AI Impact Summit: नई दिल्ली में चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के CEO अभिषेक सिंह ने न्यूज18 इंडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि भारत में AI का असली महत्व इस सम्मेलन से दुनिया के सामने आएगा. सिंह भारत AI मिशन के भी प्रमुख हैं. यह सम्मेलन पहले के AI सम्मेलनों से अलग है, जहां सिर्फ बातें होती थीं. यहां AI के वास्तविक कामों को प्रदर्शित किया जा रहा है, ताकि उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा और सेवाओं में इसका फायदा कैसे पहुंचे, इस पर फोकस है.
इस सम्मेलन के बारे में अभिषेक सिंह ने कहा कि रोबोटिक्स और जनरेटिव AI के कई उदाहरण यहां दिखाए जा रहे हैं, साथ ही AI से रोजगार कैसे बढ़ाए जा सकते हैं और निवेश कैसे आकर्षित किया जा सकता है, इस पर गहन चर्चा हो रही है.
अभिषेक सिंह ने सरल भाषा में समझाया कि AI आम लोगों की जिंदगी कैसे आसान बना सकता है. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “किसान अगर अपनी फसल की बिक्री के लिए बाजार भाव की जानकारी या सलाह चाहते हैं, तो वे अब AI की मदद से ऐसा कर सकते हैं. कई किसानों को वेबसाइट चलाना मुश्किल लगता है, लेकिन अब वे मोबाइल पर स्पीच (आवाज) से या टोल-फ्री नंबर पर AI से बात करके जानकारी ले सकते हैं.”
इसी तरह स्वास्थ्य क्षेत्र में अगर किसी बच्चे को डायरिया जैसी समस्या हो, तो दूर-दराज के इलाके में भी AI डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है, जो तुरंत बेसिक गाइडेंस दे सकता है. शिक्षा के क्षेत्र में AI का सबसे बड़ा फायदा छात्रों को मिलेगा. सिंह ने कहा कि AI ट्यूटर बच्चों की मदद करेगा. कई बार बच्चे टीचर से बार-बार सवाल पूछने में हिचकिचाते हैं या टीचर को समय नहीं मिलता. AI ट्यूटर कभी नाराज नहीं होता, बच्चों को जज नहीं करता और 24/7 उपलब्ध रहता है. बच्चे अपनी गति से सीख सकते हैं.
क्या एआई के कारण चली जाएगी नौकरी?
AI से जॉब लॉस के डर पर अभिषेक सिंह ने स्पष्ट किया कि हर नई तकनीक के आने पर कुछ पुरानी नौकरियां कम होती हैं, लेकिन नए और ज्यादा हाई-वैल्यू जॉब्स बनते हैं. उन्होंने कहा कि AI जॉब्स नहीं छीनेगा, बल्कि AI स्किल्स वाले लोग बिना स्किल्स वालों से आगे निकल जाएंगे. भारत जैसे युवा-आधारित देश के लिए AI एक बड़ा मौका है. हम ज्यादा उत्पादक और क्रिएटिव जॉब्स क्रिएट कर सकते हैं.
भारत की AI क्षमता पर सिंह ने जोर दिया कि भारत के पास दुनिया के सर्वश्रेष्ठ देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने की पूरी काबिलियत है. सरकार की तरफ से संसाधन, कंप्यूट पावर और डेटासेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि निजी क्षेत्र और ग्लोबल कम्युनिटी से भी भारी निवेश की उम्मीद है. संसाधनों की कमी नहीं आएगी, क्योंकि भारत का AI इकोसिस्टम तेजी से बढ़ रहा है.
बिल गेट्स के बारे में पूछे जाने पर अभिषेक सिंह ने कहा कि उनका नाम एजेंडा में था और वे संबोधित करने वाले थे, लेकिन नवीनतम अपडेट्स के अनुसार बिल गेट्स अब सम्मेलन में शामिल नहीं हो रहे हैं. कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि उनकी भागीदारी रद्द हो गई है. हालांकि, सम्मेलन में अन्य ग्लोबल लीडर्स जैसे Anthropic, DeepMind और Meta के CEO मौजूद हैं, जो AI के भविष्य पर चर्चा कर रहे हैं.
यह सम्मेलन ग्लोबल साउथ में पहला बड़ा AI इवेंट है, जो ‘पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस’ पर फोकस कर रहा है. अभिषेक सिंह के अनुसार, भारत AI को सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि समावेशी विकास का माध्यम बना रहा है, जहां किसान, छात्र, डॉक्टर और उद्यमी सब लाभान्वित होंगे.


