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Success Story: महाराष्ट्र के कोल्हापुर के एक साधारण परिवार में पली-बढ़ीं लिना नायर ने बचपन से ही पढ़ाई को अपनी ताकत बनाया. परंपराओं वाले माहौल में बड़ी होने के बावजूद उनके माता-पिता ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. वह नंगे पैर साइकिल से स्कूल जाती थीं और परिवार की पहली लड़की बनीं जिसने उच्च शिक्षा हासिल की. उन्होंने वालचंद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने एक्सएलआरआई, जमशेदपुर से एमबीए किया और गोल्ड मेडल जीता. 1992 में हिंदुस्तान यूनिलीवर में समर इंटर्न के रूप में करियर शुरू किया, जहां मेहनत और लगन के दम पर वह मैनेजमेंट ट्रेनी बनीं और यहीं से उनकी कॉरपोरेट यात्रा की शुरुआत हुई.
Success Story: महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक साधारण हिंदू मलयाली परिवार में लिना नायर धीरे-धीरे बड़ी हो रही थी. घर में परंपराओं का माहौल था, लेकिन उनके माता-पिता ने हमेशा पढ़ाई को प्राथमिकता दी और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. लिना ने होली क्रॉस कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई की. वह बचपन में नंगे पैर साइकिल चलाकर स्कूल जाती थीं. स्कूल की पढ़ाई के बाद वह अपने परिवार की पहली लड़की बनीं जिसने उच्च शिक्षा हासिल की. अपने माता-पिता से इंजीनियरिंग पढ़ने की जिद करने के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई करने का मौका मिला. स्कूल खत्म होते ही उन्होंने वालचंद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया.
आगे बढ़ने का उनका जुनून यहीं नहीं रुका. उन्होंने एक्सएलआरआई, जमशेदपुर से एमबीए किया और गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की. 1992 में उन्होंने हिंदुस्तान यूनिलीवर में समर इंटर्न के तौर पर करियर की शुरुआत की. यही से मेहनत और लगन के दम पर वह मैनेजमेंट ट्रेनी बन गईं और यहीं से उनकी कॉरपोरेट लाइफ की शुरुआत हुई.
हिंदुस्तान यूनिलीवर से हुई शुरुआत
शुरुआत में लिना ने फैक्टरियों में काम किया, कोलकाता, तमिलनाडु और महाराष्ट्र की यूनिलीवर फैक्टरियों में खुद की जगह बनाई, वो हिंदुस्तान यूनिलीवर की फैक्टरी में पहली महिला थीं. इतना ही नहीं वह पहली बार नाइट शिफ्ट भी करने वाली भी महिला थी. यहीं से उन्होंने प्रोडक्शन, शॉप फ्लोर और लोगों को मैनेज करना सीखा. धीरे-धीरे तरक्की हुईं, 1996 में एम्प्लॉयी रिलेशंस मैनेजर बनीं, 2000 में एचआर मैनेजर बन गईं. 2007 में हिंदुस्तान यूनिलीवर की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एचआर बनीं, कंपनी के मैनेजमेंट कमिटी में शामिल होने वाली पहली सबसे युवा महिला बनीं. उन्होंने डाइवर्सिटी और इंक्लूजन पर बहुत काम किया, महिलाओं के लिए दरवाजे खोले और कंपनी में जेंडर बैलेंस बेहतर किया. 2016 में वो यूनिलीवर की ग्लोबल चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर बनीं, कंपनी की पहली महिला, पहली एशियन और सबसे युवा सीएचआरओ.
Chanel में कब हुई एंट्री ?
इसके बाद उन्होंने 30 साल तक यूनिलीवर में काम किया और ग्लोबल लीडरशिप में 50/50 जेंडर बैलेंस हासिल करने में बड़ी भूमिका निभाई. फिर दिसंबर 2021 में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट आया. Chanel के चेयरपर्सन अलैन वर्थीमर ने उन्हें ग्लोबल सीईओ बनाने का फैसला किया. फैशन इंडस्ट्री में उनका कोई अनुभव नहीं था लेकिन उनकी लीडरशिप और रेपुटेशन की वजह से ये फैसला हुआ. जनवरी 2022 से वो चैनल की सीईओ हैं. वो चैनल की पहली महिला सीईओ, पहली भारतीय ओरिजिन वाली और एक महिला ऑफ कलर हैं जो किसी बड़े लग्जरी ब्रांड की लीडर बनीं.
कैसे बनाई अलग पहचान
Chanel में आने के बाद उन्होंने कंपनी के हर हिस्से को समझा, दुनिया भर के रिटेल स्टोर्स, ऑफिसेस और मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स घूमे. क्रिएटिव डायरेक्टर वर्जिनी वियार्ड के साथ काम किया और कंपनी को आगे बढ़ाया. उनका स्टाइल है एम्पैथी और कंपैशन वाला, यानी पहले समझना फिर बदलाव लाना. वो कहती हैं कि लीडरशिप में दया और साहस दोनों जरूरी हैं.
लिना ने कई अवॉर्ड्स भी अपने नाम किए. 2017 में क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय ने उन्हें यूके में सबसे सफल भारतीय बिजनेस लीडर्स में शामिल किया. 2021 में फोर्ब्स की मोस्ट पावरफुल वुमन लिस्ट में 68वें नंबर पर रहीं. 2025 में ब्रिटिश रॉयल फैमिली ने उन्हें कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर यानी सीबीई से सम्मानित किया. उनकी कहानी छोटे शहर की लड़की से ग्लोबल लीडर बनने की रही है. आज वो दिखाती हैं कि मेहनत, लगन और सही वैल्यूज से दुनिया जीती जा सकती है. भारतीय लड़कियों के लिए वो रोल मॉडल हैं जो सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करती हैं. कोल्हापुर से चैनल के टॉप तक का सफर बताता है कि जड़ें मजबूत हों तो आसमान छू सकते हैं. उनकी सफलता लाखों लड़कियों को हिम्मत देती है कि वो भी बड़े सपने देखें और आगे बढ़ें.


