नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्री नीतिन गड़करी ने न्यूज18 इंडिया से बातचीत करते हुए नॉर्थ-ईस्ट के विकास पर अपनी बात रखी है. उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में कैसे नॉर्थ-ईस्ट भारत का ‘ग्रोथ इंजन’ बनेगा. इसके लिए उन्होंने दमदार ब्लूप्रिंट तैयार की है. उन्होंने एक सवाल कि क्या आने वाले वर्षों में नॉर्थ-ईस्ट, जिसका केंद्र असम होगा, भारत के लिए एक इकोनॉमिक ग्रोथ इंजन का काम करेगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से.
नितिन गडकरी ने इंटरव्यू में बात करते हुए कहा कि मैं बहुत खुशी और अभिमान के साथ यह बताना चाहता हूं कि हमारे विभाग ने नॉर्थ-ईस्ट के डेवलपमेंट के लिए काफी बड़े पैमाने पर फाइनेंस कैपिटल उपलब्ध करा कर रखा है. मेरा विश्वास है कि जिस प्रकार से वहां इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप हो रहा है, वह दिन अब दूर नहीं है जब नॉर्थ-ईस्ट का इंफ्रास्ट्रक्चर अमेरिका के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर के बराबर होगा.
विकास की नींव रख दी गई है
गडकरी ने कहा कि सड़क नेटवर्क के इंफ्रास्ट्रक्चर की बात कर रहा हूं. 2014 में हमारे यहां नॉर्थ-ईस्ट में सड़कों की लंबाई केवल 10,000 किलोमीटर थी. 2026 में वह बढ़कर 16,600 किलोमीटर हो गई है. हम यहां ₹3,75,000 करोड़ का इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं और करीब ₹2 लाख करोड़ का अतिरिक्त इन्वेस्टमेंट हमारी पाइपलाइन में है.
कनेक्टिविटी होगा फायदा
बॉर्डर कनेक्टिविटी, इंटर-स्टेट कनेक्टिविटी और इकोनॉमिक कॉरिडोर- ये बहुत महत्वपूर्ण हैं. नॉर्थ-ईस्ट में इंटरनेशनल बॉर्डर की लंबाई 5,300 किलोमीटर है. यह इलाका रिमोट और पहाड़ी (Hill) जिलों वाला है, जिसे अब हाईवे से जोड़ा जा रहा है. यहां कनेक्टिविटी होने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसान अपने उत्पाद (Products) सीधे मार्केट तक पहुंचा पाएंगे, जिससे पोस्ट-हार्वेस्ट लॉसेस (अनाज/सब्जी खराब होने से होने वाला नुकसान) कम होंगे. स्कूल, हॉस्पिटल और इमरजेंसी सेवाएं बेहतर होंगी.
गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी दूर होगी
नॉर्थ-ईस्ट में जो सबसे बड़ी समस्या कनेक्टिविटी की थी, वह अब नहीं रहेगी. इससे इकोनॉमी उभर कर आएगी, इंडस्ट्री डेवलप होगी और कैपिटल इन्वेस्टमेंट आएगा. इसका सबसे बड़ा फायदा रोजगार निर्माण के रूप में होगा. रोजगार पैदा होगा तो निश्चित रूप से असम से गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी दूर होगी.
अंडरवाटर टनल से होगा विकास
आपको असम के लिए एक और अच्छी बात बताना चाहता हूं. हमने ₹17,000 करोड़ के ‘गुवाहाटी रिंग रोड’ का काम शुरू कर दिया है. काजीरंगा के लिए करीब ₹9,000 करोड़ का एलिवेटेड रोड मंजूर किया है, जिसका काम हम कर रहे हैं. इसके अलावा, हम ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे ₹12,000 करोड़ की अंडरवाटर टनल (Underwater Tunnel) बना रहे हैं.
असम के प्रोजेक्ट्स का लेखा-जोखा
कुल मिलाकर हम केवल असम में ₹1,31,000 करोड़ के 264 प्रोजेक्ट्स (4,300 किलोमीटर) पर काम कर रहे हैं. असम में ₹62,000 करोड़ के 30 नए अपकमिंग प्रोजेक्ट्स (1,070 किलोमीटर) हैं. ऑनगोइंग (चल रहे) प्रोजेक्ट्स की बात करें तो 55 प्रोजेक्ट्स (936 किलोमीटर) हैं, जिनकी लागत ₹41,000 करोड़ है. जो प्रोजेक्ट्स हम पूरे कर चुके हैं, वे ₹28,000 करोड़ के 179 प्रोजेक्ट्स (2,300 किलोमीटर) हैं.
ब्रह्मपुत्र पर सबसे ज्यादा पुल बना
असम का जो फोकस एरिया है, वह ब्रह्मपुत्र नदी है. हमने ब्रह्मपुत्र पर कई बड़े पुल (Major Bridges) बनाए हैं. मैं गर्व से कहूंगा कि आजादी मिलने के बाद से जितनी भी सरकारें आईं, उन्होंने ब्रह्मपुत्र पर जितने पुल नहीं बनाए, उससे कई गुना ज्यादा पुल हमारी सरकार में बने हैं. इन मेजर ब्रिजेज ने असम की कनेक्टिविटी को बहुत आसान कर दिया है. ‘ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी’ आसान हो गई है. हम फोर-लेनिंग कॉरिडोर बना रहे हैं. शहरी ट्रैफिक की भीड़भाड़ (Congestion) कम करने के लिए गुवाहाटी रिंग रोड बना रहे हैं. इंडस्ट्री और रिफाइनरी को लिंक करके इकोनॉमिक कॉरिडोर बना रहे हैं. असम को ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) के तहत एक रीजनल ट्रेड गेटवे (क्षेत्रीय व्यापार द्वार) के रूप में विकसित कर रहे हैं. मुझे लगता है कि यह असम के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा. आने वाले दिनों में आपने अभी तक जो देखा है, वह तो केवल ट्रेलर (न्यूज़ रील) है, असली फिल्म शुरू होना अभी बाकी है. पूरे नॉर्थ-ईस्ट और असम की तस्वीर बदल जाएगी, यह विश्वास मैं आपके माध्यम से असम की जनता को देना चाहता हूं.
माजुली ब्रिज और गुवाहाटी रिंग रोड का मास्टरप्लान
माजुली ब्रिज का काम पहले जिस कॉरपोरेशन को दिया था, वह नहीं कर पाया. हमने उसे टर्मिनेट करके नया टेंडर निकाला और अब काम तेज गति से शुरू है. जितनी भी बाधाएं थीं, हमने दूर कर दी हैं. हम माजुली ब्रिज को जल्द ही एक साल के अंदर पूरा करने की कोशिश करेंगे. दूसरी बात, गुवाहाटी रिंग रोड का काम शुरू हुआ है. मैंने मुख्यमंत्री जी से कहा है कि गुवाहाटी सिटी को डीकन्जेस्ट (भीड़ मुक्त) करने के लिए इस रोड के किनारे इंडस्ट्रियल एरिया, होलसेल मार्केट, फार्मास्यूटिकल मार्केट, हार्डवेयर मार्केट, कपड़े और किराना (ग्रोसरी) के मार्केट बनाए जाएं. अगर ये सारे होलसेल मार्केट रिंग रोड पर शिफ्ट हो जाएंगे, तो शहर का ट्रैफिक बाहर के बाहर ही निकल जाएगा. इससे गुवाहाटी को डीकन्जेस्ट करने में काफी फायदा होगा.
तीन अहम प्रोजेक्ट
हमारा प्रयास है कि इस रोड के किनारे असम में स्मार्ट सिटी बने, इंडस्ट्रियल क्लस्टर बनें और लॉजिस्टिक पार्क बनें. नॉर्थ-ईस्ट और असम के हमारे जो तीन सबसे एंबिशियस (महत्वाकांक्षी) प्रोजेक्ट थे- गुवाहाटी रिंग रोड, काजीरंगा एलिवेटेड रोड और ब्रह्मपुत्र नदी के अंदर से जाने वाली ₹12,000 करोड़ की अंडरवाटर टनल ये तीनों बहुत महत्वपूर्ण हैं. ये लगभग प्रक्रिया में हैं, कुछ का काम शुरू हो गया है और बाकी का भी जल्द शुरू हो जाएगा. मैं व्यक्तिगत रूप से इनका लगातार फॉलो-अप कर रहा हूं.
लॉजिस्टिक कॉस्ट घटाने और ‘ग्रीन फ्यूल’ की क्रांति
पहली बात मैं आपको बताऊं कि अभी IIM बेंगलुरु, IIT कानपुर और IIT चेन्नई ने एक अध्ययन किया है. उन्होंने पिछले साल नवंबर में कहा कि हमारे नेशनल हाईवे का रोड नेटवर्क अच्छा बनने के कारण देश की लॉजिस्टिक कॉस्ट (माल ढुलाई लागत) अब घटकर 6% पर आ गई है. पहले यह 16% थी. जबकि चीन में यह 8% और यूरोप-अमेरिका में 12% थी. मेरी यह एंबिशन थी कि हमारी लॉजिस्टिक कॉस्ट सिंगल डिजिट (9% के आसपास) पर आए.
इलेक्ट्रिक ट्रक
इसमें अच्छे रोड का योगदान तो है ही, साथ ही हम फ्यूल में भी बड़ा बदलाव कर रहे हैं. इलेक्ट्रिक ट्रक आ रहे हैं. अभी हमारे यहां मुंद्रा पोर्ट, कांडला पोर्ट और JNPT से एक ‘फ्लैश चार्जिंग’ की सुविधा शुरू हुई है, जिससे ट्रक 200 किलोमीटर चलते हैं. जहां ₹110 का डीजल लगता था, वहां अब मात्र ₹10 की बिजली लग रही है.
जलमार्ग का डेवलपमेंट किया जाएगा
फिर हमने ब्रह्मपुत्र में वॉटरवेज (जलमार्ग) को डेवलप किया. जब मैं शिपिंग मंत्री था, तब मैंने पांडु बंदरगाह (Pandu Port) तैयार किया, ब्रह्मपुत्र की ड्रेजिंग (सफाई/गहराई बढ़ाना) कराई. उस समय सुषमा स्वराज जी के कहने पर हमने बांग्लादेश में मोंगला पोर्ट तक ड्रेजिंग कराई. ‘जोगीघोपा’ (Jogighopa) में जो मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क है, वह ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक कॉस्ट कम करने का सबसे बड़ा सेंटर होगा. उन्होंने कहा कि आइडिया यह है कि जोगीघोपा से हमारे जहाज (Ship) निकलेंगे, समुद्र के रास्ते हल्दिया (कोलकाता) आएंगे, फिर गंगा नदी से होते हुए वाराणसी तक जाएंगे. यानी वाराणसी से माल जोगीघोपा तक जाएगा.
बांस (Bamboo) और MSME
उन्होंने कहा कि जब मैं MSME मंत्री था, तब हमने ‘बैम्बू’ (बांस) के उपयोग को बढ़ावा दिया. आज आप एयर इंडिया या इंडिगो के हवाई जहाजों में जाएंगे, तो वहां आपको बांस के बने चम्मच और कांटे (Forks) मिलेंगे. ये तैयार करने की कई फैक्ट्रियां असम और नॉर्थ-ईस्ट में शुरू हुई हैं. मैंने एयरलाइंस कंपनियों से कहा कि आप प्लास्टिक की जगह इन्हें इस्तेमाल कीजिए. पहले बांस काटने के लिए फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से ट्रांजिट पास (TP) और परमिशन लेनी पड़ती थी. मैं प्रधानमंत्री जी के पास गया, इसके लिए संघर्ष किया. मैंने फॉरेस्ट वालों से पूछा कि “बांस घास (Grass) है या पेड़?” उन्होंने माना कि घास है. तब मैंने कहा कि घास काटने के लिए परमिशन क्यों चाहिए? इसके बाद बांस काटने की प्रक्रिया आसान हुई. अब बंबू से पर्यावरण की रक्षा भी होगी और बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिलेगा. बंबू से सुंदर कपड़े, टी-शर्ट, बनियान, फर्नीचर, अचार और हैंडीक्राफ्ट की चीजें बन रही हैं. बंबू इकोनॉमी अपने आप में इतनी बड़ी बन सकती है कि लाखों युवाओं को रोजगार दे सकती है.
मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क और एक्सपोर्ट
जोगीघोपा में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क बन रहा है. इसके साथ हम ब्रह्मपुत्र पर अनेक जगह जेटी (Jetty) डेवलप कर रहे हैं. पांडू जेटी डेवलप हुई है. हमने रो-रो (Ro-Ro) पैक्स सेवाएं शुरू कर दी हैं. भूपेन हजारिका सेतु (ढोला-सदिया पुल) अपने आप में एक इतिहास है. बांग्लादेश के लिए हम अगरतला से कनेक्टिविटी कर रहे हैं. हम कोशिश कर रहे हैं कि कोलकाता के हल्दिया पोर्ट से सीधे कंटेनर बांग्लादेश जाएं. पहले कंटेनर मुंबई के JNPT से कोलंबो (श्रीलंका) जाते थे, फिर वहां से ढाका. इसमें लॉजिस्टिक कॉस्ट ₹2 से ₹2.5 लाख प्रति कंटेनर पड़ती थी. अब मुंबई से रेलवे द्वारा हल्दिया तक कंटेनर आएंगे और वहां से सीधे वॉटरवेज के जरिए बांग्लादेश जाएंगे. इससे हमारा व्यापार और एक्सपोर्ट दोनों बढ़ेगा.
पेट्रोल-डीजल का विकल्प: मेथेनॉल और एथेनॉल
असम पेट्रोकेमिकल्स (Assam Petrochemicals) बड़े पैमाने पर मेथेनॉल और एथेनॉल बनाता है. अशोक लीलैंड ने बेंगलुरु में डीजल में 15% मेथेनॉल मिलाकर बसें चलाने का सक्सेसफुल प्रोजेक्ट किया है. मैंने असम के मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि पूरे असम और नॉर्थ-ईस्ट में ट्रकों और बसों में मेथेनॉल का उपयोग करें. मेथेनॉल का रेट ₹26 प्रति लीटर है, जबकि डीजल ₹110 लीटर है. हम इलेक्ट्रिक, एथेनॉल, मेथेनॉल, बायो-डीजल, CNG, LNG और अब ग्रीन हाइड्रोजन की तरफ जा रहे हैं. प्रदूषण कम करना और ‘इंपोर्ट सब्सीट्यूट, कॉस्ट इफेक्टिव, पॉल्यूशन फ्री’ स्वदेशी फ्यूल हमारी पॉलिसी है. मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि नुमालीगढ़ में हमने बंबू (बांस) से एथेनॉल बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया है. यह सक्सेसफुली इंप्लीमेंट हो रहा है. पराली (Rice Straw) से भी अब हम पानीपत में एथेनॉल और बायो-बिटुमेन (Bio-Bitumen) बना रहे हैं. मैंने असम के मुख्यमंत्री जी से कहा है कि पराली और बायोमास का उपयोग करके नॉर्थ-ईस्ट में भी डामर (Bitumen) बनाया जा सकता है, जिसका इस्तेमाल सड़कों में होगा.
ब्रह्मपुत्र के नीचे देश की पहली टनल
उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी में अंडरवाटर टनल पर सवाल के जवाब में कहा कि वह जो प्रोजेक्ट है, उस पर डिटेल में चर्चा करना थोड़ा ठीक नहीं क्योंकि वह डिफेंस (रक्षा) के साथ जुड़ा हुआ प्रोजेक्ट है, लेकिन उस पर गंभीरता से विचार हो रहा है.
असम में हम कई गेम-चेंजर प्रोजेक्ट कर रहे हैं:
- ढोला-सदिया ब्रिज: 28 किलोमीटर लंबा और ₹2,000 करोड़ का प्रोजेक्ट. ढोला और सदिया के बीच पहले 4:30 घंटे लगते थे, अब 30 मिनट लगते हैं.
- जोगीघोपा मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क: यह सितंबर 2024 (लक्ष्य) तक पूरा हो जाएगा.
- धुबरी-फुलबाड़ी फोर-लेन ब्रिज: ₹5,000 करोड़ का यह प्रोजेक्ट 71% पूरा हो चुका है. इससे यात्रा का समय 6 घंटे से घटकर 30 मिनट हो जाएगा.
- माजुली-जोरहाट ब्रिज: यह 8.2 किलोमीटर का पुल ₹3,500 करोड़ का है, जो माजुली द्वीप को सीधी कनेक्टिविटी देगा.
- नुमालीगढ़-डिब्रूगढ़ फोर-लेन कॉरिडोर: यह 186 किमी लंबा है. इसमें इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी भी है जहां प्रधानमंत्री जी का हवाई जहाज भी उतर सकता है.
- गोहपुर से नुमालीगढ़ अंडरवाटर टनल: यह ब्रह्मपुत्र के नीचे ₹19,000 करोड़ की अंडरवाटर रोड-कम-रेल टनल है. इससे 6 घंटे का सफर 30 मिनट में पूरा होगा. असम से अरुणाचल सिर्फ 1 घंटे में पहुंच सकेंगे. दुनिया में इस प्रकार का यह दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट है.
नॉर्थ-ईस्ट में सड़क निर्माण की चुनौतियां
नॉर्थ-ईस्ट भौगोलिक दृष्टि से बड़ा चैलेंजिंग क्षेत्र है. यह केवल सिविल इंजीनियरिंग का नहीं, बल्कि टेरेन (Terrain) और क्लाइमेट का मल्टी-डायमेंशनल चैलेंज है. टोपोग्राफी, बार-बार होने वाले लैंडस्लाइड और हाई सीस्मिक जोन (भूकंपीय क्षेत्र) के कारण यहां टनल बनाने की लागत मैदानी इलाकों की तुलना में कई गुना अधिक होती है. असम में 6 महीने लंबा मानसून चलता है. फ्लड प्रोन (बाढ़ प्रभावित) नदियां हैं. कंस्ट्रक्शन विंडो (काम करने का समय) बहुत छोटा मिलता है. इसलिए हम यहां ‘क्लाइमेट रेजिलिएंट’ और ‘स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ बना रहे हैं. मैं क्वालिटी को लेकर बहुत गंभीर हूं. जो भी ठेकेदार खराब क्वालिटी का काम करेगा, उस पर कड़ी कार्रवाई करूंगा. हम ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहे हैं जिसे असम की जनता जीवन भर याद रखेगी.
असम से भावनात्मक जुड़ाव
असम जाने पर उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से असम नहीं आ सका क्योंकि मेरे पैर में कुछ मेडिकल प्रॉब्लम (इंजरी) थी, जिसके कारण मैं चल नहीं पा रहा था. इसके लिए मैं आपसे और असम की जनता से क्षमा मांगता हूं. लेकिन मेरा असम से एक भावनात्मक नाता है. जब मैं विद्यार्थी परिषद का कार्यकर्ता था, तब ‘मेरा घर भारत देश’ प्रोजेक्ट के तहत मैंने नॉर्थ-ईस्ट के युवाओं के साथ काम किया था. उस समय नॉर्थ-ईस्ट के लोगों को लगता था कि उनके साथ न्याय नहीं होगा, इंडस्ट्री नहीं आएगी. मैंने इस भावना को बदलने के लिए काम किया. मैं असम की जनता को भारत के एक अभिन्न परिवार के रूप में देखता हूं. मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि 15-20 दिन में मैं खुद असम आऊंगा, रिव्यू मीटिंग करूंगा. मैं असम और नॉर्थ-ईस्ट के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर ऐसी बदल दूंगा कि आपको अमेरिका की याद आ जाएगी. यह मेरी असम की जनता के साथ कमिटमेंट है.


