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बरेली नगर निगम ने लंबे समय से बकाया संपत्ति कर न चुकाने पर भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली कॉलेज और महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय सहित अन्य बड़े शिक्षण संस्थानों को नोटिस जारी किया है. निगम का उद्देश्य कर वसूली के माध्यम से शहर की बुनियादी सुविधाओं और विकास योजनाओं को मजबूत करना है.
बरेली. नगर निगम ने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) को लंबे समय से बकाया संपत्ति कर को लेकर नोटिस जारी कर प्रशासनिक स्तर पर सख्ती दिखा दी है. नगर निगम की ओर से भेजे गए इस नोटिस में करीब 59.18 करोड़ रुपये के टैक्स बकाये का उल्लेख किया गया है. निगम का कहना है कि यह राशि कई वर्षों से लंबित है और बार-बार याद दिलाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया, जिसके बाद अब औपचारिक नोटिस भेजने की कार्रवाई की गई है. यह कार्रवाई बरेली जिले में स्थित बड़े-बड़े कॉलेजों और डीम्ड यूनिवर्सिटीज़, जैसे बरेली कॉलेज और महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय जैसी बड़ी विश्वविद्यालयों को भी नगर निगम द्वारा नोटिस जारी कर किए जाने के रूप में सामने आई है.
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, यह कदम किसी एक संस्थान के खिलाफ नहीं बल्कि नियमों के समान रूप से पालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत सरकारी, अर्धसरकारी और शैक्षणिक संस्थानों को भी स्थानीय निकायों के करों का भुगतान करना अनिवार्य है. इसी क्रम में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली कॉलेज, और महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय को भी नोटिस जारी किया गया है, ताकि बकाया राशि का निस्तारण किया जा सके या फिर यदि टैक्स निर्धारण को लेकर कोई आपत्ति है तो वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकें.
बड़े संस्थानों से टैक्स वसूली होने पर बुनियादी सुविधाओं में मदद
इस मामले को लेकर बरेली नगर निगम के नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्या ने बताया कि आईवीआरआई, बरेली कॉलेज और महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय को नोटिस भेजे जाने के बाद अब शहर के अन्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को भी उनके बकाया टैक्स के संबंध में नोटिस जारी कर दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि सभी संस्थानों को अपने-अपने कर दायित्वों का समय पर भुगतान करना होगा, ताकि नगर निगम के राजस्व में वृद्धि हो सके और शहर के विकास कार्यों को गति मिल सके. नगर निगम का मानना है कि बड़े संस्थानों से टैक्स वसूली होने पर बुनियादी सुविधाओं, जैसे सड़क, सफाई व्यवस्था, जल निकासी और अन्य नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
प्रशासन की यह भी कोशिश है कि टैक्स व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और किसी के साथ किसी प्रकार का भेदभाव न हो. फिलहाल यह मामला नोटिस के स्तर पर है और आगे की कार्रवाई संबंधित संस्थानों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी. यदि तय समयसीमा के भीतर बकाया राशि जमा नहीं की जाती है या संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो नगर निगम द्वारा वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम पर शहरवासियों की नजर बनी हुई है, क्योंकि इसका असर न केवल संबंधित संस्थानों पर बल्कि नगर निगम के आर्थिक संसाधनों और विकास योजनाओं पर भी पड़ सकता है.
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