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Chhatarpur News: भारती ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर अकाउंट भी बनाया है. जिसमें 5 हजार फॉलोअर्स हो गए है. उनका बुंदेली गीत छतरपुर के बुंदेली दर्पण डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया था, जिसे अब तक लगभग 4 मिलियन व्यूज मिल चुके है. इतने लोगों द्वारा उनके बुंदेली कला का सम्मान किए जाने पर उन्हें बहुत खुशी हुई है.
छतरपुर की 15 वर्षीय भारती चौबे जिन्होंने डॉक्टर या इंजीनियर बनने के बजाय बुंदेलखंड की लोकगीत परंपरा को आगे बढ़ाने का फैसला किया है. पिछले 2 सालों से बुंदेली सिंगिंग कर रही है. वर्तमान में कक्षा 9वीं में पढ़ाई कर रही भारती का कहना है कि उन्होंने बुंदेली लोकगीतों के प्रचार-प्रसार को नई पीढ़ी में करने के लिए इसे अपने करियर के रूप में चुना है. हाल ही में उनके एक वीडियो को सोशल मीडिया पर 4 मिलियन व्यूज मिले है.
अपने पिता से प्रेरित होकर जो बुंदेली लोकगीत लिखते हैं और जिले भर में मशहूर है. भारती ने भी धीरे-धीरे बुंदेली लोकगीत गाना और लिखना शुरू किया. भारती के अनुसार, बुंदेली सिंगिंग उनका शौक नहीं बल्कि एक करियर विकल्प है. वह क्लासिकल संगीत भी सीख रही है और साथ ही अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान दे रही है.
भारती बताती है कि उन्होंने बुंदेली लोकगीत इसलिए चुना क्योंकि वे हर दिन बुंदेली भाषा में बात करती है और उन्हें अपनी जड़ों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता महसूस हुई. उन्होंने कहा कि बुंदेली लोकगीतों में कई विधाएं है और उन्होंने कछियाई विधा का एक गीत सुनाया.
भारती ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर अकाउंट भी बनाया है. जिसमें 5 हजार फॉलोअर्स हो गए है. उनका बुंदेली गीत छतरपुर के बुंदेली दर्पण डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया था, जिसे अब तक लगभग 4 मिलियन व्यूज मिल चुके है. इतने लोगों द्वारा उनके बुंदेली कला का सम्मान किए जाने पर उन्हें बहुत खुशी हुई है. परिवार से पूरा समर्थन मिलने के बाद उन्होंने तय कर लिया है कि उनका जीवन संगीत में ही है और वे इसी में अपना करियर बनाएंगी.


