Success story east champaran abhaa sharma elissa sanitary pad startup

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Women Success Story: पूर्वी चंपारण के एक छोटे से गांव की आभा शर्मा ने MBA के बाद नौकरी ठुकराकर संघर्ष का रास्ता चुना. जातिवाद का दंश झेला, अपमान सहा, लेकिन हार नहीं मानी. आज उनका ब्रांड ‘Elissa’ पूरे भारत में धूम मचा रहा है. जानिए कैसे 60 हजार रुपये से शुरू हुआ यह सफर आज देश की लाखों महिलाओं के लिए मिसाल बन गया है. दीये की रोशनी में पढ़ाई से लेकर करोड़ों के टर्नओवर तक की कहानी खास है.

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आदित्य गौरव/पूर्वी चंपारण: संघर्ष जब संकल्प बन जाता है, तो सफलता की कहानी खुद-ब-खुद लिखी जाती है. बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के पहाड़पुर प्रखंड स्थित एक छोटे से गांव, बलुआ सरैया की रहने वाली आभा शर्मा ने इसे सच कर दिखाया है. अभावों के बीच पली-बढ़ी आभा आज न केवल एक सफल उद्यमी हैं. बल्कि देश की लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं. कभी इनका सफर ढिबरी की रोशनी से शुरू हुआ.

लालटेन की रोशनी और संघर्षों भरा बचपन
आभा का बचपन चुनौतियों से भरा था. पिछड़े इलाके में बिजली न होने के कारण उन्होंने दीये और ढिबरी की मद्धम रोशनी में अपनी पढ़ाई पूरी की. स्कूल जाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. जिस समाज में बेटियों की शिक्षा से ज्यादा उनकी शादी की फिक्र की जाती थी. वहां आभा ने आगे बढ़ने का सपना देखा. माता-पिता जल्द शादी कर देना चाहते थे, लेकिन बड़े भाई के अटूट समर्थन ने उन्हें एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल करने तक का हौसला दिया.

नौकरी ठुकराई और चुना समाज सेवा का रास्ता
एमबीए के बाद आभा के पास कॉर्पोरेट जगत में शानदार करियर के विकल्प थे. लेकिन उन्होंने एसी दफ्तरों की जगह गांव की पगडंडियों को चुना. उन्होंने देखा था कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक नहीं हैं. हर छोटे काम के लिए पुरुषों पर निर्भर हैं. यहीं से उन्होंने सैनिटरी पैड बनाने और महिलाओं को जागरूक करने का संकल्प लिया.

अपमान और जातिवाद के दंश को बनाया ताकत
आभा का यह सफर आसान नहीं था. जब उन्होंने पिछड़े गांवों में कैंप लगाना शुरू किया, तो उन्हें कड़े विरोध का सामना करना पड़ा. लोग उनकी सोच का मजाक उड़ाते, जातिवादी टिप्पणियां करते और उनके लगाए पोस्टर-बैनर तक फाड़ देते थे. लेकिन हार न मानने की उनकी जिद ने उन्हें टूटने नहीं दिया.

60 हजार से करोड़ों का टर्नओवर
महज 60000 रुपये की छोटी सी पूंजी से शुरू हुआ उनका सफर आज एक बड़े मुकाम पर पहुंच चुका है. उनका ब्रांड Elissa Sanitary Pad & Diaper अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है. बल्कि पूरे भारत में अपनी पहचान बना चुका है. आज उनकी कंपनी करोड़ों का टर्नओवर कर रही है. बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है.

सम्मान और भविष्य का लक्ष्य
उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें भारत एंटरप्रेन्योर अवार्ड, बिहार चेंज मेकर अवार्ड और गार्गी नारी शक्ति अवार्ड जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है. आर्थिक तंगी को पीछे छोड़कर आज वे एक सफल उद्योगपति के रूप में स्थापित हैं. आभा आज भी अपनी लिखी कविताएं पढ़ती हैं, जो उन्हें हर मुश्किल वक्त में संघर्ष करने की शक्ति देती हैं.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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