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Eye Exercises and Refractive Error: डॉक्टर्स की मानें तो आंखों की एक्सरसाइज से फोकसिंग और आंखों के कोऑर्डिनेशन में सुधार हो सकता है, लेकिन परमानेंट रिफ्रैक्टिव एरर को ठीक नहीं किया जा सकता. चश्मे का नंबर आंख की संरचना पर निर्भर करता है, जिसे एक्सरसाइज से बदला नहीं जा सकता है. ऐसे दावों को समझदारी से देखने की जरूरत है.
ऋतिक रोशन ने अमेरिका में जाकर आई ट्रेनिंग से चश्मे का नंबर घटाने का दावा किया है. (Image- Instagram)
Vision Training or Medical Myth: बॉलीवुड एक्टर ऋतिक रोशन ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ‘आई वर्कआउट’ यानी आंखों की एक्सरसाइज के जरिए उनका चश्मे का नंबर कम होकर आधा रह गया है. ऋतिक का यह पोस्ट इंस्टा पर वायरल हो रहा है. ऋतिक ने बताया कि 42 साल की उम्र में एक डॉक्टर ने उन्हें कहा था कि चश्मे का नंबर परमानेंट होता है और आंख कोई ऐसी मांसपेशी नहीं है, जिसे ट्रेन करके बदला जा सके. हालांकि उन्होंने इस बात को चुनौती की तरह लिया और बाद में वॉशिंगटन डीसी जाकर ऑप्टोमेट्रिस्ट डॉ. ब्राइस एपलबॉम के साथ 5 दिन का विजन ट्रेनिंग प्रोग्राम किया. रोज 4 घंटे की ट्रेनिंग के बाद उनके चश्मे का नंबर आधा रह गया और उन्हें नया प्रिस्क्रिप्शन लेना पड़ा. ऋतिक के इस दावे पर बहस छिड़ गई है.
डॉक्टर्स का मानना है कि 40 वर्ष की उम्र के बाद कई लोगों को प्रेस्बायोपिया नामक समस्या होने लगती है. यह उम्र से जुड़ी स्थिति है, जिसमें पास की चीजें पढ़ने में कठिनाई होती है, क्योंकि आंख की फोकसिंग क्षमता कम होने लगती है. कुछ मामलों में फोकसिंग और आंखों के कोऑर्डिनेशन से जुड़ी एक्सरसाइज से टेंपररी सुधार महसूस हो सकता है. संभव है कि अभिनेता को इसी तरह की फोकसिंग समस्या में लाभ मिला हो, लेकिन स्थायी रिफ्रैक्टिव एरर में वास्तविक कमी संभव नहीं है. चश्मे का नंबर इस एक्सरसाइज से कम करने की बात पूरी तरह सच नहीं है.
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