Success Story: हौसला हो तो गांव की पगडंडियों से भी कामयाबी का रास्ता निकल आता है. रामपुर रटॉली गांव की कलावती देवी आज किसी फैक्ट्री मालिक से कम नहीं हैं. कभी बेरोजगारी का दंश झेलने वाली कलावती ने ‘जीविका’ से महज ₹10,000 का लोन लेकर सिलाई मशीन खरीदी थी, लेकिन आज वे चूड़ी निर्माण, स्वेटर बुनाई और ‘क्ले आर्ट’ (मिट्टी की कला) का एक बड़ा साम्राज्य चला रही हैं. कलावती की कला का जादू अब छपरा से निकलकर पटना और सोनपुर तक फैल चुका है. इस साल सोनपुर और सरस मेले में उनके उत्पादों की 4 लाख रुपये की रिकॉर्ड बिक्री हुई. उनके बनाए गुलदस्ते और चूड़ियां पटना, सिवान और गोपालगंज जैसे शहरों के बाजारों की रौनक बढ़ा रहे हैं. कलावती ने न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि 150 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार से जोड़ा. उनके मार्गदर्शन में महिलाएं आज बकरी पालन, सिलाई और चूड़ी बनाने जैसे कार्यों से जुड़कर सम्मानजनक कमाई कर रही हैं. कलावती का लक्ष्य अब अपने इस हुनर को एक बड़ी फैक्ट्री का रूप देना है.


