Brahma Muhurta: रात के सन्नाटे में जब पूरी दुनिया गहरी नींद में डूबी होती है, तभी अचानक आपकी आंख खुल जाती है. घड़ी पर नजर जाती है 3:17… या 4:05. हर बार लगभग यही समय. आप उठते हैं, बाथरूम जाते हैं और वापस सोने की कोशिश करते हैं. सुबह उठकर इसे सामान्य मान लेते हैं शायद ज्यादा पानी पी लिया होगा, शायद उम्र का असर होगा. लेकिन अगर यह सिलसिला रोज़ का है, तो सवाल उठना लाज़मी है आखिर नींद ठीक इसी समय क्यों टूटती है? क्या यह सिर्फ शरीर का संकेत है या इसके पीछे कोई और वजह भी छिपी है? इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं इंदौर निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह.
ब्रह्म मुहूर्त: समय जब ऊर्जा बोलती है
भारतीय ज्योतिष और वेदों में सुबह 3 से 5 बजे के बीच का समय “ब्रह्म मुहूर्त” कहा गया है. ‘ब्रह्म’ यानी सृष्टि की चेतना और ‘मुहूर्त’ यानी विशेष समय. यह वह काल है जब रात और सुबह के बीच की रेखा धुंधली होती है. वातावरण शांत, हवा शुद्ध और मन अपेक्षाकृत स्थिर होता है. ज्योतिषीय मान्यता है कि इस समय चंद्रमा और बृहस्पति का प्रभाव सूक्ष्म स्तर पर मन और बुद्धि को प्रभावित करता है. कई साधक बताते हैं कि इसी समय ध्यान, जप या प्रार्थना अधिक गहराई से अनुभव होती है. यही कारण है कि प्राचीन आश्रमों में ऋषि-मुनि इसी समय साधना करते थे.
क्या यह सिर्फ संयोग है?
अगर आपकी नींद रोज़ाना इसी समय टूटती है, तो ज्योतिष इसे आत्मिक जागरण का संकेत मानता है. माना जाता है कि आपकी चेतना किसी बदलाव के दौर से गुजर रही है. यह वह समय है जब अवचेतन मन सबसे सक्रिय होता है. कई लोग बताते हैं कि इसी समय उन्हें जीवन के बड़े फैसलों के उत्तर मिले. हालांकि, यह भी सच है कि शरीर की जैविक घड़ी सर्कैडियन रिद्म भी इस समय हल्की नींद की अवस्था में पहुंचती है. ज्योतिष इसे शरीर और ब्रह्मांड की लय का मेल मानता है.
पितृ ऊर्जा और सूक्ष्म संकेत
भारतीय परंपरा में पितरों का विशेष महत्व है. मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में सूक्ष्म लोक और स्थूल लोक के बीच का परदा पतला होता है. अगर कोई व्यक्ति लगातार इस समय जागता है, तो इसे पितृ आशीर्वाद या संदेश से भी जोड़ा जाता है. कई परिवारों में बुजुर्ग सलाह देते हैं कि अगर इस समय नींद खुले तो दो मिनट शांत बैठकर अपने इष्ट देव या पूर्वजों को स्मरण करें. यह कोई डराने वाली बात नहीं, बल्कि जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है.
इष्ट देव की पुकार?
ज्योतिष के अनुसार हर व्यक्ति की कुंडली में एक ग्रह विशेष रूप से प्रभावशाली होता है, जो उसके इष्ट देव से संबंध दर्शाता है. अगर जीवन में उलझनें बढ़ रही हों और उसी दौरान ब्रह्म मुहूर्त में नींद खुलने लगे, तो इसे आत्मचिंतन का निमंत्रण समझा जाता है. कई लोग इस समय “ॐ” का उच्चारण या कुछ मिनट ध्यान करने की सलाह देते हैं.
शरीर और ग्रहों का संबंध
आयुर्वेद के अनुसार रात 2 से 6 बजे का समय वात प्रधान होता है. वात गति और निष्कासन से जुड़ा है, इसलिए इस समय शारीरिक जरूरत महसूस होना स्वाभाविक है. ज्योतिष इसे ग्रहों की चाल और शरीर के तत्वों के तालमेल के रूप में देखता है. यानी जो बाहर ब्रह्मांड में घट रहा है, उसका सूक्ष्म असर भीतर भी पड़ता है.
क्या करें अगर नींद खुल जाए?
सबसे पहले घबराएं नहीं. इसे परेशानी मानकर झुंझलाने की बजाय, एक अवसर की तरह लें. बाथरूम से लौटकर तुरंत मोबाइल देखने की आदत छोड़ दें. दो से पांच मिनट शांत बैठें. गहरी सांस लें, मन को स्थिर करें. चाहें तो छोटी-सी प्रार्थना कर लें. नियमित अभ्यास से आप पाएंगे कि दिनभर की बेचैनी कुछ कम हो रही है.
ध्यान रहे, अगर बार-बार नींद टूटने से थकान, जलन या अन्य शारीरिक परेशानी हो रही हो तो चिकित्सकीय सलाह लेना भी जरूरी है. ज्योतिष संकेत देता है, लेकिन स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए.


