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Dairy Farming: रामपुर के किसान रामौतार ने पशुपालन को आय का मजबूत जरिया बनाया है. उनके पास 6 भैंस हैं, जिनसे रोज करीब 40 लीटर दूध निकलता है और 55 रुपये लीटर की दर से बिक्री होती है. खर्च निकालकर उन्हें हफ्ते में लगभग 8 हजार रुपये शुद्ध मुनाफा मिलता है. दूध के साथ पशु बेचकर भी साल में अच्छी एकमुश्त कमाई हो जाती है. सही चारा, सफाई और देखभाल से पशुपालन खेती के साथ लाभदायक विकल्प साबित हो रहा है.
रामपुर: खेती के साथ-साथ पशुपालन आज किसानों के लिए कमाई का मजबूत जरिया बनता जा रहा है. रामपुर के किसान रामौतार ने पशु पालन अपनाकर न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ाई है, बल्कि अब यह उनका नियमित और भरोसेमंद रोजगार बन गया है. रामौतार के पास इस समय 6 भैंस हैं, जिनसे रोज करीब 40 लीटर दूध निकलता है. वह इस दूध को 55 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचते हैं, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है.
रामौतार बताते हैं कि अगर पूरे हफ्ते का हिसाब लगाया जाए तो खर्च निकालने के बाद करीब 8000 रुपये का शुद्ध मुनाफा हो जाता है, इसमें पशुओं का चारा, भूसा और देखभाल का खर्च शामिल होता है. उनका कहना है कि पशुपालन में मेहनत जरूर है, लेकिन आम नौकरी की तुलना में इसमें ज्यादा फायदा है और सबसे बड़ी बात यह है कि आमदनी लगातार बनी रहती है.
उन्होंने बताया कि दूध के अलावा पशु बेचकर भी अच्छी कमाई हो जाती है. इस महीने ही वह करीब डेढ़ लाख रुपये के दो पशु बेचने की तैयारी कर रहे हैं. रामौतार के अनुसार हर साल कुछ पशु तैयार हो जाते हैं, जिन्हें 75 हजार से लेकर 90 हजार रुपये तक में आसानी से बेच दिया जाता है. इससे एकमुश्त अच्छी आमदनी हो जाती है.
ऐसे रखते हैं पशुओं का ध्यान
रामौतार बताते हैं कि पशुपालन में सबसे जरूरी है पशुओं की सही देखभाल. वह अपनी भैंसों को सुबह-शाम समय से चारा और पानी देते हैं. हरे चारे के साथ-साथ सूखा चारा और दाना भी दिया जाता है, जिससे दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों अच्छी रहती है. पशुओं को हमेशा साफ और सूखी जगह पर रखा जाता है, ताकि उन्हें कोई बीमारी न हो. वह कहते हैं कि पशुओं के रहने की जगह की रोज सफाई करना बहुत जरूरी है. गंदगी होने से पशु बीमार हो सकते हैं, जिससे दूध उत्पादन कम हो जाता है. रामौतार रोज सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक पशुओं को चराने ले आते हैं.
रामौतार के मुताबिक जो किसान खेती के साथ पशुपालन शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह बहुत अच्छा विकल्प है. शुरुआत में कम पशुओं से भी काम शुरू किया जा सकता है. धीरे-धीरे अनुभव बढ़ने पर पशुओं की संख्या बढ़ाकर आमदनी भी बढ़ाई जा सकती है.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें


