूचीबद्ध था, न कि एपस्टीन के किसी निजी आयोजन में.
कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी इस मुद्दे को उठाकर अपने ही नेताओं से जुड़े सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है.
एपस्टीन फाइल्स को लेकर बढ़ा विवाद
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस लगातार केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग कर रही है, क्योंकि उनका नाम अमेरिका में जारी हुई ‘एपस्टीन फाइल्स’ में सामने आया है. राहुल गांधी ने संसद और बाहर दोनों जगह यह दावा किया कि इन फाइल्स में पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी का भी जिक्र है.
वहीं, हरदीप सिंह पुरी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी जेफ्री एपस्टीन से मुलाकातें सीमित थीं और उनका किसी भी तरह से उसके अपराधों से कोई संबंध नहीं है.


