ट्रेड डील में यूरोप ने दिया था झटका! अब भारत ने निकाला कार्बन टैक्‍स का तोड़, पर जीत के लिए चीन को देनी होगी टक्‍कर

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Steel Export in India : भारत अपने कुल निर्यात का एक तिहाई यानी करीब 33 फीसदी स्‍टील सिर्फ यूरोपीय संघ को भेजता है. लेकिन, ईयू के साथ हाल में हुई ट्रेड डील में भारत के स्‍टील और सीमेंट जैसे उत्‍पादों पर कार्बन टैक्‍स लगा दिया गया है, जिससे निर्यात पर दबाव बढ़ गया है. इस चुनौती से निपटने के लिए भारत ने नए बाजारों की तलाश शुरू कर दी है. हालांकि, गैर यूरोपीय बाजार में चीन के स्‍टील की बादशाहत है और भारत को बढ़त बनानी है तो उसे टक्‍कर देनी पड़ेगी.

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भारत ने कार्बन टैक्‍स से बचने के लिए नया स्‍टील बाजार तलाशना शुरू कर दिया है.

नई दिल्‍ली. भारत और यूरोपीय संघ के बीच पिछले महीने हुई ट्रेड डील में दोनों पक्षों के हाथ बहुत कुछ लगा, लेकिन एक चीज ऐसी रही जो भारत के हाथ से फिसल गई. पूरी डील में भारत को इसी एक मसले पर झटका लगा था, लेकिन अब इसका तोड़ भी निकाल लिया गया है और आने वाले समय में भारत यूरोपीय संघ को निर्यात से होने वाले नुकसान की भरपाई अन्‍य देशों को सामान बेचकर कर सकता है. इस पर गहन मंथन के साथ कोशिशें भी शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इस लड़ाई को जीतने के लिए हमें चीन को कड़ी टक्‍कर देनी होगी.

भारत और ईयू की ट्रेड डील में सबसे बड़ा सिरदर्द कार्बन टैक्‍स था, जो भारत के स्‍टील और सीमेंट जैसे फैक्‍ट्री उत्‍पादों पर लगाया जा रहा है. भारत से यूरोपीय संघ को बड़ी मात्रा में स्‍टील का निर्यात होता है, लेकिन कार्बन टैक्‍स की वजह से इस निर्यात पर दबाव काफी बढ़ गया है. अब कार्बन टैक्स के असर को कम करने के लिए भारत ने मध्य पूर्व और एशिया में नए बाजार तलाशने शुरू कर दिए हैं. मामले से जुड़े सरकारी सूत्रों का कहना है कि इसके लिए निर्यात संगठन सरकार से कुछ मदद की भी उम्‍मीद लगा रहे हैं.

भारत से यूरोप को कितना स्‍टील निर्यात
भारत कच्चे स्टील का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जो अपनी लगभग दो-तिहाई स्टील का निर्यात यूरोप को करता है. यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म लागू करने के बाद वहां निर्यात पर दबाव बढ़ गया है. पिछले हफ्ते स्टील सचिव संदीप पोंडरिक ने कहा था कि यूरोप के कार्बन टैक्स से प्रभावित निर्यात को समर्थन देने के लिए सरकार को कदम उठाने होंगे.

निर्यात के लिए नए बाजारों की तलाश
सूत्रों का कहना है कि निर्यात के लिए हम नए बाजार देख रहे हैं और मध्य पूर्व के देशों के साथ समझौते करने की कोशिश कर रहे हैं, जहां बहुत सी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं चल रही हैं. साथ ही एशिया में भी नए अवसर तलाश रहे हैं. अब तक हमारा फोकस यूरोप पर था, लेकिन अब हम विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं. एक प्रमुख स्टील कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गैर-ईयू बाजारों में चीन की मजबूत उपस्थिति के बीच भारतीय मिलें सरकार से समर्थन की उम्मीद कर रही हैं.

चीन से मिलेगी कड़ी टक्‍कर
चीन दुनिया का सबसे बड़ा स्टील उत्पादक है और वहां से स्टील निर्यात साल 2023 से लगातार मजबूत बना हुआ है. दिसंबर में स्‍टील निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. बीजिंग इस साल एक लाइसेंस सिस्टम लागू करने की योजना बना रहा है, ताकि मिश्र धातु के निर्यात को नियंत्रित किया जा सके, क्योंकि मजबूत निर्यात से दुनियाभर में संरक्षणवाद बढ़ रहा है. गैर यूरोपीय देशों में चीन का स्‍टील निर्यात सबसे ज्‍यादा है और भारत को वहां अपनी पकड़ मजबूत बनाने और बाजार में रास्‍ता तलाशने के लिए कड़ी टक्‍कर का सामना करना पड़ सकता है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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