आपकी डिजिटल दुनिया का ताला अब आपकी उंगलियों पर होगा. आपके पास इसे रोकने की चाबी होगी. सोमवार को देश की सबसे बड़ी अदालत के गलियारों में व्हाट्सएप ने ये ऐलान किया. सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर व्हाट्सएप ने कहा कि अब लोगों की प्राइवेट जानकारी किसी उनकी जागीर नहीं होगी. यह केवल एक अदालती सुनवाई नहीं बल्कि डिजिटल आजादी की एक नई पटकथा है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की अदालत में हुई एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान व्हाट्सएप की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के उस आदेश का पालन करेगा जिसमें उसे यूजर्स को अपने डेटा को अन्य मेटा (Meta) कंपनियों (जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम) के साथ शेयर करने पर अधिक नियंत्रण देने को कहा गया है. यह फैसला भारतीय यूजर्स की डेटा प्राइवेसी के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है.
कपिल सिबल ने दिया कोर्ट को आश्वासन
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद व्हाट्सएप और उसकी पेरेंट कंपनी मेटा ने घुटने टेक दिए हैं. सुनवाई में कपिल सिब्बल ने कंपनी की तरफ से भरोसा दिया कि वे विज्ञापन संबंधी डेटा शेयरिंग पर CCI (भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग) के सुरक्षा उपायों और NCLAT के आदेश का पूरी तरह पालन करेंगे. यह भारतीय यूजर्स की प्राइवेसी के लिए बड़ी जीत है, क्योंकि अब डेटा शेयरिंग पर यूजर्स का नियंत्रण बढ़ेगा. वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ को आश्वस्त किया कि 16 मार्च 2026 तक सभी निर्देशों को लागू कर दिया जाएगा.
सीजेआई का सख्त रुख
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए मेटा और व्हाट्सऐप की अंतरिम रोक वाली अर्जियों को खारिज कर दिया. अब कंपनियों को CCI के समक्ष एक अनुपालन हलफनामा भी दाखिल करना होगा. हालांकि, मामले से जुड़े मुख्य कानूनी मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी, लेकिन तत्काल प्रभाव से व्हाट्सऐप को अपनी प्राइवेसी नीतियों में बदलाव कर यूजर्स को सहमति का विकल्प देना होगा.
1. CCI के आदेश का पालन
व्हाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट को क्या आश्वासन दिया है?
व्हाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के उस निर्देश का पालन करेगा, जिसमें उसे यूजर्स को अपने डेटा को अन्य मेटा कंपनियों के साथ साझा करने पर अधिक नियंत्रण देने को कहा गया है. इसका मतलब है कि यूजर्स के पास अब यह तय करने का अधिकार होगा कि उनका डेटा फेसबुक या इंस्टाग्राम जैसी अन्य मेटा प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा किया जाए या नहीं.
2. 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना और चुनौती
व्हाट्सएप से जुड़े मामले की शुरुआत कैसे हुई थी?
दरअसल, यह मामला व्हाट्सएप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है. CCI ने इस पॉलिसी को प्रतिस्पर्धा-विरोधी मानते हुए कंपनी पर 213.14 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया था. व्हाट्सएप ने इस जुर्माने और CCI के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. अब कंपनी ने इस चुनौती को वापस लेने की इच्छा जताई है.
3. NCLAT के आदेश को चुनौती वापस
व्हाट्सएप ने कौन सी अर्जी वापस लेने की बात कही है?
सुनवाई के दौरान, व्हाट्सएप ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (NCLAT) के उस आदेश को चुनौती देने वाली अपनी अंतरिम अर्जी को वापस लेने की बात कही, जिसमें NCLAT ने CCI के निर्देश को लागू करने को कहा था. CCI के निर्देश में डेटा शेयरिंग के लिए ‘यूजर-कंसेंट’ (उपयोगकर्ता की सहमति) आधारित ढांचा अनिवार्य किया गया था.
4. सुप्रीम कोर्ट की पीठ का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर क्या निर्णय लिया?
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने व्हाट्सएप और मेटा को अपनी अर्जियां वापस लेने की अनुमति दे दी. यह फैसला दर्शाता है कि कंपनियों को अब भारतीय कानून और प्रतिस्पर्धा आयोग के नियमों का पालन करना होगा, खासकर जब बात यूजर्स की निजता और डेटा नियंत्रण की हो.
5. डेटा प्राइवेसी की बड़ी जीत
इस फैसले का भारतीय यूजर्स के लिए क्या महत्व है?
यह घटनाक्रम भारतीय यूजर्स के लिए एक बड़ी जीत है क्योंकि अब उनके पास अपने निजी डेटा पर अधिक नियंत्रण होगा. यह कदम भारत में डेटा संरक्षण कानूनों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स की निजता का सम्मान करने के लिए मजबूर करेगा. अब यूजर्स को अपनी पसंद के अनुसार डेटा शेयरिंग का विकल्प चुनना होगा, जिससे उनकी प्राइवेसी बेहतर ढंग से सुरक्षित रहेगी.


