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कमांड नहीं, अब मूड पहचानेगा AI! कैंसर से जंग और फिर ‘शून्य लैब्स’ का जन्म

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Success Story Ritu Mehrotra Shunyaa Labs: भारत की शून्य लैब्स ने वॉइस AI इंफ्रास्ट्रक्चर में ऐसा इतिहास रचा है. जो भारत ही नहीं दुनिया का ध्यान खींच रहा है. 200+ भारतीय भाषाओं को समझने वाला यह वॉइस AI सिर्फ़ कमांड नहीं, बल्कि इंसानी भावनाओं और टोन को भी पहचानता है. कैंसर से जंग के दौरान जन्मा यह आइडिया आज ग्लोबल कंपनियों तक पहुंच चुका है. आखिर क्या है इस अनोखी तकनीक की पूरी कहानी?

दिल्ली: भारत और विश्व की AI इंडस्ट्री में एक नया इतिहास रचते हुए देश की एक शून्य लैब्स नाम की एक AI कंपनी ने वॉइस AI इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति लाई है. यह भारतीय कंपनी एक ऐसा वॉइस AI माड्यूल लेकर आई है, जिसमें 200 से अधिक भारतीय भाषाओं का सपोर्ट मौजूद है.

इस वॉइस AI माड्यूल की सबसे खास बात यह है कि यह सिर्फ यूजर की आवाज को सुनकर कमांड पर काम नहीं करता, बल्कि आवाज के पीछे छुपे भाव और टोन को भी समझता है. यानी यूजर गुस्से में हैं, परेशान हैं या सामान्य तरीके से बात कर रहा है. यह AI उसी के अनुसार प्रतिक्रिया और काम करता है. शून्य लैब्स की संस्थापक रितु मेहरोत्रा का दावा है कि इस तरह की तकनीक वाला वॉइस AI माड्यूल फिलहाल दुनिया में सिर्फ उनकी कंपनी के पास है.

कैंसर से जंग के दौरान जन्मा इस तरह के Voice AI का बनाने का विचार
ऋतु मेहरोत्रा ने Local18 से बात करते हुए यह बताया की इस अनोखे वॉइस AI माड्यूल का विचार उन्हें उस समय आया. जब वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रही थीं. उस दौर में उन्होंने लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं पर गहराई से सोचना शुरू किया. इन्हीं समस्याओं में से एक बड़ी समस्या थी, भाषा को समझने और संवाद की बाधा. ऋतु कहती हैं कि भारत जैसे बहुभाषी देश में लोग अक्सर भाषा के कारण अपनी बात सही तरीके से नहीं रख पाते. यहीं से उनके मन में एक इस तरह के वॉइस AI माड्यूल को बनाने का विचार आया. जो हर भाषा को समझ सके और इंसानों की भावनाओं को भी पहचान सके. इसी सोच के साथ उन्होंने इस तकनीक पर काम शुरू किया, जो आज एक मजबूत वॉइस AI इंफ्रास्ट्रक्चर का रूप ले चुकी है. ऋतु ने यह भी बताया की आज शून्य लैब्स का यह वॉइस AI माड्यूल कई बड़ी वैश्विक कंपनियों द्वारा अपनाया जा रहा है. ये कंपनियां अपने बिजनेस को आसान और तेज बनाने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं.

IIT से न होना और AI Summit 2026
ऋतु मेहरोत्रा ने एक अहम बात साझा करते हुए कहा कि वह IIT से नहीं हैं. उन्होंने यह इसलिए कहा क्योंकि अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि AI तकनीक पर काम करने वाले सभी लोग IITian होते हैं. ऋतु बताती हैं कि उन्होंने इकोनॉमिक्स ऑनर्स की पढ़ाई की और उसके बाद IIFT से MBA किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दुनिया की कई बड़ी कंपनियों में काम किया, जिनमें बुकिंग.कॉम और ज़ोमैटो जैसी नामी कंपनियां शामिल हैं. ऋतु ने यह भी बताया कि उन्हें और उनकी टीम को AI समिट 2026 में बड़ा सम्मान मिला. इस समिट में शून्य लैब्स का नाम उन टॉप 5 भारतीय AI कंपनियों की श्रेणी में आया, जो अपनी खुद की रिसर्च पर आधारित यूनिक टेक्नोलॉजी विकसित कर रही हैं.

ग्लोबल लेवल को वॉइस AI से बदलने का सपना
अंत में ऋतु मेहरोत्रा ने अपने भविष्य के सपनों के बारे में बताया. उनका लक्ष्य शून्य लैब्स को ग्लोबल लेवल पर ले जाना है. वह ऐसा AI सिस्टम बनाना चाहती हैं, जिसमें लोग सिर्फ अपने फोन से बोलकर यह कहें कि उन्हें क्या चाहिए. बिना कोई ऐप खोले और AI उनके आदेश को समझे, ऑर्डर अपने आप प्लेस हो जाए और सामान सीधे उनके घर तक पहुंच जाए. ऋतु का मानना है कि आने वाले समय में वॉइस AI इंसानों की जिंदगी को पहले से कहीं ज़्यादा आसान बनाने वाला है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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