पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर वोट बैंक की राजनीति को लेकर भूचाल आ गया है. इस बार विवाद का केंद्र दक्षिण 24 परगना जिले का वह सरकारी रिकॉर्ड है जिसने चुनाव आयोग से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक ऐसे मतदाता का विवरण साझा किया है जिसमें माता-पिता के नाम हिंदू (भुवनचंद्र बेरा और पुष्पाराणी बेरा) हैं, जबकि उनके बेटे का नाम ‘शेख राजेश अली’ दर्ज है. इस खुलासे के बाद बीजेपी ने सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसी तरह की संदिग्ध पहचान और धांधली को छिपाने के लिए विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया का कड़ा विरोध कर रही हैं.
SIR प्रक्रिया और बीजेपी का कड़ा प्रहार
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर डेटा साझा करते हुए सवाल उठाया कि आखिर ममता बनर्जी मतदाता सूची की सफाई का विरोध क्यों कर रही हैं? उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य फर्जी नामों को हटाना और चुनावी अखंडता सुनिश्चित करना है. बीजेपी का आरोप है कि बंगाल में चुनावी रोल को जानबूझकर संदिग्ध नामों से भरा गया है ताकि एक विशेष वोट बैंक का लाभ उठाया जा सके. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी ममता बनर्जी के चुनाव आयोग पर दिए बयानों पर तंज कसते हुए पूछा कि अगर आयोग गलत है, तो वह तीन बार मुख्यमंत्री कैसे बनीं?
जन्म से पहले ही बन गया सर्टिफिकेट
दक्षिण 24 परगना जिले में प्रशासनिक लापरवाही का एक और हैरान करने वाला नमूना सामने आया है. चुनाव आयोग के रोल ऑब्जर्वर तब दंग रह गए जब उन्हें 1990 में जन्मे एक व्यक्ति का बर्थ सर्टिफिकेट मिला. चौंकाने वाली बात यह है कि इस प्रमाण पत्र का पंजीकरण व्यक्ति के जन्म की वास्तविक तारीख से दो महीने पहले ही पूरा कर लिया गया था. मगराहाट के ब्लॉक स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा जारी इस सर्टिफिकेट ने पूरी सत्यापन प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिए हैं.
चुनाव आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी से मांगी रिपोर्ट
सत्यापन के दौरान मिली इन विसंगतियों को चुनाव आयोग ने बेहद गंभीरता से लिया है. आयोग के सूत्रों के अनुसार, दक्षिण 24 परगना के जिला निर्वाचन अधिकारी से इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है. आयोग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या यह महज एक तकनीकी गलती है या फिर किसी बड़े फर्जीवाड़े का हिस्सा है.
सवाल-जवाब
अमित मालवीय द्वारा साझा की गई मतदाता विवरण में सबसे चौंकाने वाली बात क्या थी?
अमित मालवीय ने एक मतदाता की ऐसी जानकारी साझा की है जिसमें माता-पिता के नाम पूरी तरह हिंदू (भुवनचंद्र बेरा और पुष्पाराणी बेरा) दर्ज हैं, लेकिन उनके बेटे का नाम ‘शेख राजेश अली’ लिखा है. बीजेपी का दावा है कि इस तरह की विसंगतियां मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर की गई हेराफेरी और ‘वोट बैंक’ की राजनीति की ओर साफ इशारा करती हैं, जिसकी वजह से राज्य सरकार जांच का विरोध कर रही है.
बंगाल में SIR प्रक्रिया का ममता बनर्जी क्यों विरोध कर रही हैं, इस पर बीजेपी का क्या तर्क है?
बीजेपी का तर्क है कि SIR प्रक्रिया मतदाता सूची को साफ करने और अवैध या फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने के लिए एक अनिवार्य लोकतांत्रिक अभ्यास है. अमित मालवीय के अनुसार, ममता बनर्जी का विरोध प्रशासनिक असुविधा की वजह से नहीं, बल्कि इस डर से है कि अगर गहन जांच हुई तो उन लाखों संदिग्ध मतदाताओं की पोल खुल जाएगी जो टीएमसी के सत्ता में बने रहने का आधार माने जाते हैं.
दक्षिण 24 परगना जिले में जन्म प्रमाण पत्र को लेकर चुनाव आयोग ने किस प्रकार की अविश्वसनीय गड़बड़ी पकड़ी है?
चुनाव आयोग के रोल ऑब्जर्वर्स ने पाया कि मगराहाट के ब्लॉक स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा जारी एक बर्थ सर्टिफिकेट में पंजीकरण की तिथि व्यक्ति के वास्तविक जन्म से दो महीने पहले की है. साल 1990 के इस मामले ने प्रशासनिक ढांचे में गहरी पैठ बना चुके भ्रष्टाचार या लापरवाही को उजागर किया है, क्योंकि कोई भी आधिकारिक दस्तावेज व्यक्ति के अस्तित्व में आने से पहले पंजीकृत नहीं किया जा सकता.
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने ममता बनर्जी के चुनाव आयोग पर दिए बयानों का किस तरह जवाब दिया है?
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने को लेकर उन पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को पहले यह सोचना चाहिए कि यदि चुनाव आयोग पूरी तरह पक्षपाती या गलत होता, तो वह पश्चिम बंगाल में तीन बार चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री कैसे बन पातीं? यह बयान ममता सरकार के विरोध को राजनीतिक अवसरवाद करार देने की कोशिश है.
विसंगतियों का पता चलने के बाद चुनाव आयोग ने अब आगे की क्या कार्रवाई तय की है?
चुनाव आयोग ने दक्षिण 24 परगना के जिला निर्वाचन अधिकारी को पूरे मामले की फिर से पुष्टि करने और विस्तृत स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं. आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यह केवल टाइपिंग की गलती है या इसके पीछे मतदाता सूची को प्रभावित करने का कोई बड़ा षड्यंत्र है. इसके साथ ही, पूरे राज्य में SIR प्रक्रिया के तहत संदिग्ध दस्तावेजों की सघन जांच के आदेश दिए जा सकते हैं.


