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Inside story of Avimukteshwaranand Controversy: यौन शोषण के आरोपों में घिरे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए शुक्रवार का दिन निर्णायक होने वाला है. इलाहाबाद हाईकोर्ट अगर उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करता है, तो गिरफ्तारी तय है. ऐसे में यूपी पुलिस न केवल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, बल्कि उनके चेलों और इस पूरे कांड के 10 मुख्य किरदारों की लिस्ट तैयार कर ली है, जिनसे पूछताछ में बड़े राज खुल सकते हैं.
शुक्रवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का आएगा बड़ा फैसला.
इलाहाबाद. बटुकों के यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती क्या शुक्रवार शाम तक गिरफ्तार हो जाएंगे? इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है. अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट उनकी अग्रिम जमानत याचिका नामंजूर करती है तो हो सकता है यूपी पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर ले. अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी के बाद यूपी पुलिस के निशाने पर वो 10 लोग होंगे, जिनका इस घटना से डायरेक्ट या इनडायरेक्ट कनेक्शन था. यूपी पुलिस इन 10 लोगों से पूछताछ और जरुरत हुई तो गिरफ्तार कर इस कांड से पर्दा उठा सकती है. आइए जानते हैं इस कांड के 10 चेहरे कौन हैं और क्यों यूपी पुलिस के रडार पर वह आ गए हैं?
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य होने का दावा करने वाले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की कानूनी घेराबंदी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. शुक्रवार 27 फरवरी 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच सुनवाई करेगी. यह सुनवाई तय करेगी कि स्वामी शुक्रवार की रात जेल में बिताएंगे या उन्हें अदालती राहत मिलेगी. प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो (POCSO) कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर के बाद से ही यूपी पुलिस की विशेष टीमें वाराणसी और प्रयागराज में सक्रिय हैं. ऐसे में बाबा के इर्द-गिर्द रहने वाले ये 10 चेहरे यूपी पुलिस के रडार पर हैं.
कौन हैं वो 10 राजदार?
- 1. मुकुंदानंद गिरी (नामजद आरोपी): स्वामी का सबसे करीबी शिष्य, जिस पर नाबालिगों ने सीधे यौन शोषण और स्वामी की मदद करने का आरोप लगाया है.
- 2. आश्रम का मुख्य व्यवस्थापक: वह व्यक्ति जो बटुकों (छात्रों) के रहने और उनकी ‘गुरु सेवा’ की ड्यूटी तय करता था.
- 3. दो ‘अज्ञात’ चेलों की पहचान: एफआईआर में दर्ज 2-3 अज्ञात लोगों में वे शामिल हैं जो शोषण के समय पहरा दे रहे थे.
- 4. माघ मेला कैंप का इंचार्ज: जनवरी में संगम तट पर लगे शिविर की देखरेख करने वाला व्यक्ति.
- 5. आश्रम का रसोइया और सेवक: जो बच्चों की रोजमर्रा की गतिविधियों के चश्मदीद हो सकते हैं.
- 6. निजी सुरक्षाकर्मी: स्वामी के साथ साये की तरह रहने वाले गनर्स और बाउंसर.
- 7. आईटी सेल का प्रमुख: उन डिजिटल सबूतों और फुटेज के लिए जो घटना के समय गायब किए गए.
- 8. वाराणसी विद्या मठ के सेवादार: जहां बच्चों को डरा-धमकाकर रखे जाने की आशंका है.
- 9. आश्रम का वह डॉक्टर: जिसने कथित तौर पर बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर गुपचुप इलाज किया.
- 10. एक प्रभावशाली राजनीतिक संपर्क: जो कथित तौर पर पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था.
बटुकों की आपबीती से लेकर कोर्ट तक
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने दो नाबालिगों जिनका उम्र 14 और 17 वर्ष है, की तरफ से कोर्ट में अर्जी दी. आरोप है कि माघ मेला के दौरान ‘गुरु सेवा’ के नाम पर इन बच्चों का शारीरिक शोषण किया गया. पीड़िता का बयान वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए दर्ज किया गया है, जिसमें उन्होंने विस्तार से बताया है कि कैसे धर्म की आड़ में उनके साथ कुकृत्य हुआ.
स्वामी का दांव और पुलिस की रणनीति
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को ‘राजनीतिक साजिश’ और ‘गौ-रक्षा आंदोलन’ को दबाने का तरीका बताया है. उन्होंने शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज पर ही सवाल उठाए हैं. हालांकि, पुलिस के पास वैज्ञानिक साक्ष्य और बच्चों के 164 के बयान मौजूद हैं. कल दोपहर बाद हाईकोर्ट जमानत अर्जी खारिज करता है, तो यूपी पुलिस की ‘स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप’ (SOG) स्वामी को हिरासत में लेने के लिए पूरी तरह तैयार है.
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भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें


