Budhaditya Yoga Effects in Astrology। बुधादित्य योग कब देता है सफलता और कब रहता है कमजोर

Date:


Budhaditya Yoga : कई लोग अपनी कुंडली में सूर्य और बुध की युति देखकर उत्साहित हो जाते हैं “मेरे पास बुधादित्य योग है!” लेकिन क्या हर सूर्य-बुध की युति वास्तव में राजयोग जैसा परिणाम देती है? सच यह है कि ज्योतिष में हर योग की अपनी शर्तें होती हैं. डिग्री, दृष्टि, भाव और ग्रहों की स्थिति सब मिलकर तय करते हैं कि यह योग आपको तेज बुद्धि और प्रतिष्ठा देगा या सिर्फ कागज़ों में दर्ज रह जाएगा. आज हम भोपाल निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह से सरल भाषा में समझेंगे कि बुधादित्य योग कब प्रभावी होता है और किन परिस्थितियों में इसका असर कमजोर पड़ जाता है.

बुधादित्य योग क्या है?
जब जन्म कुंडली में सूर्य और बुध एक ही भाव में स्थित होते हैं, तब बुधादित्य योग बनता है. ज्योतिष शास्त्र में इसे बुद्धि, नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक योग्यता का प्रतीक माना गया है. ऐसे जातक अक्सर स्पष्ट बोलने वाले, तर्कशील और आत्मविश्वासी होते हैं. लेकिन यहीं एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है क्या सिर्फ साथ बैठना ही काफी है? जवाब है, नहीं.

डिग्री का खेल: 1–5° और 27–29° क्यों अहम?
अपरिपक्व और अतिवृद्ध अवस्था
यदि सूर्य या बुध 1–5 डिग्री के बीच हों, तो उन्हें बाल अवस्था में माना जाता है. वहीं 27–29 डिग्री पर वे अतिवृद्ध या अस्थिर प्रभाव दे सकते हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

ऐसी स्थिति में बुधादित्य योग का संतुलन बिगड़ सकता है. उदाहरण के तौर पर, कई छात्रों की कुंडली में यह योग होने के बावजूद पढ़ाई में रुकावट देखी गई, क्योंकि बुध कमजोर डिग्री में था. निर्णय लेने में हिचकिचाहट, सोच में भ्रम ये संकेत अक्सर दिखाई देते हैं.

पाप ग्रहों की दृष्टि: योग पर पड़ता साया

1. राहु की दृष्टि
राहु की दृष्टि होने पर जातक अत्यधिक सोचने लगता है. बुद्धि तेज होती है, पर दिशा भटक सकती है. कई बार व्यक्ति चालाक तो बनता है, पर निर्णय व्यावहारिक नहीं होते.

2. शनि की दृष्टि
शनि सोच को धीमा कर देता है. परिणाम मिलते हैं, पर देर से. ऐसे लोगों को मेहनत अधिक करनी पड़ती है.

3. केतु की दृष्टि
केतु बुद्धि को तीखा बनाता है, पर स्थिरता कम कर देता है. पढ़ाई या करियर में अचानक ब्रेक देखने को मिल सकता है.

4. बुध का अस्त होना: छिपी कमजोरी
यदि बुध सूर्य के बहुत निकट (0–5 डिग्री) हो, तो वह अस्त माना जाता है. इस स्थिति में बुध की बौद्धिक शक्ति दब सकती है. बाहर से योग दिखेगा, पर अंदर से परिणाम कम मिलेंगे.

5. भाव की भूमिका: हर घर समान नहीं
यदि सूर्य-बुध 6, 8 या 12 भाव में हों, तो संघर्ष बढ़ सकता है. वहीं केंद्र (1, 4, 7, 10) या त्रिकोण (1, 5, 9) में स्थित होने पर यह योग अधिक प्रभावी माना जाता है.

जिन लोगों की कुंडली में यह योग दसवें भाव में मजबूत डिग्री पर होता है, वे प्रशासन, मीडिया या सरकारी क्षेत्र में अच्छा नाम कमाते देखे गए हैं.

कब देता है पूरा फल?
-सूर्य 8–20 डिग्री के बीच
-बुध 8–22 डिग्री के बीच
-कोई पाप ग्रह दृष्टि न हो
-बुध अस्त न हो
-केंद्र या त्रिकोण भाव में स्थिति

ऐसी अवस्था में व्यक्ति में तेज बुद्धि, आत्मविश्वास और संवाद क्षमता स्पष्ट दिखती है.

बुधादित्य योग तभी मजबूत फल देता है जब सूर्य-बुध उचित डिग्री, शुभ भाव और बिना पाप दृष्टि के हों. कमजोर डिग्री, अस्त बुध या राहु-शनि-केतु की दृष्टि योग के प्रभाव को कम कर सकती है.

क्या उपाय करें
1. ऐसी स्थिति में जातक को किसी अच्छे ज्योतिषी की सलाह पर 4 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए.
2. घर की पूर्व दिशा में लकड़ी का अशोक स्तंभ लगाएं.



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related