राज मुद्दे पर महाराष्‍ट्र मंत्रिमंडल में विवाद – %e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c %e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%87 %e0%a4%aa%e0%a4%b0 %e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e2%80%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d

Date:


07 मई 2008
आईबीएन-7

मुम्बई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्‍यक्ष राज ठाकरे के जहरीले भाषणों के मुद्दे पर महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल में दरार पड़ती नजर आ रही है। बढ़ते विवाद के बीच राज्‍य के उपमुख्‍यमंत्री और गृहमंत्री आर.आर. पाटिल ने अपने इस्‍तीफे की पेशकश कर डाली।

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मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने पाटिल पर राज ठाकरे के मुद्दे पर ढ़िलाई बरतने का आरोप लगा दिया। इसी बात पर पाटिल नाराज हो गए और उन्होंने अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी।

महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था के लिए नए सिर दर्द का नाम अब राज ठाकरे पड़ गया है। दर्द का ये दायरा अब बढ़ने लगा है। नफरत की आग उगलने वाले राज के राग से महाराष्ट्र सरकार भी बेचैन है। इसकी टीस गृह मंत्री आर. आर. पाटिल महसूस कर रहे हैं।

बीते दिनों राज ने अपनी पार्टी की रैली में उत्तर भारतीयों के खिलाफ जहर उगला। इस मामले में राज के खिलाफ कार्रवाई की मांग जोर पकड़ने लगी है। ऐसी मांग करने वालों में सरकार में शामिल नेता भी शामिल हैं।

पढ़ें:- राज ठाकरे के भाषण की जांच होगी

यही वजह है कि मंगलवार को जब कैबिनेट में राज के मुद्दे पर चर्चा शुरु हुई तो अचानक अधिकारियों को बाहर जाने के लिए कह दिया गया। इसके बाद कैबिनेट के अंदर जमकर तकरार हुई। महाराष्ट्र में मंत्री और शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने पाटिल को निशाना बनाया।

अजीत पवार ने पाटिल पर आरोप लगाया कि वे राज के मुद्दे पर वो ठीक से कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इससे नाराज पाटिल ने अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी। पाटिल ने कहा, “मैं पद छोड़ देता हूं। जिसको आकर संभालना है, वो संभाल कर दिखाए। मैं इस्तीफा दे दूंगा। ”

तकरार इतनी बढ़ गई कि राज्य के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख को इस मामले में दखल देना पड़ा। असल में राज के राग का असर महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

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मजदूर यहां से पलायन कर रहे हैं। इससे उद्योग धंधों पर बुरा असर पड़ रहा है। सरकार को अंदेशा है कि इसका असर महाराष्ट्र में होने वाले निवेश पर भी पड़ सकता है। नासिक जैसे बढ़े शहर में भी उद्योगपति आने से कतरा रहे हैं। दूसरी तरफ उत्तर भारतीय नेता और हाईकमान भी इस मुद्दे पर दबाव बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं।



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