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Gumla Success Story : गुमला जिले के सिसई प्रखंड के पिलखी गांव निवासी दीपक उरांव ने पलायन की राह छोड़ स्वरोजगार का रास्ता चुना और आज सुअर पालन से सालाना करीब ₹8 लाख की कमाई कर रहे हैं. कभी रोजगार के लिए मलेशिया गए दीपक ने वहीं बड़े फार्म देखकर इस व्यवसाय की बारीकियां सीखीं और गांव लौटकर 4–5 सुअरों से शुरुआत की. आज उनके पास 30 से अधिक सुअर हैं और बिना किसी सरकारी मदद के वे न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को भी गांव में रहकर पशुपालन के जरिए रोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. रिपोर्ट- अनंत कुमार
आज के इस आधुनिक युग में टेक्नोलॉजी के साथ साथ बेरोजगारी भी दिनों दिन बढ़ती जा रही है. इसके कारण बहुत से लोग डिप्रेशन के भी शिकार हो रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ आज के दौर में बहुत सारे युवा रोजगार के लिए इधर उधर भटक भी रहे हैं. यहां तक की पलायन भी कर रहे हैं. जहां कई युवा हादसे का भी शिकार हो रहे हैं.
ऐसे में बता दें गुमला जिले के सिसई प्रखंड क्षेत्र के पिलखी गांव निवासी दीपक उरांव सुअर पालन कर लोगों को प्रेरित करने का कार्य कर रहे हैं. वह सुअर पालन से सलाना लाखों रूपये की कमाई कर रहे हैं. जब इस क्षेत्र के अधिकांश लोग रोजगार के लिए पलायन के लिए मजबूर हैं. ऐसे में लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बनकर उभरे दीपक अन्य लोगों को रोजगार की राह दिखा रहे हैं.
सुअर पालक दीपक उरांव ने बताया कि वह गुमला जिले के सिसई प्रखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्र पिलखी गांव के रहने वाले हैं. वह रोजगार के लिए काम करने के लिए मलेशिया गए हुए थे. वहां पर उन्होंने सुअर पालन के बड़े-बड़े फार्म को देखे और लोग इससे अच्छी खासी मोटी इनकम कर रहे हैं. वहां के बहुत सारे लोग काफी संख्या में इस व्यवसाय से जुड़ कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं तो मेरे मन में भी सुअर पालन करने का ख्याल आया.
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वह मलेशिया में रहते हुए अपने घर परिवार की मदद से अपने गांव के घर में सुअर पालन शुरू करवाया. मात्र 4-5 सुअरो से पालन का व्यवसाय शुरू किया. इसके बाद वह वहां से लौटकर खुद ही इसका व्यवसाय करने का निर्णय लिए. आज अच्छे से यह काम को कर रहे हैं. जहां सालान 8 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं.
दीपक ने बताया कि वर्तमान में उनके पास 30 से 35 बड़े सुअर हैं. उन्हें किसी तरह की कोई सरकारी मदद नहीं मिली है ,न ही कोई ट्रेनिंग ली है. उन्होंने विदेश में रहते हुए यूट्यूब और वहां सुअर पालन को देखकर सुअर पालन की विधि सीखी और अपना काम शुरू किया. उनका कहना है कि अगर उन्हें सरकारी मदद ,ट्रेनिंग, लोन इत्यादि दिया जाए तो वह इसे बड़े स्तर पर इसका काम कर सकते हैं. साथ ही दूसरे युवकों को भी इस व्यवसाय से जोड़ सकते हैं.
दीपक ने कहा कि उनके इस क्षेत्र के अधिकांश लोग पलायन करने को मजबूर हैं. जबकि इस क्षेत्र में भी स्वरोजगार करके अच्छी कमाई की जा सकती है. किसी के आधीन रहने की आवश्यकता भी नहीं है. उन्होंने कहा कि कोई भी युवा जो स्वरोजगार करना चाहता है तो छोटे स्तर से भी शुरू कर सकते हैं. जहां धीरे-धीरे करके उसे बड़े स्तर तक ले जा सकते हैं.
इसके साथ ही लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं. दीपक ने बताया कि पलायन से अच्छा आप अपने जिले में रहकर सुअर पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, गाय पालन, खेती आदि कार्य कर सकते हैं. ये सभी कार्य युवाओं के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है.


