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उत्तर प्रदेश के किसान फरवरी के महीने में आम के पेड़ों की विशेष देखभाल कर रहे हैं. आम के पेड़ों में तना भेदक के अलावा बौर और पत्तों पर झुलसा, गुजिया, पुष्प गुच्छ मिज और भुनगा का प्रकोप देखा जा रहा है. खासकर झुलसा रोग के कारण फूल और अविकसित फल गिरने लगते हैं, जिससे किसानों को नुकसान होता है. यह रोग तब अधिक फैलता है जब हवा में 80 प्रतिशत से अधिक आर्द्रता हो या बारिश के कारण नमी बढ़ जाए. ऐसी स्थिति में अगेती बौर को बचाने के लिए उचित उपाय करना बेहद जरूरी हो जाता है.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान बागवानी पर अधिक जोर दे रहे हैं, जिस कारण उन्हें अच्छा खासा मुनाफा होता है. आम को फलों का राजा कहा जाता है और आम खाना हर किसी को पसंद होता है. फरवरी के महीने में आम के पेड़ों की देखभाल करना बेहद जरूरी माना जाता है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही होने के कारण आम के पेड़ों में फल नहीं आते हैं और किसान काफी परेशान रहते हैं. फरवरी के महीने में आम के पेड़ों में बौर आने लगता है.
परंतु कई बार फंगस आम के पेड़ों को अपने चपेट में ले लेते हैं, जिसकी वजह से आम के पेड़ों में बौर फल में तब्दील नहीं हो पाता. कई बार छोटे-छोटे आम के फल गिर जाते हैं, जिससे किसानों का भारी नुकसान होता है. फंगस से छुटकारा पाने के लिए कीटनाशक दावों का छिड़काव किया जा सकता है. फरवरी के महीने में आम के पेड़ों में पाउडर इम्लडयू नामक रोग का प्रकोप दिखाई देने लगता है.
इस रोग से छुटकारा पाने के लिए आप सल्फर का छिड़काव कर सकते हैं. जिला उद्यान अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 2 ग्राम सल्फर प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर आम के पेड़ों पर छिड़काव किया जा सकता है, जिससे बौर गिरने की समस्या से राहत मिल सकती है. अगर आम के पेड़ पर बौर अधिक होगा तो फल भी अधिक मिलेगा, क्योंकि बौर सीधे फल में ही तब्दील हो जाता है.
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फरवरी के मौसम में आम के पेड़ों में सिंचाई बहुत जरूरी होती है. सिंचाई करते समय ध्यान रखें कि बगीचे में अधिक पानी न भरे और पेड़ों के आसपास नमी बनी रहे. अधिक सिंचाई करने से आम के पेड़ों के उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है. समय पर सिंचाई करने से आम का फल नहीं गिरेगा और उसका वजन तेजी से बढ़ेगा, जिससे आपकी आय में भी वृद्धि होगी.
आम के पेड़ों में तना भेदक के अलावा बौर और पत्तों पर झुलसा, गुजिया, पुष्प गुच्छ मिज और भुनगा का प्रकोप देखा जा रहा है. आम के बौर में झुलसा रोग के कारण फूलों और अविकसित फलों के गिरने की स्थिति पैदा हो जाती है. यह रोग तब अधिक होता है जब हवा में 80 प्रतिशत से अधिक आर्द्रता हो या बारिश के कारण नमी बढ़ जाए. ऐसी स्थिति में अगेती बौर को बचाने के लिए मेन्कोजेब-कार्बेन्डाजिम के 0.2 प्रतिशत घोल (20 ग्राम प्रति लीटर पानी) या ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन-टेयूकोनाजोल को पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए.
भारत दुनिया में सबसे अधिक आम उत्पादन करने वाला देश है, इसलिए इसकी देखभाल बेहद जरूरी है. आम के गुजिया कीट से बचाव के लिए सही समय पर उपाय करना आवश्यक है. फरवरी से मार्च तक यह कीट जमीन से निकलकर पेड़ों पर चढ़ जाता है. इनकी अधिक संख्या आम के पेड़ों को नुकसान पहुंचाती है, क्योंकि ये पत्तियों और बौर का रस चूसकर उन्हें नष्ट कर देते हैं. कीटों की अधिकता होने पर फलों का बनना भी प्रभावित होता है.


