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CBSE 12th Physics Paper 2026: सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026 में फिजिक्स का पेपर कठिन होने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है. एक शिक्षक ने जनहित याचिका (PIL) दायर कर स्टूडेंट्स को ग्रेस मार्क्स देने और पेपर की दोबारा जांच कराने की मांग की है. लाखों छात्र अब कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं.
CBSE 12th Physics Paper 2026: सीबीएसई 12वीं फिजिक्स पेपर का स्तर बहुत कठिन था
नई दिल्ली (CBSE 12th Physics Paper 2026). सीबीएसई बोर्ड 12वीं फिजिक्स की परीक्षा ने इस साल स्टूडेंट्स की नींद उड़ा दी है. परीक्षा देकर निकले बच्चों का कहना है कि पेपर बहुत मुश्किल था और उसे हल करना चुनौती बन गया था. अब यह मामला सिर्फ स्कूल या बोर्ड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गया है. शिक्षक प्रशांत किराड ने सीबीएसई 12वीं फिजिक्स पेपर 2026 के बहुत ज्यादा कठिन होने को लेकर हाईकोर्ट में अर्जी (PIL) लगा दी है.
सीबीएसई 12वीं फिजिक्स पेपर पर क्यों मचा है बवाल?
सीबीएसई 12वीं फिजिक्स परीक्षा 2026 देकर निकले स्टूडेंट्स के चेहरों पर खुशी के बजाय चिंता थी. छात्रों का कहना है कि पेपर न केवल लंबा था, बल्कि इसमें जो सवाल पूछे गए थे, वे भी बहुत ज्यादा घुमावदार थे और सिलेबस के बाहर से भी थे. कई परीक्षार्थियों ने शिकायत की कि उन्होंने साल भर जितनी मेहनत की थी, पेपर उसके मुकाबले बहुत अलग आया था. इसी बात को लेकर एक टीचर ने हाईकोर्ट का रुख किया है, जिससे परीक्षार्थियों के साथ इंसाफ हो सके.
कोर्ट में दी गई अर्जी में क्या है?
टीचर ने अपनी अर्जी में साफ तौर पर कहा है कि बोर्ड को पेपर सेट करते समय बच्चों की मानसिक स्थिति और उनके सीखने की क्षमता का ध्यान रखना चाहिए. याचिका में बताया गया है कि पेपर का स्तर वैसा नहीं था जैसा सीबीएसई के सैंपल पेपर में दिखाया गया था. बहुत से सवाल इंजीनियरिंग की बड़ी परीक्षाओं (जैसे JEE) के लेवल के थे. टीचर का कहना है कि एक सामान्य बोर्ड परीक्षा में इतने कठिन सवाल पूछना सही नहीं है. इससे स्टूडेंट्स परेशान हो जाते हैं.
बच्चों और माता-पिता की चिंता
फिजिक्स को आमतौर पर काफी स्कोरिंग विषय माना जाता है. इसके नंबर आगे चलकर बहुत काम आते हैं. अगर इसमें नंबर कम आते हैं तो अच्छे कॉलेज में एडमिशन मिलना मुश्किल हो जाता है. पेरेंट्स का कहना है कि फिजिक्स का पेपर कठिन होने की वजह से बच्चे तनाव में हैं. टीचर की अर्जी में मांग की गई है कि बोर्ड एक ऐसी कमेटी बनाए जो इस पेपर की जांच करे और देखे कि क्या वाकई सवाल कोर्स से बाहर के या जरूरत से ज्यादा कठिन थे.
क्या ग्रेस मार्क्स मिलेंगे?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड बच्चों को कुछ ‘एक्स्ट्रा नंबर’ या ‘ग्रेस मार्क्स’ देगा. टीचर की अर्जी में यह भी कहा गया है कि कॉपियां जांचते समय थोड़ी नरमी बरती जाए. अगर हाईकोर्ट को लगता है कि पेपर वाकई बहुत मुश्किल था तो वह बोर्ड को निर्देश दे सकता है कि बच्चों का नुकसान न होने दिया जाए. इससे उन लाखों परीक्षार्थियों को फायदा होगा जो इस पेपर के बाद से डरे हुए हैं. वे अगले पेपर की तैयारी अच्छे मन से कर पाएंगे.
शिक्षा जगत की राय
कई एक्सपर्ट का मानना है कि सीबीएसई बोर्ड को पेपर का एक पैमाना तय रखना चाहिए. अचानक से बहुत मुश्किल सवाल पूछने से स्टूडेंट्स का भरोसा टूटता है. उन्हें अपनी तैयारी पर शक होने लगता है और इससे अगला पेपर भी बिगड़ सकता है. अब सबकी नजरें हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं. यह फैसला न केवल इस साल के स्टूडेंट्स के लिए जरूरी है, बल्कि आने वाले सालों के लिए भी एक मिसाल बनेगा कि बोर्ड परीक्षाओं का स्तर कैसा होना चाहिए.
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