Mango Blossom Pest Control | Agriculture News | आम के मंजर की सुरक्षा के उपाय | खेती किसानी की खबरें |

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Mango Blossom Pest Control Tips: फरवरी की बढ़ती गर्मी आम की फसल के लिए ‘लासा’ जैसी गंभीर मुसीबत लेकर आई है. पेड़ों पर आए मंजरों में चिपचिपापन दिखना इस बात का संकेत है कि मथुआ और दहिया जैसे कीटों ने हमला बोल दिया है. अगर समय रहते इनका इलाज नहीं किया गया, तो ये मंजर फल बनने से पहले ही सड़कर गिर जाएंगे. कृषि वैज्ञानिक डॉ. सी. के. त्रिपाठी ने चेतावनी दी है कि एक छोटी सी चूक पूरी साल की मेहनत पर पानी फेर सकती है. अपनी मेहनत को बचाने के लिए किसानों को तुरंत कीटनाशकों और फफूंदनाशकों का सही मात्रा में छिड़काव करना चाहिए. जानिए किन दवाओं के इस्तेमाल से आप अपने बागों को सुरक्षित रख सकते हैं.

सुल्तानपुर: फरवरी के महीने में तापमान बढ़ते ही आम के पेड़ों पर मंजरियां लटकने लगी हैं. यही मंजर आगे चलकर रसीले आमों में तब्दील होंगे, लेकिन इन दिनों मंजरों में ‘लासा’ लगने की गंभीर समस्या देखी जा रही है. कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर के वैज्ञानिक डॉ. सी. के. त्रिपाठी ने आगाह किया है कि यह चिपचिपा पदार्थ मंजर के विकास को पूरी तरह रोक देता है, जिससे फल नहीं बन पाते.

डॉ. त्रिपाठी के अनुसार, जब वायुमंडल का तापमान बढ़ता है, तो ‘मथुआ कीट’ (मैंगो हॉपर) और ‘दहिया कीट’ (मिलीबग) की संख्या तेजी से बढ़ती है. ये कीट मंजरों का रस चूसते हैं और एक चिपचिपा पदार्थ छोड़ते हैं जिसे किसान ‘लासा’ कहते हैं. इसके अलावा, इस मौसम में ‘पाउडरी मिल्ड्यू’ यानी बौर पर सफेद पाउडर जैसा रोग और ‘एन्थ्रेकनोज’ जैसी फफूंद वाली बीमारियां भी सक्रिय हो जाती हैं. ये सभी रोग और कीट मिलकर फसल को पूरी तरह बर्बाद करने की क्षमता रखते हैं, इसलिए समय पर इनका उपचार बहुत जरूरी है.

आम के मंजर के बचाव के लिए वैज्ञानिक उपाय
कृषि एक्सपर्ट ने बागवानों को सलाह दी है कि वे छिड़काव के लिए सही समय का चुनाव करें. पहला छिड़काव मंजर निकलने से ठीक पहले किया जाना चाहिए. छिड़काव इस तरह करें कि दवा पेड़ की छाल की दरारों तक पहुंचे, क्योंकि मथुआ कीट वहीं छिपे रहते हैं और तापमान बढ़ते ही सक्रिय हो जाते हैं. इसके बाद जब आम के मंजरों में मटर के दाने के बराबर फल लगने लगें, तब कीटनाशक के साथ फफूंदनाशक मिलाकर दूसरा छिड़काव करना चाहिए. इससे मंजर को पाउडरी मिल्ड्यू और एन्थ्रेकनोज जैसे घातक रोगों से पूरी तरह बचाया जा सकता है.

इन दवाओं का करें इस्तेमाल
डॉक्टर त्रिपाठी ने बताया कि लासा और अन्य कीटों से बचने के लिए किसान इमिडाक्लोप्रिड, मालाथियान, डायमेथोएट, एसीफेट, या थायोमेथाक्साम जैसे कीटनाशकों का प्रयोग कर सकते हैं. फफूंदनाशक दवाओं की बात करें तो सल्फर, कॉपर ऑक्सीक्लोराइड, कार्बेन्डाजिम, या हेक्साकोनाजोल का इस्तेमाल काफी प्रभावी साबित होता है. इन दवाओं का सही घोल तैयार करके छिड़काव करने से मंजर सुरक्षित रहते हैं और आम की पैदावार पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है.

सावधानी ही है फसल की असली सुरक्षा
किसान भाइयों को हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि दवाओं का घोल कृषि विशेषज्ञों द्वारा बताई गई सटीक मात्रा के अनुसार ही तैयार किया जाए. सही समय पर किया गया प्रबंधन न केवल मंजरों को लासा से बचाएगा, बल्कि आगे चलकर फलों के आकार और उनकी चमक को भी बेहतर करेगा. इससे बाजार में किसानों को अपनी उपज की अच्छी कीमत मिल सकेगी और उनकी साल भर की मेहनत सफल होगी.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें



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